जीवन में कुछ लोग दाल में लग रहे तड़के की तरह आते हैं। भले ही उनका प्रभाव थोड़े वक्त तक रहता है, पर वे दाल के स्वाद को पूरी तरह से बदल कर रख देते हैं। ऐसी ही एक कहानी है, जिसका एक पात्र मैं भी रह चुका हूं।सुगंधा—नाम सुनकर ही मन में एक सुकून का भाव उत्पन्न होता है। ऐसी ही एक लड़की से एक अनोखे तरीके से मेरी जान-पहचान हुई। सुगंधा शायद मुझे पहले से जानती थी, पर मैं इस बात से अनजान था कि वह मुझे पहचानती है।
हमारी जान-पहचान इंस्टाग्राम के जरिए हुई। मैं अक्सर अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी की 'व्यू लिस्ट' में उसका नाम देखा करता था। यह सिलसिला शायद दो महीने से अधिक चला। मेरी एक आदत है कि जिसे मैं नहीं जानता और वह मुझे लगातार मेरे आसपास (डिजिटल दुनिया में) दिखे, तो मैं उससे परिचय करने की कोशिश में लग जाता हूं। मैंने एक कदम आगे बढ़ाया और उसे 'रिक्वेस्ट' भेज दी। वह तुरंत स्वीकार भी हो गई। मैं समझ नहीं पा रहा था कि एक प्यारी सी लड़की ने बिना किसी हिचकिचाहट के मेरी रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली, ऐसा आमतौर पर कम ही देखने को मिलता है।
जैसा कि कहा जाता है कि पहला कदम लड़के को उठाना चाहिए, तो मैंने सुगंधा को मैसेज किया, पर कोई रिप्लाई नहीं आया। ऐसे में मेरी जिज्ञासा और बढ़ गई। ईश्वर ने लड़कियों को बुद्धि दी, खूबसूरती दी और स्नेह से भरा हुआ बनाया, पर शायद उन्हें थोड़ा भावुक भी अधिक बनाया है। अगर उनकी सच्चे मन से तारीफ की जाए, तो वे मुस्कुराकर पिघल ही जाती हैं।
ऐसा ही हुआ, मैंने सुगंधा की प्रशंसा में कुछ शब्द कहे और उसका जवाब आ गया। फिर हमारी बातें शुरू हुईं—ढेर सारी बातें, जो घंटों तक चलती रहीं।
बातों-बातों में मुझे समझ आया कि सुगंधा किसी कारण से परेशान है। और जब किसी लड़के को पता चले कि कोई लड़की परेशान है, तो वह उसका 'हमदर्द' बनने की भरपूर कोशिश में लग जाता है। मैंने भी वही किया और उससे उसकी परेशानी का कारण पूछा। शुरुआत में उसने विस्तार से कुछ नहीं बताया। तब तक मुझे बस यही लग रहा था कि कोई बात उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही है।
धीरे-धीरे बातें आगे बढ़ीं और मुझे उसके बारे में काफी कुछ जानने को मिला—वह कहां से है, कहां रहती है, उसके कितने भाई-बहन हैं, इत्यादि। मेरी एक प्रवृत्ति है कि मुझे बहुत जल्दी किसी से लगाव नहीं होता। यह अलग बात है कि मैं सामने वाले को यह महसूस करवा देता हूं कि वह मेरे लिए बहुत खास है, पर असल में ऐसा होता नहीं है। सुगंधा के साथ भी यही हो रहा था। उसे लग रहा था कि मैं उसके साथ एक गहरा रिश्ता बनाने वाला हूं, जबकि मेरा उद्देश्य केवल यह जानना था कि वह मेरी स्टोरी क्यों देखती थी? क्या वह मुझे जानती थी? और वह किस बात से परेशान थी?
उसकी परेशानी का पता मुझे तब चला जब मैंने देखा कि वह सारी-सारी रात जागती रहती थी। बातचीत के शुरुआती दिनों में ही मुझे महसूस हो गया था कि किसी ने उसका दिल बहुत बेरहमी से तोड़ा है। फिर मैंने अपने एक दोस्त शुभम से उसके बारे में पूछा। मुझे यकीन तो नहीं था, पर शक था कि इसके पीछे वही होगा, क्योंकि उन दोनों की 'म्यूचुअल फ्रेंड' लिस्ट में एक ऐसा व्यक्ति था जो दोनों का ही दोस्त था।
मेरे दोस्त ने बस इतना कहा, "बात करो उससे, कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।" इस बात से मुझे यकीन हो गया कि वे एक-दूसरे को जानते हैं। फिर मैंने सुगंधा से पूछा कि क्या वह शुभम को जानती है? शुरुआत में उसने मना किया, पर धीरे-धीरे स्वीकार कर लिया कि उन दोनों का प्रेम संबंध (रिलेशन) था और कुछ समय पहले ही शुभम ने उससे ब्रेकअप किया था।
जब वह अपनी कहानी बता रही थी, तब मैंने महसूस किया कि सुगंधा वाकई उससे बहुत प्रेम करती थी। मैं अपने दोस्त को अच्छी तरह जानता था कि वह किस तरह का इंसान है। मैंने कोशिश की कि सुगंधा को वे सारी बातें बताऊं जो उसे इस प्रेम-प्रसंग के दुख से बाहर निकलने में मदद करें। पर प्यार का स्वभाव भी अनोखा है; हम जिसके साथ समय बिताने लगते हैं, हमें उससे लगाव हो जाता है।
ऐसा ही कुछ सुगंधा के साथ हुआ। शायद उसे मेरे द्वारा दिए गए अटेंशन और समय से प्रेम हो गया। मैं उसे केवल इसलिए स्नेह दे रहा था कि वह अच्छा महसूस करे, पर वह उसे मेरा प्यार समझ बैठी। प्यार में पड़ा इंसान मध्य रात्रि में अपनी भावनाओं के सबसे करीब और मानसिक रूप से सबसे कमजोर होता है।
एक दिन सुगंधा ने मेरे सामने प्रेम का प्रस्ताव रखा। उसे लगा कि इतनी लंबी बातचीत और सहयोग का मतलब प्यार ही है। पर ऐसा नहीं था। मैं तो बस उसे उसके अवसाद (Depression) से बाहर निकालने में मदद कर रहा था।
जब मैंने उसका प्रस्ताव अस्वीकार किया, तब मैंने उससे एक बात कही थी— "तुम्हें जब भी मेरी जरूरत होगी, मैं तुम्हारे आसपास रहूंगा।" और आज तक मैं अपनी यह बात निभाने में सफल रहा हूं।