नौकर उसके आगे सलाम ठोंकते थे क्योंकि वो सुनंदा की सबसे खास सर्वेंट थी। मगर नित्या को वो खास पसंद नहीं आई थी। फिलहाल तो उसे भूख लग रही थी इसलिए उसने रो रो कर सबको अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
"सच कहूं तो यह बहुत ही जबरदस्त तरीका है लेकिन कभी कभी न चाहते हुए भी मुझे रोना पड़ रहा है। क्या मैं पिछले जन्म के बचपन में भी ऐसी ही थी जो बिना वजह रोती थी....? नहीं! नहीं! मुझे तो भूख लगी है तभी तो रो रही हूं न?"
मां सुनंदा ने उसे स्तनपान कराया और वह तृप्त होकर फिर नींद की चपेट में आ चुकी थी। उसकी नींद तब खुलीं जब तीन सिर उसके ऊपर हैरानी से उसे ताक रहें थें।
"हे भगवान! अब यह कौन है?" वह बरबस ही रियेक्ट कर गईं। उसने मुंह बनाया और फिर एक लंबी जम्हाई ली।
"Wow! she is so cute. What a lovely girl." वीर ने कहा तो बाकी दो मुस्कुरा उठें।
"So finally हमें भी sister मिल गई। अब मैं भी हरि के सामने show off कर सकता हूं। what you say?" यश ने कहा और इस बार उसके बड़े भाई ने उसे टपली मारी।
"Sister, show off करने के लिए नहीं होती है idiot. Sister से तो राखी बंधवाई जाती हैं।" रुद्र ने कहा।
"हां ठीक है! इसे देखो यह हमें कैसे घूर रही हैं? Hey little girl! I am Veer, your brother. And they both of your brothers too." वीर ने कहा तो बाकी दो उसे छेड़ने लगें।
"वीर छोटे बच्चों को इंग्लिश समझ नहीं आती।" रुद्र ने कहा तो यश ठहाके मारकर हंस पड़ा।
अरे तो बच्चे कौन सा हिंदी भाषा जानते हैं? उन्हें तो कुछ समझ नहीं आता। वीर ने कहा तो इस पर नित्या चिढ़ गईं।
"क्या मतलब कि मुझे समझ नहीं आता? मैं सब समझ सकती हूं। इनकी बातें और इनकी शैतानी भरा दिमाग। खैर मुझे उससे क्या? इन्हें जो समझना हैं समझ सकते हैं। बेवकूफ छोटे लड़के। हूहह।" उसने मुंह फेर लिया और दुसरी ओर देखने लगी जहां उसकी नजरें अपनी मां सुनंदा पर टिक गई।
"हे भगवान! मुझे मेरी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा है? क्या इतनी सुन्दर महिला मेरी मां है? हां, यहीं मेरी मां है। इस फैमिली में हर कोई इतना अट्रेक्टिव क्यों है? पर मां आज बहुत ज्यादा सुंदर लग रही है। यह पहली बार है जब मैंने मां को इतने अच्छे से सजते संवरते देखा हैं....!! उनकी आंखों में चमक है।" नित्या खिलखिला उठी।
सुनंदा ने जल्दी से आकर तीनों बच्चों को गले से लगा लिया और उन्हें देखकर उसकी खुशी सच में दुगुनी हो गई थी। पर नित्या को यह पसंद नहीं आया कि उसकी मां उससे पहले किसी और से प्यार करें। वो रोने लगी और इस पर यश ने मुंह बना लिया।
"देखा बड़ी मां हमारी छोटी बहन हमसे जल रही हैं।" यश ने कहा तो सुनंदा ने न में सिर हिला दिया और मुस्कुरा उठी।
"यश ऐसा नहीं कहते बेटा, शायद उसे भूख लगी हों या फिर कोई प्रॉब्लम हो?" सुनंदा ने कहा और नित्या को देखा तो वो मुस्कुरा दी।
"देखा मैंने कहा था ना, इसे तो सच में परेशानी हो रही हैं।" सुनंदा ने कहा और सुनिता ताई को आवाज लगाई। और फ़िर ताई नित्या को साफ करने लगीं।
तभी यश ने झांक कर देखा और छी छी करते हुए दूर भाग गया।
"इसने पोट्टी कर दी है। मुझे ऐसी गन्दी बहन नहीं चाहिए जो अपने कपड़े खराब करती हैं।" यश ने कहा तो सभी हंसने लगे।
"बेटा तुम जब छोटे थे न तब तो तुमने सबसे ज्यादा परेशान किया है। ऐसे ही कपड़े खराब कर के।" ताई ने कहा तो उसने फिर मुंह बना लिया।
"मैं नहीं मानता, मैं एक अच्छा लड़का हूं और अच्छे लड़के गंदे काम नहीं करते। इसलिए कपड़ा गंदा करने वाला पक्का वीर होगा?" यश ने कहा।
"ऐ! तुम मुझ पर इल्ज़ाम मत डालो। वो तुम ही हो जो हमेशा गलती करके मेरा नाम लेते हो।" वीर ने गुस्से से कहा और रुद्र दोनों को शांत करने लगा।
"तुम दोनों बात बात पर लड़ना बंद करोगे? हम अभी अभी घर आएं हैं और फिर भी हम लड़ रहे हैं। यह तो गलत है।" रुद्र ने कहा तो दोनों ने एक-दूसरे को पीठ दिखा दी। तीनों को देख देख सुनंदा मां बस खुशी से भावविभोर हो रहीं थी।
पिछले कुछ दिनों से बच्चे अपने ननिहाल में थें। यश और वीर दोनों जुड़वां हुएं थे इसलिए दोनों का स्वाभाव अलग अलग है। यश जो मस्तीखोर, जिद्दी और गुस्सैल स्वभाव का है तो वहीं वीर शांत स्वभाव और नर्म दिल इंसान। रुद्र हमेशा दोनों के झगड़ें को सॉल्व करता था। एक चतुर और होशियार लड़का। रुद्र पहले फैमिली का हिस्सा नहीं था, दरअसल रुद्र को जिन्दल साहब ने गोद लिया था और तब से वह इस खानदान का पहला बच्चा बन गया इसलिए वो पूरे फैमिली का चहेता है।
अभी भी यश अजीब अजीब मुंह बना बना कर वीर को छेड़ रहा था और वीर भी चिढ़ रहा था और अपनी बड़ी मां का हाथ थाम उनकी ओर देखने लगा इस उम्मीद से कि बड़ी मां यश को डांटेंगी।
"यश, वीर को परेशान मत करों, वो तुमसे पूरे दो मिनट बड़ा है, और बड़ों को परेशान नहीं करते।" सुनंदा मां ने कहा तो वीर ने मुंह बना लिया।
"बड़ी मां हमेशा ही बस समझाती हैं, मारती नहीं, गुस्सा नहीं होती। आखिर यश को कौन सबक सिखाएगा?" उसने मन में सोचा और कमरे से निकल कर नीचे की ओर दौड़ लगा लिया। बाकी सब हैरानी से उसे जाते हुए देखते रहे।
•••••••••••🌿
सभी मेहमान आ चुके थे और अब बस इंतजार था तो सुनंदा और बच्चे का। जब सुंनदा और जिन्दल साहब बच्चे को लेकर नीचे आएं तो सबकी नजरें बस उन पर ही टिकी थी।
नामकरण संस्कार विधिवत आरंभ हो चुका था जहां कई पंडितों द्वारा उसके उज्वल भविष्य के लिए यज्ञ भी किया गया और आखिर में उसका नाम रखा "आनिया।"
शाम तक यह कार्यक्रम चलता रहा जहां अब हवन के धुंए की जगह सिगरेट के धुओं ने ले लिया था और गंगाजल की जगह शराब ने ले लिया था। सभी मदमस्त होकर झूम रहे थे और जब आनिया को लेकर मां अपने कमरें में जा ही रहीं थी कि उसकी नज़र कल्याणी देवी और देवेन्द्र सिंह पर पड़ी। उसके आंखों के सामने वह मंजर दौड़ सा गया।
अब उसे बैचेनी हो रहीं थीं, और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उसे लगने लगा जैसे उसके ऊपर मिट्टी की कई परत जमती जा रही हैं और वो चिल्ला भी नहीं पा रही है। यह किसी पैनिक अटैक की तरह था। वह डर से कांपने लगी, छटपटाने लगीं और सांसें फूलने लगी। मां सुनंदा घबराकर चीखने लगी।
"मां! मां! देखो आनिया को कुछ हो रहा है? करण! सायसा! कोई तो आओ?" सुनंदा ने घबराकर आवाज लगाई और थोड़ी देर बाद कई डॉक्टर उसे घेर कर खड़े थे और उसका चेकअप कर रहे थे।
"डॉक्टर! क्या हुआ है मेरी बच्ची को? इस तरह अटैक तो मैंने आज तक छोटे बच्चों में नहीं देखा?" दादी मां ने कहा तो डॉक्टर भी सोचने लगा। क्योंकि यह सच है कि मात्र दस दिन के बच्चे में पैनिक अटैक जैसे लक्षण दिखना बहुत ही रेयर है। यहां तक कि इस तरह का मामला बहुत कम है। लेकिन उन्हें क्या पता? असल में तो छोटे से बच्चे के अंदर सोलह साल की नित्या हैं।
" हां! यह मामला तो बहुत अलग लग रहा है। आमतौर पर छोटे बच्चों में पैनिक अटैक की प्रॉब्लम होती ही नहीं है, हां लेकिन इस तरह के लक्षण हजार से से एक या दो बच्चों में होता है। इसलिए हम समय समय पर इसका चेकअप करते रहेंगे ताकि और जानकारी मिल सके।" डॉक्टर ने कहा तो सब हैरान रह गए।
सबके दिमाग में एक सवाल दौड़ रहा था कि आखिर इसे कौन सी बिमारी लग गई हैं?
•••••••••🍃
वेल दोस्तों आज के लिए इतना ही, मिलते हैं अगले एपिसोड में तब तक पढ़ते रहिए और खुश रहिये। बाय बाय 👋 🌿