आदित्य फोन कट देता है , जानवी को कुछ समझ मे नही आ रहा था के दोनो के बिच विकास के बारे मे क्या बाते हूई , तभी रागिनी आदित्य से पूछती है --
रागिनी :- क्या बात है आदित्य , क्या कहा इंस्पेक्टर ने ।
आदित्य :- वो बोल रहा था के विकास और काली ने मिलकर किसी रंगा को मुझे मारने के लिए भेजा है ।
इतना सुनकर रागिनी और जानवी दोनो हैरान थे , रागिनी ये सुनकर घबरा जाती है और जानवी स्तब्ध थी । उसे अपने कानो पर भरोसा नही हो रहा था के विकास ऐसा कर सकता है ।
तभी रागिनी कहती है --
रागिनी :- उस विकास की इतनी हिम्मत , तो फिर वो ऑफिसर उस विकास को अरेस्ट क्यों नही कर रहा है ?
आदित्य :- सबुत भी तो चाहिए ना , अभी सिर्फ शक और पता चला है पर एविडेंस नही है ।
रागिनी :- पर वो विकास ऐसा क्यों कर रहा है ?
आदित्य :- मेरे रहते वो जानवी को नुकसान नही पहूँचा पा रहा है शायद इसिलिए । पर रागिनी ये बात किसी को पता नही चलना चाहिए , वरना सब बहोत परेशान हो जाएगें ।
रागिनी हां मे अपना सर हिलाकर जवाब देती है और कहती है --
रागिनी :- ये बात जानवी को पता चलना चाहिए के उसका आशिक उसे नुकसान पहूँचाना चाहता है और उसकी वजह से तुम्हारे जान को खतरा हो गया है ।
आदित्य :- नही रागिनी , जानवी को भी इस बारे मे पता नही चलना चाहिए ।
रागिनी :- पर क्यों आदित्य !
आदित्य :- क्योकी वो हमारी बातो पर भरोसा नही करेगी । पर ॉेक दिन सच्चाई जरुर सामने आएगी ।
इधर जानवी ये सुनकर आदित्य के लिए बहोत दुखी हो गई थी , जानवी वहां से हॉल मे आती है जहां पर सभी बैठे हूए थे , जानवी भी भारी मन से अपने मन की दर्द को छुपाते हूए वहां पर बैठ जाती है , तभी वहां पर रागिनी और आदित्य भी आ जाता है और वहां पर सबके सामने बैठकर , सबसे हसी मजाक करने लगता है ।
ये दैखकर रागिनी को जानवी पर बहोत गुस्सा आ रहा था , रागिनी जानवी की और गुस्से से दैख रही थी , जानवी रागिनी को दैखकर अपनी नजरे झुका लेती है क्योकी जानवी समझ जाती है के रागिनी क्यों उसकी और गुस्से से दैख रही थी ।
जानवी आदित्य की और दैख रही थी , आदित्य के चेहरे पर ना कोई डर था और ना ही जानवी के लिए शिकयत और गुस्सा , आदित्य को दैखकर ऐसा लग रहा था जैसे कुछ हूआ ही नही है , आदित्य इतना कुछ जानने के बाद भी बिल्कुल नॉर्मल होकर सबसे बैठकर बाते कर रहा था ।
जानवी के आंखो से अब आंशु छलकने ही वाली थी के तभी जानवी वहां उठ जाती है और अपने आशुओं को सबसे छुपाकर जानवी वहां से लंगड़ाती हूई अपनी कार निकालती है और वहां सिधे अपने घर अपने पापा अशोक के पास पहूँच जाती है । जानवी को ऐसे अचानक से जाते दैखकर सभी हैरान थे ।
आदित्य मन ही मन सौचता है --
आदित्य :- ये जानवी अचानक से कहा चली गई ।
अशोक अपने घर पर बैठा था तभी दरवाज़े की घंटी बजते ही अंदर से हल्की-सी खाँसी की आवाज आई। अगले पल दरवाज़ा खुला और सामने उसके पापा खड़े थे—थोड़े थके हुए, पर उसे देखकर उनकी आंखों में वही पुराना अपनापन चमक उठा।
अशोक जानवी से कहता है --
अशोक :- "अरे जानवी बेटा तुम ! इस वक्त सब ठीक तो है?"
ये पूछने भर की देर थी कि जानवी का चेहरा ढह गया। उसका गला भर आया और वह बिना कुछ कहे तेज़ी से पापा के गले लग गई।
पापा ने उसकी पीठ थपथपाई और जानवी से कहा ---
अशोक :- "क्या हुआ बेटा? किसी ने कुछ कहा क्या?"
जानवी सिर हिलाती रही, मगर शब्द नहीं निकल पा रहे थे। पापा उसे अंदर लेकर आए, पानी दिया, और धीरे से उसके पास बैठ गए।
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कुछ पल की चुप्पी के बाद जानवी ने भारी आवाज़ में कहा—
जानवी :- "पापा… मुझे खुद नहीं समझ आ रहा कि मेरे साथ क्या हो रहा है…"
पापा मुस्कुराए, और कहा --
अशोक :- “अच्छा? दिल में कुछ चल रहा है क्या?”
उनका लहजा हल्का था, लेकिन बात सीधे निशाने पर लग गई। जानवी ने पापा की ओर देखा—जैसे पूछना चाहती हो मैं सच बताऊँ?
जानवी :- "पापा… क्या किसी के साथ बहुत ज़्यादा बात होने लगे… उसकी फिक्र होने लगे… उसकी हर छोटी बात दिल को छूने लगे… तो क्या ये… प्यार होता है?"
पापा ने एक गहरी सांस ली और बोले—
अशोक :- "ये किसी और ने नहीं बताया, ये तेरे दिल ने खुद बताया है, है ना?"
जानवी नीचे देखने लगी। उसकी उंगलियाँ पानी के गिलास को बेचैनी से घुमा रही थीं।
पापा ने फिर पूछा,
अशोक :- क्या ये आदित्य के लिए है ?
यह सवाल जैसे उसकी धड़कनें रोक गया। कुछ सेकंड बाद जानवी ने धीमी आवाज़ में कहा—
जानवी :- अ.... हां पापा , "आ… आदित्य।"
पापा एकदम शांत थे, बिना किसी हैरानी के , क्योंकि वो जानते थे के ये एक ना ओक दिन होना ही था । आदित्य का स्वभाव उसकी सरलता के कारण कोई भी उससे ज्यादा दिन तक नाराज नही रह सकती ।
अशोक अंदर ही अंदर खुश हो रहा था और अनजान बनकर कहता है --
अशोक :- "हम्म… ये कैसे हो गया बेटा , तुने ये होने कैसे दिया , तु तो उस आदित्य से नफरत करती हो ना ?
जानवी ने चौंककर पापा को देखा। और कहा --
जानवी :- मैं क्या करु—"
पापा हँस पड़े।
अशोक :- "बेटा, पापा सब समझते हैं।"
जानवी की आँखें भर आईं।
जानवी :- "पापा… मैं उसे गलत समझती रही… हमेशा उससे दूर रहने की कोशिश करती रही… उससे नफरत करने लगी , पर उसने हमेशा मेरा साथ दिया , पर फिर भी मैंने उसो बहोत सताया उसे दुख दिया , भला बुरा कहा , फिर भी उसने एक शब्द नही कहा । ये कैसी इंसान है पापा ।
अशोक :- वो ऐसा ही है बेटा । बस तुमने उसो समझने मो दैर कर दी ।
जानवी :- जब मोनिका उसके करीब जाती है तो मुझे पता नहीं क्यों दिल बेचैन हो जाता है… पता है कल तो मैं उससे बहस करने चली गई थी और उसी वक्त रागिनी ने ये कह दिया कि… कि शायद मैं आदित्य से प्यार करती हूँ। और मैं… मैं ये बात सुन भी रही थी…"
वह बोलते-बोलते रुक गई, जैसे किसी ने उसके अंदर के भावों को नंगा कर दिया हो।
पापा ने नरमी से पूछा,
अशोक :- "रागिनी की बात सुनकर कैसा लगा?"
जानवी की आँखों में उलझन, शर्म और कहीं न कहीं… एक हल्की-सी खुशी थी जिसे वह स्वीकार नहीं कर पा रही थी।
जानवी :- "डर लगा, पापा… बहुत डर लगा। जैसे किसी ने मेरे मन का राज उजागर कर दिया हो। मैं खुद को ही नहीं समझ पा रही थी।"
पापा उठकर खिड़की के पास चले गए। कुछ देर बाहर देखते रहे, फिर शांत स्वर में बोले—
"अशोक :- जानवी, प्यार कभी अचानक नहीं होता… ये धीरे-धीरे किसी की अच्छाइयों से, उसकी मौजूदगी से, उसकी सुरक्षा से पैदा होता है। और तूने आदित्य को खोने का डर भी महसूस किया है। कभी विकास के लिए ऐसा फ्ल किया है ?""
जानवी ने धीरे से सिर हिला दिया—
जानवी :- "नहीं…"
पापा ने मुस्कुराते हुए कहा—
अशोक :- "बस, यही तेरे दिल का जवाब है।"
जानवी ने आँखें बंद कर लीं।
सच सामने था… और वह उसे स्वीकारने से डर रही थी।
अशोक जानवी के गाल को छुकर कहता है --
अशोक :- तुझे आदित्य से प्यार हो गया है बेटा । हा हा हा हा ... ये बात तु कब समझेगी ।
जानवी :- "पापा… अगर ये सच है… तो मैं क्या करूँ? मैं तो खुद को भी नहीं समझ पा रही।"
पापा उसके पास बैठ गए।
अशोक :- "पहले खुद से झूठ बोलना बंद कर। अगर तुझे उससे प्यार है, तो इसमें शर्म कैसी?"
जानवी अपनी आंखो मे आंशु लिए अपने पापा से कहती है —
जानवी :-- "पर पापा… मैं आदित्य से प्यार करती हूँ ये उसे पता ही नहीं है… वो मुझे समझता है के मैं उससे नफरत करती हूँ । असल मे गलती मेरी ही है ,, मैने ही उससे एक दिन कहा था के मैं मर जाउगीं पर कभी उससे प्यार नही करुगीं ।
पापा ने हंसते हुए कहा—
अशोक :- ऐसा तुने ही उसे समझने पर मजबुर किया है ना बेटा ।
जानवी चौंक गई।
जानवी :- "आपको… ये कैसे पता?"
पापा ने आंख मारते हुए कहा—
अशोक :- "आदित्य से बात किया था मैने "
जानवी का चेहरा गरम हो गया।
जानवी :- "पापा! ये सब कब हूआ ?
अशोक :- शादी की रात जब तुम और विकास शादी करने वाले थे , तब मैने ही आदित्य को शादी रोकने के लिए कहा था ।
जानवी :- तो उस रात को आदित्य शादी रोकने नही आया था ।
अशोक :- नही बेटा ।
अशोक जानवी को सब बोलकर सुनाता है , जिसे सुनकर जानवी हैरान हो जाती है।
जानवी की धड़कनें तेज़ हो गईं।
जानवी :- तो आदित्य…उसने सच में.... ऐसा आपके कहने पर किया ?
अशोक :- हां बेटा , वो बस शादी दैखने के लिए आया था पर मैं जानता था के तुम विकास के साथ खुश नही रह पाओगी , इसिलिए मैने आदित्य से ये सब करने को कहा ।
जानवी ने धीमी आवाज़ में पूछा—
जानवी :- "पापा… मैं आदित्य को कितना गलत समझती रही । पर वो मुझे हर बार एक अच्छा पति होने का अहसास दिलाया है । और मैने उसे बहोत दुख और धोका दिया है ।
पापा ने उसका हाथ थाम लिया।
अशोक :- "बेटा, महसूस की गई चीज़ें धोखा नहीं होतीं। धोखा तो तब होता है जब इंसान अपने ही दिल को अनसुना करता है।"
जानवी :- पर अब मुझे क्या करना चाहिए ?
अशोक :- जाओ और जाकर अपनी दिल की बात कह दो ।
जानवी :- "पर अगर… वो मुझे ठुकरा दे तो ?"
अशोक :- "तो तू टूटेगी नहीं—तू सीख जाएगी। पर अगर तूने अपने दिल की बात कही ही नहीं… तो ज़िंदगी भर पछताएगी।"
जानवी की आँखों से आँसू गिरने लगे। पापा ने उसे गले लगा लिया।
कुछ देर बाद पापा ने नरमी से कहा—
अशोक :- "बेटा, तू पहले अपने आपसे साफ-साफ कह—क्या तू उसे खोने से डरती है?"
जानवी ठहर गई। दिल का जवाब बिना सोचे आया:
जानवी :- "हाँ, पापा… बहुत डर लगता है।"
Note: - bahot sare aise readers hai jinka coment or review mujhe nhi dikh rha hai , isiliye mei unka naam nhi bata pa rha hoon , please mujhe follow karle taki aap sab ka naam or review mujhe dikhai de .
Aap sabko agar kuch bhi puchna ho to comment kar dijiyega , mei reply jarur karunga .
To be continue.....578