लाल इश्क - 5 jagni b द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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लाल इश्क - 5

स्थान: 'द गॉथिक फोर्ट' एक प्राइवेट इस्टेट - अग्निहोत्री मेंशन
समय: रात २:०० बजे

काव्या आरंभी को लेकर ऊपरी मंजिल पर बने आर्यवर्धन के बेडरूम के ठीक बगल वाले गेस्ट रूम तक लेकर गई। वह शयनकक्ष कांच और कंक्रीट से भी अधिक डार्क पत्थरों और पूरी तरह ब्लैक कलर से बनाया गया था, जो किसी महल का हिस्सा नहीं, बल्कि एक 'ब्लैक लग्जरी प्रिज़न' (विलासितापूर्ण जेल) जैसा लग रहा था। आरंभी ने जैसे ही उस कमरे की ठंडी और भारी हवा में सांस ली, उसका दम घुटने लगा। रिसेप्शन पर जबरदस्ती खिलाया गया वह मांस का टुकड़ा उसके पेट में किसी 'एसिडिक एरर' की तरह उबल रहा था।

उसने काव्या की ओर देखने की कोशिश की, लेकिन आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। आरंभी सीधे बाथरूम की तरफ दौड़ी। दरवाजा बंद होते ही उसकी 'सिस्टम' पूरी तरह टूट गई। वह शाकाहारी थी, और वह मांस उसके लिए सिर्फ खाना नहीं, एक 'अपमानजनक कोड' था जिसे उसके शरीर ने पूरी तरह 'रिजेक्ट' कर दिया था। उल्टियां करते समय उसे अपनी बेबसी पर गुस्सा आ रहा था—दिग्विजय शास्त्री ने उसे उस आदमी के हवाले किया था जिसे यह भी नहीं पता था कि उसकी बेटी की बुनियादी पसंद क्या है।

जब वह बाथरूम से बाहर आई, तो काव्या वहीं दीवार से टिककर खड़ी थी। उसकी आँखों में कोई हमदर्दी नहीं थी, बस एक 'कोल्ड ऑब्जर्वेशन' था।

"तुम्हारे डैड ने हमें तुम्हारी 'एलर्जी' के बारे में कोई अपडेट नहीं दिया था," काव्या ने ठंडे स्वर में कहा।

"एलर्जी? काव्या, इसे एलर्जी नहीं, 'आत्मा का दम घुटना' कहते हैं," आरंभी ने अपने होंठों पर लगा पानी पोंछा और पलटकर काव्या की आँखों में देखा। "तुम्हारे भाई ने जो किया, वह खाना खिलाना नहीं था... वह उसके 'डोमिनेंस' (प्रभुत्व) का एक क्रूर डिस्प्ले था।"

काव्या ने एक कदम आगे बढ़ाया, उसकी आवाज़ किसी तेज धार वाले 'स्कैल्पल' जैसी थी। "यहाँ डोमिनेंस ही एकमात्र करेंसी है, आरंभी। वॉर्डरोब में कपड़े हैं। तुम्हारी हर ज़रूरत का डेटा वहाँ फीड कर दिया गया है। लेकिन एक बात ध्यान रखना—परिसर से बाहर जाने की कोशिश करना एक 'क्रिटिकल फेलियर' साबित होगा। गार्ड्स को तुम्हें रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने का आदेश है।"

"क्या तुम अपनी जिंदगी इसी 'सिक्योरिटी' के नाम पर जीती हो?" आरंभी ने कड़वाहट से पूछा। "एक सुनहरे पिंजरे में एक 'प्रोग्राम्ड' गुड़िया की तरह?"

काव्या के चेहरे की मांसपेशियां खिंचीं, मानो किसी ने उसके 'प्राइवेट सर्वर' को हैक कर लिया हो। "यह एक सुरक्षित पिंजरा है, आरंभी! इन दीवारों के बाहर, हमारे नाम पर केवल 'डेथ वारंट' जारी होते हैं। भाई हमें प्रोटेक्ट करता है। वह इस साम्राज्य का 'फायरवॉल' है।"

"प्रोटेक्शन?" आरंभी का गुस्सा फूट पड़ा। "वह एक 'कोल्ड-ब्लडेड' कातिल है, काव्या! मैंने उसे उस रात उस गली में देखा था। वह सुरक्षा नहीं दे रहा था, वह किसी की जिंदगी को 'परमानेंटली डिलीट' कर रहा था। तुम एक खूनी की पूजा कर रही हो!"

काव्या ने आरंभी को दीवार से सटा दिया, उसकी आँखों में एक पल के लिए तीखा दर्द और फिर गहरी नफरत झलकी। "भाई ने वही किया जो साम्राज्य को बचाने के लिए ज़रूरी था। इस दुनिया के 'लॉजिक' बहुत क्रूर हैं, आरंभी। यहाँ या तो आप 'हथौड़ा' होते हो या फिर 'कील'। और अभी, तुम सिर्फ एक ऐसी फाइल हो जिसे सुरक्षित रखना मेरी जिम्मेदारी है। हत्थे की तरफ होना सीखो, वरना कील की तरह ठोक दी जाओगी।"

काव्या एक झटके में मुड़ी और भारी ओक का दरवाजा एक 'क्लिक' के साथ बंद हो गया। आरंभी को 'इलेक्ट्रॉनिक लॉक' के एक्टिवेट होने की आवाज़ साफ सुनाई दी। वह एक 'क्वॉरेंटाइन ज़ोन' में कैद थी।

उसने अपना भारी शादी का जोड़ा उतार फेंका। वह मखमली काला कपड़ा उसे किसी दूसरी खाल जैसा लग रहा था, जिसे उतारने के लिए वह बेताब थी। उसने अपना चेहरा बार-बार धोया, मानो आर्यवर्धन के उस स्पर्श को अपनी त्वचा से 'वाइप आउट' (मिटाना) चाहती हो।

वॉर्डरोब से एक साधारण रेशमी रोब पहनकर वह बिस्तर के किनारे बैठ गई। लेकिन तभी उसकी नजर छत के कोने में मौजूद एक छोटे, लाल बिंदु पर पड़ी। एक सर्विलांस कैमरा।

उसके बदन में सिहरन दौड़ गई। उसे एहसास हुआ कि वह आर्यवर्धन के लिए केवल एक 'लाइव फीड' है। उसका गुस्सा फूट पड़ा। पास ही रखा एक भारी क्रिस्टल का फ्लावर पॉट उसने उठाया और पूरी ताकत से उस कैमरे पर दे मारा।

'क्रैश!' कांच के टुकड़े बिखर गए और कैमरा किसी 'सिस्टम फेलियर' की तरह निकम्मा हो गया।

उसी क्षण कमरे का दरवाजा एक धमाके के साथ खुला, मानो किसी सुरक्षित सिस्टम में 'ब्रूट फोर्स' एंट्री हुई हो। आर्यवर्धन अंदर दाखिल हुआ। उसका साया किसी 'डार्क क्लाउड' की तरह पूरे कमरे पर छा गया, जैसे कोई 'ब्लैक-आउट' वायरस पूरे ग्रिड को निगल रहा हो। कोट और टाई नदारद थे, सफेद शर्ट के ऊपर के बटन खुले थे, और उसकी आँखों में वह खौफनाक 'अथाह गहरा कालापन' था—एक ऐसा 'नल-वॉइड' (Null Void) जिसे कोई डिकोड नहीं कर सकता था।

वह एक शिकारी की गति से आरंभी की ओर बढ़ा और उसे दीवार से सटा दिया। उसकी पकड़ आरंभी की बाहों पर किसी 'आयरन क्लैंप' जैसी मजबूत थी, जो किसी भी 'एग्जिट रूट' को ब्लॉक कर रही थी।

"How dare you! मेरे नेटवर्क को फिजिकली डैमेज करने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी? तुम्हें क्या लगा, Hardware तोड़ दिया तो तुम मेरे Access से बाहर निकल जाओगी?" उसकी आवाज़ किसी ठंडी मशीन की तरह गूँजी। वह पूरी तरह आरंभी पर हावी हो चुका था, जैसे कोई 'सुपर-यूजर' किसी 'अनऑथोराइज़्ड फाइल' को डिलीट करने वाला हो।

"अबे ओ सायको आदमी! कोई भी इंसान... बेडरूम में कैमरा कैसे लगा सकता है?" आरंभी चीखी, उसकी आवाज़ में नफरत और डर का एक 'शॉर्ट-सर्किट' था। "क्या मैं तुम्हारे लिए कोई मशीन हूँ, जिसका 'लाइव डेटा' तुम्हें 24 घंटे स्ट्रीम करना है?"

आर्यवर्धन के चेहरे पर एक क्रूर, डिजिटल मुस्कान उभरी। उसने उसे और जोर से दीवार में भींचा। "Because this is my 'Territory' Aarambhi... और यह कमरा मेरा 'Guest Server Room' है, जहाँ हर pulse मेरी इजाजत से process होती है। इस एस्टेट के हर इंच पर मेरा 'Root Access' है। और तुम यहाँ केवल एक 'प्रोग्रेस बार' हो, जिस पर मैं नजर रख रहा हूँ।"

"लेकिन मैं एक औरत हूँ!" आरंभी ने उसकी आँखों में आँखें डालकर अपना 'फायरवॉल' खड़ा किया। "एक औरत की प्राइवेसी का सम्मान करना तुम्हारे 'कॉर्पोरेट प्रोटोकॉल' में नहीं है? यह घृणास्पद है, मिस्टर आर्यवर्धन!"

आर्यवर्धन ने लाइट नहीं जलाई। वह अंधेरे में ही किसी 'निशाचर शिकारी' (Nocturnal Predator) की तरह उसके और करीब झुक गया। उसकी मौजूदगी से निकलने वाली 'थर्मल एनर्जी' आरंभी के सेंसर्स को ओवरलोड कर रही थी।

"प्राइवेसी एक 'प्रीमियम लग्जरी' है, आरंभी, जिसे तुमने उसी रात 'अनइंस्टॉल' कर दिया था जब तुमने खिड़की से मुझे देखा था," वह क्रूरता से फुसफुसाया। "तुम अब मेरी कस्टडी में एक 'क्रिटिकल असेट' हो। और याद रखना, अगर दोबारा मेरा कोई 'हार्डवेयर' तोड़ने की कोशिश की, तो मैं तुम्हें 'मैन्युअली' कंट्रोल करना शुरू कर दूँगा। और यकीन मानो, मेरा वह 'फोर्सफुल ओवरराइड' तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं आएगा।"

उसने आरंभी को एक झटका देकर छोड़ा। आरंभी बिस्तर पर गिर पड़ी, उसका शरीर कांप रहा था लेकिन उसकी आँखों में अभी भी विद्रोह की एक 'करप्टेड फाइल' जल रही थी।

"तुम्हें आखिर क्या चाहिए मुझसे, आर्यवर्धन? इस सब का 'एंड-गेम' क्या है?"

आर्यवर्धन बिस्तर के किनारे आकर रुका। उसने हाथ बढ़ाकर आरंभी के चेहरे से बालों की लट हटाई और उसकी ठुड्डी को अपनी उंगलियों से ऊपर उठाया। उसका स्पर्श किसी 'मेटैलिक कमांड' जैसा ठंडा और अपरिवर्तनीय था।

"सबसे पहले तो रिस्पेक्ट से बात करो मुझसे... हजबंड हूँ मैं तुम्हारा। वरना मुझसे बुरा कोई 'बग' नहीं होगा तुम्हारी लाइफ में। मुझे वह सब कुछ चाहिए," उसने सहजता से उत्तर दिया, जैसे किसी सौदे की अंतिम शर्तें तय कर रहा हो। "तुम्हारी वफादारी। तुम्हारी चुप्पी। और अंततः... तुम्हारा दिल। याद रखना, प्राइवेसी सिर्फ उनके लिए होती है जिनका अस्तित्व 'सिस्टम' से बाहर होता है। तुम अब मेरी वाईफ हो और इस डार्क वेब का हिस्सा हो, यहाँ से 'लॉग-आउट' करने का कोई विकल्प नहीं है।"

आर्यवर्धन दरवाजे की ओर मुड़ा। "कैमरा कल सुबह तक 'रिप्लेस' हो जाना चाहिए। तब तक, मैं खुद तुम पर नजर रखूँगा। 'I am watching you'।"

भारी ओक का दरवाजा बंद हुआ और आरंभी अंधेरे में अकेली रह गई। न चाहते हुए भी उसकी आँखों से आँसू बह निकले। उसे अहसास था कि वह अब कभी 'ऑफलाइन' नहीं हो पाएगी; उस पर हमेशा उस 'अंधेरे के एल्गोरिदम' का पहरा रहेगा। न जाने कितनी देर सिसकने के बाद आखिरकार आरंभी की 'प्रोसेसिंग' थक गई और उसकी आँख लग गई।