इंतेक़ाम - भाग 44 Mamta Meena द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

इंतेक़ाम - भाग 44

तब विजय कहता है मैं जानता हूं मां इस ने हमारे साथ बहुत गलत किया है लेकिन अब इसकी हालत तो देखो मैं इसे इस हालत में बे सहारा नहीं छोड़ सकता,,,,,

यह सुनकर विजय की मां कुछ कहती,, उससे पहले ही विजय कहता है प्लीज मां,,,,,

तब विजय की मां कुछ नहीं कहती और गुस्से में अपने कमरे में  में चली जाती है,,,,

विजय उस लड़की को लेकर अंदर आ जाता है और निशा से बोलता है निशा तुम अपने कपड़े निकाल कर इसे दे दो जिसे यह नहाने के बाद पहन लेगी,,,,,

तब निशा बिना कोई सवाल जवाब किए हां कर देती है,,,

विजय वहां से गुस्से मैं पिछले हॉल में चला जाता है,,,,

निशा अपने कमरे में से कपड़े निकाल कर उस लड़की को देती है, वह उस लड़की से कुछ कहती उससे पहले ही वह लड़की बाथरूम की तरफ चली जाती है,,,,

निशा यह सोचकर हैरान है कि इस लड़की को कैसे पता कि बाथरूम किधर है आखिर में क्या रिश्ता है इस लड़की का इस घर से और कौन है यह,,,,,

निशा यह सब सोचते हुए रसोई में जाकर खाना बनाने लग जाती है,,,,

कुछ देर में वह लड़की कपड़े पहन कर बाहर आती है अब वह काफी खूबसूरत लग रही थी,,,,,

खाना बनाने के बाद निशा अपनी सास से खाना खाने के लिए कहने जाती है तो उसके सास यह है कह कर मना कर देती है कि मुझे भूख नहीं है,,,,

फिर निशा विजय से कहने जाती है लेकिन विजय भी खाना खाने से मना कर देता है,,,,

निशा सोचती है कि कुछ पूछे लेकिन फिर सोचती है कि अभी सही समय नहीं है सही वक्त आने पर वह सब कुछ पूछ लेगी,,,,

निशा उस लड़की के पास खाना ले जाती है तो वह लड़की पूछती है कि विजय और तुम सब ने खाया तो निशा उदास होकर मना कर देती है,,,,,

तब वह लड़की कहती है कि यह खाना वापस ले जाओ मुझे भूख नहीं है,,,,

निशा कुछ नहीं कहती और वह खाना वहां रखकर रसोई में आ जाती है,,,,,

तब वह लड़की खाना लेकर आती है और रसोई में रखते हुए कहती है कि मुझे अभी भूख नहीं है,,,,,

यह कहकर वह गेस्ट रूम की तरफ चल जाती है और गेस्ट रूम में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लेती है,,,,

निशा अब भी हैरान थी कि इस लड़की को इस घर के बारे में सब कुछ कैसे पता है,,,,,

फिर निशा अपने बच्चों को खाना खिला कर सुला देती है, निशा सारे दोपहर इधर से उधर टहलते रहती है उसे कुछ समझ में नहीं आता,,,,,

शाम को निशा चाय बनाकर अपनी सास के कमरे में चाय देने जाती है तो देखती है कि उसकी सास दोपहर की तरह ही परेशान होकर किसी सोच में डूबी हुई थी,,,,

निशा बिना कुछ बोले ही चाय रख कर आ जाती है फिर विजय को भी चाय दे आती है,,,,

फिर कुछ सोच कर वह उस लड़की का दरवाजा खटखटा आती है दरवाजा खुलते ही है उस लड़की को चाय पकड़ा कर वापस आ जाती है और रात के खाने की तैयारी में जुट जाती है,,,,,

रात का खाना खाने के लिए जैसे ही वह अपनी सास से खाना खाने के लिए कह न जाती है तो उसकी सास अब भी खाना खाने के लिए भी मना कर देती है,,,, 

फिर निशा विजय के पास आकर उसे खाना खाने के लिए कहती है लेकिन विजय भी मना कर देता है,,,,

तब निशा की हिम्मत जवाब दे जाती है और वह गुस्से में चिल्लाते हुए कहती है क्यों भूख नहीं है सबको, बताओ मुझे क्यों भूख नहीं है, क्या बात है जो मुझे पता नहीं है और कौन है यह लड़की जिसे तुम मंदिर में से अपने साथ लाए हो बताओ मुझे क्या रिश्ता है इसका इस घर से और तुम सब से क्यों है इस घर की हर छोटी बड़ी चीज को अच्छी तरह जानती है, आज तक तो मैंने इस लड़की के बारे में पहले तुमसे कभी नहीं सुना, कभी भी इस लड़की का मेरे सामने जिक्र नहीं किया गया तो फिर अचानक है यहां क्यों आई है जो तुम सभी इसे देख कर इतने परेशान हो, बताओ मुझे,,,,,,

तब विजय कहता है निशा अभी मेरा मन बताने का नहीं है तुम जाओ यहां से,,,,,,

तब निशा कहती है क्यों बताना नहीं चाहते तुम मुझे सच जानना है,,,,,

निशा की आवाज सुनकर उसकी सास और वह लड़की भी वहां आ जाती है,,,,,,,

तब निशा अपनी सास का हाथ अपने हाथों में लेकर कहती है मां जी आप बताओ ना कि आखिर में सच्चाई क्या है क्यों आप सब इतने परेशान हैं,,,,,

यह कहकर वह उस लड़की के पास जाती है और पूछती है यह सब तो कुछ नहीं बताएंगे आप ही बता दो कि क्या रिश्ता है आपका घर से और क्यों यह सब जब से आप आई हो, तब से परेशान है मैं जानना चाहती हूं,,,,

लेकिन वह लड़की रोने लग जाती है और कुछ नहीं कहती,,,,

तब निशा फिर अपने सास और विजय से पूछती है लेकिन उसकी सास की आंखों में भी आंसू थे और चेहरे पर गुस्सा वह भी कुछ नहीं कहती,,,,,

तब निशा जोर-जोर से चिल्लाते हुए कहती है कोई कुछ क्यों नहीं बताना चाहता मुझे कि आखिर में सच्चाई क्या है कौन है यह, क्या रिश्ता है इसका घर से क्यों आप सच्चाई छुपा रहे हो, आज से पहले तो कभी इस लड़की का यहां पर कोई जिक्र नहीं हुआ, निशा सब से पूछती है लेकिन कोई भी कुछ नहीं कहता,,,,,