शीर्षक: वल्चर बनाम ग्रेट गोरिला
विशेष अध्याय: “गलतफ़हमी का महायुद्ध”
[दृश्य 1 – वन की सीमा, संध्या]
घना जंगल। ऊँचे वृक्षों के बीच धूप की अंतिम किरणें छनकर गिर रही हैं। दूर पहाड़ों की ओट से धुएँ की पतली रेखा उठती है। अर्जुन (वल्चर) आकाश में मंडराता हुआ नीचे उतरता है। उसके पंखों की फड़फड़ाहट से पत्ते थरथरा उठते हैं।
अर्जुन (स्वगत):
“शहर के बाहर अजीब ऊर्जा महसूस हो रही है… जैसे किसी दानव की साँसें धरती को दबा रही हों।”
जंगल के भीतर भारी कदमों की ध्वनि गूँजती है।
[दृश्य 2 – ग्रेट गोरिला का प्रकट होना]
झाड़ियों को चीरता हुआ एक विशालकाय प्राणी बाहर आता है—ग्रेट गोरिला। उसकी देह पर्वत-सी चौड़ी, भुजाएँ वृक्षों जैसी मोटी, आँखों में जंगली तेज़। उसके कंधे पर घायल हिरण लटका है। वह अपने बच्चों के लिए शिकार लाया है।
ग्रेट गोरिला (गरजते हुए):
“यह वन मेरा है… जो पास आया, चूर हो जाएगा!”
वह वल्चर को आसमान में देखकर दहाड़ता है।
[दृश्य 3 – गलतफ़हमी की चिंगारी]
ऊपर से एक शिकारी का ड्रोन गिरता है और गोरिला के पास फट जाता है। आग की लपटें उठती हैं। गोरिला क्रोधित होकर आसमान की ओर देखता है। उसे लगता है कि यह आक्रमण वल्चर ने किया है।
ग्रेट गोरिला (क्रोध में):
“आकाश के राक्षस! तू मेरे बच्चों पर हमला करेगा?”
वल्चर नीचे उतरता है।
अर्जुन:
“मैंने हमला नहीं किया। यह मनुष्यों की मशीन है।”
गोरिला उसकी बात नहीं समझता। वह धरती उखाड़कर वल्चर की ओर फेंक देता है।
[दृश्य 4 – महायुद्ध का आरंभ]
धरती का विशाल टुकड़ा हवा चीरता हुआ आता है। अर्जुन हवा में घूमकर बच निकलता है। पत्थर पीछे के वृक्षों को तोड़ देता है। पूरा जंगल काँप उठता है।
अर्जुन:
“रुको! मैं शत्रु नहीं हूँ!”
ग्रेट गोरिला (दहाड़):
“शत्रु वही जो भय लाए!”
वह छलाँग लगाकर वल्चर को पकड़ने का प्रयास करता है। अर्जुन ऊँचाई पर उड़ जाता है और नीचे से वेग के साथ वार करता है। उसकी टक्कर से गोरिला पीछे खिसकता है, पर वह फिर उठ खड़ा होता है।
[दृश्य 5 – पर्वतीय प्रहार]
ग्रेट गोरिला दोनों मुट्ठियाँ ज़मीन पर मारता है। धरती में दरारें पड़ जाती हैं। पत्थर हवा में उछलते हैं। अर्जुन पंख फैलाकर ढाल बनाता है। पत्थर पंखों से टकराकर चूर हो जाते हैं।
ग्रेट गोरिला:
“आकाश का पक्षी… धरती की ताक़त देख!”
वह वृक्ष उखाड़कर भाले की तरह फेंकता है। अर्जुन पेड़ों के बीच से बिजली-सी गति से निकलता है। टकराव से जंगल में धूल का तूफ़ान उठता है।
[दृश्य 6 – आकाशीय गोता और जंगली पलटवार]
अर्जुन बादलों को चीरते हुए ऊपर जाता है, फिर बिजली की गति से नीचे गोता लगाता है। वह गोरिला के कंधे पर प्रहार करता है। गोरिला दर्द से गरजता है, पर उसकी पकड़ से अर्जुन के पंख जकड़ जाते हैं। दोनों हवा में घूमते हुए ज़मीन से टकराते हैं। धरती धँस जाती है।
अर्जुन (दाँत भींचकर):
“छोड़ो! हम दोनों गलत समझ रहे हैं!”
ग्रेट गोरिला (क्रोध में):
“मेरे बच्चों की सुरक्षा पहले!”
वह अर्जुन को उछालकर चट्टान से टकरा देता है। चट्टान टूटकर गिरती है।
[दृश्य 7 – विनाश का चरम]
जंगल में आग फैलने लगती है। शिकारी ड्रोन फिर लौटता है और ऊपर से गोलियाँ बरसाता है। गोरिला अपने बच्चों को ढाल में छुपाता है। अर्जुन हवा में घूमकर ड्रोन को पंखों की धार से काट देता है। मशीन धुएँ के साथ गिर पड़ती है।
अर्जुन:
“देखो! असली शत्रु यह है!”
गोरिला पहली बार ठिठकता है। उसकी आँखों में भ्रम टूटता हुआ दिखता है।
[दृश्य 8 – सत्य का क्षण]
गोरिला घायल हिरण को पीछे रखकर अपने बच्चों को ढक लेता है। वह अर्जुन की ओर देखता है।
ग्रेट गोरिला (धीमे स्वर में):
“आकाश का योद्धा… तू मेरे वन का शत्रु नहीं?”
अर्जुन:
“मैं रक्षक हूँ… जैसे तू अपने परिवार का।”
क्षण भर मौन। फिर जंगल की आग पास आती है।
[दृश्य 9 – साथ मिलकर प्रलय से युद्ध]
अर्जुन ऊपर से तेज़ हवा की धारें बनाकर आग की लपटों को मोड़ देता है। गोरिला जले हुए वृक्ष उखाड़कर आग पर फेंकता है। दोनों मिलकर आग को बुझाते हैं। धुआँ छँटने लगता है। जंगल में शांति लौटती है।
[दृश्य 10 – विदाई]
राख से भरी हवा में सूरज की किरणें उतरती हैं। गोरिला अपने बच्चों को उठाकर गहरी घाटी की ओर बढ़ता है। वह पलटकर अर्जुन की ओर सिर झुकाता है।
ग्रेट गोरिला:
“आज आकाश और धरती मित्र बने।”
अर्जुन:
“गलतफ़हमी युद्ध कराती है… समझ शांति लाती है।”
अर्जुन पंख फैलाकर आकाश में उड़ जाता है। जंगल में फिर से पक्षियों की आवाज़ गूँजने लगती है।