किडनी का तोह्फ़ा 4
भाग 4 - पिछले भाग में आपने पढ़ा कि जूली रोमित से शादी के पहले ही प्रेग्नेंट हो जाती है और शादी के ठीक पहले रोमित की मौत हो जाती है . जूली के पिता रोमित के घर जूली की संतान को अपनाने के लिए जाते हैं पर वे इंकार कर देते हैं . रोमित के पिता और स्वयं जूली के पिता भी उसे अबॉर्शन की सलाह देते हैं जिसे जूली ठुकरा देती है , अब आगे पढ़ें ….
“ जो भी हो , मैं अबॉर्शन नहीं कराऊंगी . मैं अकेले ही उसका पालन पोषण करने में सक्षम हूँ . फिर भी मैं एक बार रोमित के मम्मी पापा से बात करना चाहूंगी . “ जूली बोली
“ क्या बात करनी है ? उन्होंने किसी से भी बात करने से मना कर दिया है . “ जूली के पिता ने कहा
फिर भी एक शाम जूली ने रोमित के पापा को फोन कर के कहा “ अंकल पापा ने आपको मेरे बारे में बताया ही है . “
रोमित के पापा ने कहा “ तो उन्होंने तुमसे यह नहीं कहा है कि तुम्हें मुझे फोन करने या हमारे यहाँ आने के लिए मना किया है . “
“ कहा है अंकल . मैने आपके पास आने के लिए या आपसे किसी मदद के लिए फोन नहीं किया है . मैने सिर्फ यह बताने के लिए फोन किया है कि मैं अबॉर्शन नहीं कराऊंगी . यह बच्चा सिर्फ मेरा होगा . आपलोगों किसी का इस बच्चे से कोई लेना देना गोगा . आंटी को भी मेरी बात और मेरा नमस्कार बोल देंगे . वह भी एक औरत हैं और वे मेरी भावना को बेहतर समझेंगी . “
जूली ने अपनी कंपनी से जॉइनिंग के लिए दो महीने का समय ले लिया था . जूली ने मुंबई आ कर अपना जॉब ज्वाइन कर लिया . कुछ दिनों के लिए उसके मम्मी पापा भी उसके साथ रहे थे फिर उसके पापा वापस आगरा चले गए . माँ जूली के साथ रुक गयी . जूली ने कम्पनी से अपनी लंदन पोस्टिंग रद्द करने के लिए रिक्वेस्ट किया जिसे कंपनी ने मंजूर कर लिया था .
जूली ने समय पर एक बच्ची को जन्म दिया . जूली और उसकी माँ दोनों मिलकर बच्ची की देखभाल करती थीं . समय का चक्र घूमता रहा , महीने , साल बीतते गए . इस बीच जूली के पापा का निधन हो गया था . जूली की बेटी संजीवनी अब हाई स्कूल में थी . एक दिन जूली की माँ ने संजीवनी से पूछा “ बेटी अब आगे तुम क्या पढ़ना चाहती हो ? अपनी मम्मी की तरह इंजीनियर बनोगी या डॉक्टर बनना चाहोगी ?
संजीवनी ने उत्तर दिया “ नानी , में तो डॉक्टर बनना पसंद करूंगी . इसी दिशा में पढ़ाई कर रही हूँ . कोशिश कर रही हूँ , आगे भगवान् की मर्जी . “
“ भगवान् और तेरी नानी और मम्मी सभी का आशीर्वाद तुम्हें मिलेगा . तुम डॉक्टर अवश्य बनोगी . “
“ थैंक्स नानी . “ बोलकर संजीवनी नानी के गले लग गयी .
जूली भी अपनी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहती थी . संजीवनी पढ़ने लिखने में बहुत तेज भी थी . प्रथम प्रयास में ही वह मेडिकल के एंट्रेंस टेस्ट में सफल रही . संजीवनी , नानी और मम्मी सभी बहुत खुश थे . पुणे के एक मेडिकल कॉलेज में उसका दाखिला हुआ . जूली ने भी अपना तबादला पुणे ऑफिस में करा लिया .
देखते देखते साढ़े चार साल बीत गए . संजीवनी MBBS की पढ़ाई पूरी कर उसी अस्पताल में इंटर्नशिप कर रही थी . इधर कुछ दिनों से जूली की तबीयत ठीक नहीं रह रही थी . संजीवनी ने माँ को चेकअप और टेस्ट आदि के लिए नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती कराया था . टेस्ट आदि के बाद संजीवनी ने माँ से कहा “ आपका सभी रिपोर्ट नार्मल है इसलिए हो सकता है एक दिन और हमलोग निगरानी में रखे . आपको कल या परसों तक अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी . “
उस दिन जूली के रूम का दरवाजा खुला था और उसके सामने वाले रूम से उसे आवाज सुनाई पड़ी “ रेणु की भी एक किडनी ख़राब है वरना शायद उसकी एक किडनी आपके काम आ जाती . रोमित की भी कोई संतान आज होती तो उसके किडनी के भी मैच करने की संभावना थी . हमने जूली को खरी खोटी सुना कर घर में आने नहीं दिया था . आपकी दोनों किडनी जवाब दे चुकी हैं . डोनर भी नहीं मिल रहा है . न जाने भाग्य में क्या लिखा है ?
अपना , रेणु और रोमित के नाम सुनकर जूली के कान खड़े हो गए और उन्हें संदेह हुआ कि कहीं ये रोमित के पापा तो नहीं हैं . उन्होंने बेड से उठकर दरवाजे के पास जा कर सामने के रूम में झाँका . उनका अनुमान सही निकला , सामने वाले बेड पर रोमित के पापा थे और बगल में रोमित की माँ बैठी थीं . कुछ देर बाद जब बेटी आयी तब जूली ने उस से पूछा “ बेटी ,सामने वाले रूम में कौन पेशेंट है ? “
“ मम्मी , कोई मिस्टर रोहित हैं . उनकी दोनों किडनी खराब हैं , वे चंद दिनों के मेहमान हैं . कोई मैच वाला डोनर अभी तक नहीं मिला है . किसी पल उनकी मौत हो सकती है . “
“ किसी के लिए ऐसा नहीं कहते हैं , बेटा . “
“ अच्छा ठीक है , कल सुबह आप डिस्चार्ज हो जाएँगी . आज भर यहीं आराम करना होगा . “
“ बेटे , तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है . मेरे पास बैठो , मेरी बात ध्यान से सुनो और हो सके तो उस पर अमल करना . “
“ अचानक ऐसी क्या बात हो गयी ? “ डॉ संजीवनी ने माँ से पूछा
“ बेटा , हो सके तो सामने वाले पेशेंट की जान बचा लो . “
“ मैं क्या कर सकती हूँ ? मैं नेफ्रोलॉजी की एक्सपर्ट नहीं हूँ . वैसे भी बिना मैचिंग किडनी डोनर के उन्हें भगवान् भी नहीं बचा सकता है . “
“ वह पेशेंट और कोई नहीं बल्कि तुम्हारे बायोलॉजिकल दादू हैं . “
“ जब मेरे पिता का ही कोई नाम नहीं है तो हम दादू को क्या जानें ? अस्पताल में दर्जनों पेशेंट रोज मरते हैं , सबकी जान बचाना डॉक्टर के हाथ में नहीं है . “
“ पर दादू की जान बचाने की संभावना है और यह तुम्हारे हाथों में है . एक बार तुम टेस्ट करा के अपनी एक किडनी उन्हें डोनेट कर दो . “ जूली बोली
“ मम्मी , तुम मुझे बेकार इस झंझट में फंसा रही हो . आ बैल मुझे मार . “ डॉ संजीवनी ने कहा
“ इंसान ही इंसान के काम आता है . “
“ जब इंसान ही इंसान के काम आता है तब उस समय उनकी इंसानियत कहाँ गयी थी जब तुम्हें उनकी जरूरत थी . “
“ ये उनके विचार थे , हमलोग ऐसे नहीं हैं . और सभी इंसान दूसरे की मदद न करें तो क्या यह सकती है ? अगर तुम्हारी किडनी उनके या किसी की जान बचाने में काम आया तब सबसे ज्यादा ख़ुशी तुम्हारी आत्मा को होगी . एक बार मेरे लिए प्रयास तो करो . “
“ मम्मी , जहाँ तक मैंने पढ़ा है बच्चे का दादू से 25 % जेनेटिक मार्कर्स ही मैच करते हैं . मेरा किडनी मैच करना निश्चित नहीं है . “
“ टेस्ट करा के देखो , एक बार मेरे कहने से . अगर मैच कर गया तो तोहफा समझ कर उन्हें दे देना . “
“ अच्छा मैं एक्सपर्ट से बात करती हूँ . “ इसी बीच एक किडनी एक्सपर्ट जूली की रिपोर्ट देखने आया
तब जूली ने बच्चे और दादू के किडनी मैचिंग की संभावना पर बात किया . उसने कहा “ संभावना तो रहती है . सिर्फ जेनेटिक मार्कर्स मैच करने से ही कुछ नहीं होता है . इसके अलावा HLA मैचिंग और कम्पेटिबिलिटी टेस्ट आदि के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है . “
एक्सपर्ट के जाने के बाद जूली ने बेटी से कहा “ एक्सपर्ट की बात सुनी तुमने ? एक बार पहले तुम प्रिलिमिनरी टेस्ट आदि करा के देखो . मैंने तुमसे जिंदगी में कभी न कुछ माँगा है और न मांगूंगी . “
डॉ संजीवनी ने खुद उसी वार्ड में एडमिट होकर सारे टेस्ट करवाए . इत्तफ़ाक़ से उसकी किडनी रोहित के किडनी से मैच कर गयी . जूली और उसकी बेटी ने अस्पताल को अपने बारे में रोमित के परिवार को बताने से मना कर दिया था .
रोमित के पिता का किडनी ट्रांसप्लांट सफल हुआ . डॉ संजीवनी को अस्पताल में करीब पांच दिन तक रहना पड़ा था . उसके बाद उसे डिस्चार्ज कर कुछ दिन आराम करने की सलाह दी गयी थी . रोमित के पिता अस्पताल से तीन सप्ताह के बाद डिस्चार्ज हुए थे . उन्होंने अस्पताल से किडनी डोनर के बारे में जानकारी मांगी . अस्पताल ने उन्हें इसके लिए मना कर दिया . उन्होंने बार बार जोर देकर कहा “ मेरी जान बचाने वाले का एक बार शुक्रिया अदा करना मेरा फ़र्ज़ बनता है . प्लीज इससे मुझे वंचित न रखें वरना मैं चैन से जी नहीं पाऊंगा . “
बहुत जिद करने पर अस्पताल कर्मचारी ने कहा “ डॉ संजीवनी की किडनी ही आपके लिए संजीवनी बनी है . “
रोहित ने जब और डिटेल मांगी तब अस्पताल कर्मचारी ने कहा “ डॉ संजीवनी किसी जूली मैम की बेटी हैं और उनका स्थायी पता आगरा का है . पर डॉ संजीवनी ने अपना ट्रांसफर करा लिया है और उनका फोन नंबर के अलावा हमें कोई जानकारी हम नहीं दे सकते हैं . “
रोहित ने फोन नम्बर ले कर डॉ संजीवनी को फोन कर के कहा “ क्या मैं डॉक्टर साहिबा से बात कर सकता हूँ . डॉ तो अभी अस्पताल जाने के लिए तैयार हो रही है . मैं उसकी माँ जूली बोल रही हूँ . .. “
तब तक डॉ संजीवनी ने माँ के हाथ से फोन ले लिया , उधर से आवाज आयी “ हेलो जूली , मैं रोमित का पापा रोहित बोल रहा हूँ . “
“ आप कोई भी बोल रहे हों यह जूली का नंबर नहीं है , यह नंबर डॉ संजीवनी का है . और आइंदा कभी भी यहाँ फोन करने की कोशिश नहीं करेंगे . फ़िलहाल आपको ब्लॉक कर देती हूँ . “
रोमित की माँ और बहन रेणु भी उनकी बातें सुन रही थीं और शर्म से सभी के सर झुके थे .
समाप्त
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नोट - यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है .