किडनी का तोह्फ़ा - 3 S Sinha द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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किडनी का तोह्फ़ा - 3

                                                               किडनी तोह्फ़ा का 3    


पिछले भाग में आपने पढ़ा कि  जब रोमित और जूली की शादी की तैयारी चल रही थी उसी बीच एक दुखद दुर्घटना में रोमित की अचानक मौत हो जाती है  . रोमित के पिता ने बिना पत्नी को बताये डेकोरेटर से घर की सजावट आदि का काम बंद करने को कहते हैं  ,  अब आगे पढ़ें  …. 


भाग 3 

इधर डेकोरेटर के आदमी सजावट बंद कर अपना सामान समेटने लगे थे  . रोमित की माँ ने उन्हें डांटते हुए कहा “ ये क्या मजाक है ? शादी में दो दिन रह गए हैं , अभी काम पूरा भी नहीं हुआ है और तुमलोगों ने काम बंद कर दिया है  . कहाँ है तुम्हारा सुपरवाइजर , बुलाओ उसे  .  “ 

सुपरवाइजर ने कहा “ हमें तो मालिक का आदेश मिला है कि दोनों घरों का काम तत्काल बंद कर हम वापस आ जाएँ  . “ 

“ क्या बेवक़ूफी की बात कर रहे हो  . मेरा बेटा दूसरे बंगले का काम देखने गया है और लौटते समय कुछ शादी के ड्रेस भी लेता आएगा  . “

“ वी आर सॉरी मां जी , हमें मालिक का आर्डर मानना ही होगा  . “ 

“ आखिर काम बंद करने का कारण क्या है? अगर तत्काल कुछ और रुपये चाहिए तो मैं अभी के अभी दिए देती हूँ  . कुछ देर रुक जाओ बेटा आता ही होगा , उससे बात करने के बाद चले जाना  . “

“ नो माँ जी , हम कारण तो नहीं जानते हैं  . मालिक ने पैसे की कोई बात नहीं कही है , बस तुरंत काम बंद कर वापस आने को कहा है  .  हम और इंतजार भी नहीं कर सकते हैं  . “ 

रोमित की माँ बार बार अपने पति को फोन लगा रही थी पर  फोन कभी  बीजी , कभी नेटवर्क क्षेत्र से बाहर तो कभी स्विच ऑफ मिल रहा था  . सजावट रोकने का कोई कारण उन्हें समझ में नहीं आ रहा था  . इसी उधेड़बुन में करीब दो घंटे बीत गए  . तभी डोर बेल की आवाज सुनकर वे दौड़ पड़ीं  . सामने जूली के माता पिता को देख पहले तो उन्हें आश्चर्य हुआ फिर उन्हें अंदर आने को कहा  . उन्हें बैठने के लिए बोलकर खुद पानी लेने गयीं  . 

दो घूँट पानी पीने के बाद जूली के पिता ने कहा “ बहन जी , ये आपके द्वारा दिए गए जूली के गहने और बनारसी साड़ियां हैं  . इन्हें आप रख लें क्योंकि इनकी अब कोई जरूरत नहीं है  . “

“ जरूरत नहीं है , समधी  जी ये क्या मजाक कर रहे हैं ? “  जूली की माँ ने पूछा 

“ बहन जी यह मजाक का समय नहीं है   . मैं बस इतना जानता हूँ कि यह शादी नहीं हो सकती है  . “

“ इसकी वजह क्या है ? मेरे बेटे या पति ने आप लोगों से कुछ कहा है ? “ 

“ हम बस इतना ही जानते हैं कि रोहित भाई साहब ने फोन कर बताया कि ये शादी अब नहीं हो सकती है  . इसके आगे उन्होंने कुछ नहीं कहा और फोन काट दिया  . उसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है  . इसलिए अब इन चीजों की कोई जरूरत नहीं रह गयी है , आप इसे रख लें  . “  इतना बोलकर जूली के पिता ने एक सूटकेस उनके  सुपुर्द कर दिया और फिर कहा “ अब हमें इजाजत दें  . हमें चलना चाहिए  . “ 

इतना कह कर जूली के माता पिता तुरंत वहां से चले गए  . रोमित की माँ अभी असमंजस की स्थिति में थीं  . वे तो मन ही मन सोच रही थीं कि किसी भी क्षण  बेटा आएगा तो इस बारे में कुछ  जानकारी मिल सकती थी  .   वे दरवाजे पर ही सोफे पर बैठ कर बेटे का इंतजार कर रही थीं  .  उनके साथ घर के नौकर चाकर भी थे  . 

उधर रोहित ने अस्पताल और पुलिस के साथ औपचारिकताएं पूरी कर अपने बेटे की बॉडी को लिया  .  बेटे का चेहरा ट्रक से इतनी बुरी तरह कुचल गया था कि उसकी शिनाख्त उसके ड्रेस और सगाई की अंगूठी से हुई  .  उन्होंने सोचा कि रोमित की माँ बेटे की दुर्दशा बर्दाश्त नहीं कर पायेगी  . इसलिए उन्होंने दाह  संस्कार के लिए सीधे श्मशान घाट जाने का फैसला लिया  . अपने ऑफिस के कुछ निकटतम कुलीग और जूली के पिता को भी वहीँ बुला लिया था  . श्मशान से लौटते देर शाम हो चुकी थी  . वे जूली के पिता और चंद मित्रों के साथ घर लौटे  . उन्हें देख कर रोमित की माँ ने रोते हुए कहा “ ये सब क्या हो रहा है ? मेरी समझ में नहीं आ रहा है  . आपने डेकोरेटर को मना कर दिया और भाई साहब ने जूली के गहने आदि भी वापस कर दिए  . “ 

रोहित ने पत्नी को हाथ पकड़ कर सोफे पर बैठाया और नौकर को पानी लाने को कहा  . रोमित की माँ ने पति से फिर पूछा “ क्या बेटे से आपकी कोई बात हुई है ? वह कब तक लौटेगा ? “ 

रोहित ने पत्नी को अपने आलिंगन में ले कर कहा “ अब हमारा बेटा कभी भी लौट कर नहीं आएगा  .  हमारा बेटा हमें छोड़ कर हमेशा के लिए चला गया है  . “ 

“ क्या बात कर रहे हैं , शुभ शुभ बोलिये  . उसकी शादी होने वाली थी , आपलोगों ने मना कर दिया  . “

“ हमारा बेटा अब नहीं रहा तो अब शादी की बात कहाँ रही , और तुम्हें कितना समझाएं  ?  अपने ही हाथों से उसकी दाह क्रिया कर हम श्मशान से आ रहे हैं  .   “ 

इस बीच जूली की माँ और रोमित के कुछ मित्रों की पत्नियां भी वहां आ गयीं थीं  .  रोमित की माँ रोती चिल्लाती लगभग बेहोश सी गिर पड़ी  . वहां मौजूद औरतों ने उन्हें गले से लगाया और उनके चेहरे पर पानी की बूँदें छींटे  . 

कुछ देर बाद जब वे कुछ सहज हुईं तब उन्होंने पति पूछा “ मुझे बेटे का अंतिम दर्शन क्यों नहीं कराया गया ? “

“ तुम उसकी हालत देख कर सहन नहीं कर पाती  . बेटे का शरीर और चेहरा बुरी तरह छिन्न विच्छिन्न हो चुका था  . “

रोमित की माँ छाती पीट पीट कर पुनः रोती हुई बेहोश हो गयी थीं  . एक दोस्त ने डॉक्टर को बुलाया  . होश आने पर सबने उन्हें सांत्वना दिया और ढाढ़स बढ़ाया “ हमें नियति को स्वीकार करना ही पड़ता है  . “

बहरहाल समय सभी ज़ख्मों को भर देता है . लगभग दो महीने बीत गए थे  .  रोमित के पिता ने दिल्ली से अपना ट्रांसफर पुणे करा लिया था . उनकी बेटी रेणु पुणे में ही सैटल थी  . उधर जूली की तबीयत ठीक नहीं थी , वह अपना पीरियड मिस कर गयी थी . उसकी माँ बेटी को लेकर लेडी डॉक्टर के यहाँ गयी . जांच कर डॉक्टर ने कहा “ आपलोगों के लिए ख़ुशी की बात है . आपकी बेटी माँ बनने जा रही है . “ 

माँ बेटी किसी को इस बात की संभावना नहीं थी . देर तक दोनों एक दूसरे का मुंह देखने लगे थे . घर जाने पर जब माँ ने जूली से पूछा कि यह सब कैसे हुआ तब जूली ने शिमला ट्रिप वाली बात बताई . जूली की माँ ने पति को भी यह बात बताई . दोनों ने अपना सिर पीटते हुए कहा “ अब हम क्या करेंगे ? हमने तो सोचा था कि कुछ दिनों के अंदर बेटी सहज हो जाएगी तब उसके लिए दूसरा वर ढूंढेंगे . अब तो न रोमित है न ही उसके माता पिता यहाँ हैं . “ 

“ रोहित जी के दफ्तर से उनका फोन नंबर लेकर उनसे बात  करें . फिर हमलोग जूली को लेकर उनके यहाँ चलेंगे और उन्हें समझायेंगे  . उम्मीद है वे अपने वारिस को जरूर स्वीकार करेंगे . “

जूली के पिता ने रोहित का  फोन नंबर पता कर उन्हें फोन कर सारी बात विस्तार में बताई , फिर कहा “ हमलोग जूली को लेकर आपके यहाँ आ रहे हैं . आप अपनी बहू और रोमित के होने वाले बच्चे को स्वीकार करेंगे न ? “

“ नवीन  जी , क्यों ज़ख्म पर नमक छिड़क रहे हैं . मेरा बेटा तो चला गया अब उसके नाम और हमारे खानदान की इज्जत को क्यों मिट्टी में मिलाना चाहते हैं ? “

“ आप भरोसा कीजिये , जूली के गर्भ में आपके बेटे की संतान है . आप चाहें तो DNA आदि कोई भी टेस्ट करा कर निश्चिन्त हो सकते हैं कि यह रोमित का ही खून है . “ 

“ अगर सच है फिर भी हम जूली हमारे यहाँ साथ नहीं रह सकती है .  उसकी भी सारी जिंदगी पड़ी है  . बेहतर है आप उसका अबॉर्शन करा दें और दूसरी शादी करा दें . और हाँ , अब आगे न हमें फोन करें न ही आप में से किसी को यहाँ आने की जरूरत है . “ 

रोमित के पिता ने जो कुछ जूली के लिए कहा उस के अतिरिक्त नवीन ने फोन पर रोमित की बहन के चिल्लाने की आवाज सुनी थी “ मैं अपने भाई को अच्छी तरह जानती हूँ  . न जाने किसका पाप जूली भाई के नाम थोपना चाहती है  .  

यह सब सुन कर जूली के पिता की आँखें भर आयीं थीं  . उन्होंने ने घर में आ कर पत्नी और बेटी को रोहित से हुई बातें बतायी . माँ बेटी दोनों को यह सुनकर दुःख हुआ . फिर जूली के पिता ने बेटी से कहा “ शुरू में मुझे भी रोहित का कहना बुरा लगा था पर लगता है जूली के अच्छे भविष्य के लिए उसका  अबॉर्शन कराना ही बेहतर विकल्प है . हमलोग उसकी शादी करा देंगे या वह खुद अपनी पसंद से शादी करने के लिए भी स्वतंत्र है . “ 

जूली की माँ तो चुप थी पर जूली ने कहा “ नहीं , मैं अबॉर्शन नहीं  कराने वाली हूँ , मैं रोमित के बच्चे को जन्म दूँगी . “ 

“ बच्चे को जन्म तो दे दोगी  , उसके पिता का क्या नाम दोगी ? बिना शादी किये तुम्हारे बच्चे को समाज में बदनामी झेलना पड़ेगा और साथ में हमें भी . “


क्रमशः   अंतिम  भाग 4 में