मंजिल - पथक और राही - 7 Muskurahat द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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मंजिल - पथक और राही - 7

कहानियां लिखी जाती है, पढ़ी भी जाती है, किरदार एक के बाद एक आते जाते है, कुछ समझती है, कुछ समझाती है,कई बार कहानी का मोड़ रुला देता है, कई बार हसां देती है,बस इसी कड़ी में...                       

                            भाग 7

पथक: ये कार्ड में बाद में पढूंगा, अभी तो बस मुझे तुम्हारे साथ वक्त बिताना है।

राही : हा, सही कहा और राही और पथक दोनो ही एक दूसरे में जैसे खो से जाते है,जैसे बस इसी पल का इंतजार हो उन्हे,

पथक: राही एक ख्वाइश है मेरी, पूरी करोगी?

राही: कैसी ख्वाहिश? 

पथक: पहले वादा करो के करोगी?

राही: पूरी करने लायक होगी तो जरूर करूंगी।

पथक: बोलो न राही प्लीज? 

राही: अच्छा बाबा ठीक है, बच्चों जैसे जिद करोगे और ऐसे भोली शक्ल बनाओगे तो कोन ही तुम्हे मना कर पाएगा ।पथक : ये हुई न बात, मैं जानता था, चलो अब मेरी ख्वाइश है के तुम एक गाना गा ओ। वो भी तुम्हारा फेवरेट।

राही : मेरा फेवरेट, कोशिश करती हूं....पथक जानता था राही कोनसा गाना गाएंगी, उसे उसके मुंह से ये गाना सुनने में बहोत अच्छा लगता था इसलिए ही पथक ने राही को उसका फेवरेट गाना गाने को बोला...

राही: (गला ठीक करते हुए) पथक this is for us, 

हमको मिली है आज ये, 

घड़ियां नसीब से,

जी भर के देख लीजिए, 

हमको करीब से,

फिर आपके नसीब में वो बात हों न हो,

शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो न, हो

लग जा गले से......

राही पथक के गले लग जाती है

पथक : तुम्हारी आंख में आंसू?

ये शांत पानी, 

की रंगत कुछ ऐसी हो गई,

के उसने मुझसे कहा के,

सुकून के कुछ पल को 

ठहर के जरा आजमा ले,

यूं तो तुम काफी व्यस्त हो,

थोड़ा सा रुक जाओ 

और सोच लो,

खुद की थोड़ी सी तलाश ही कर दो....

अल्फाज ‘मुस्कुराहट’ के...

राही: हां, जब भी ये गाना गुनगुनाती हूं न, तब ऐसा हो ही जाता हैछोड़ो अब ये सब बाते, खाना ऑर्डर करे??

पथक: हांजी, बिलकुल खाना तैयार ही है, बस आता ही होगा, 

तभी एक आदमी खाना लेकर आता है,खाना खाने के बाद दोनो एक दूसरे के साथ वक्त बिताते है,पास में ही स्विमिंग पूल के पास दोनो बैठ जाते है,और एक दूसरे में जैसे खो से जाते है,खामोश से हो जाते है,

राही: " ये शांत पानी,

की रंगत कुछ ऐसी हो गई,

के उसने मुझसे कहा के,

सुकून के कुछ पल को ठहर के जरा आजमा ले,

यूं तो तुम काफी व्यस्त हो,

थोड़ा सा रुक जाओ और सोच लो,

खुद की थोड़ी सी तलाश ही कर दो....

खुद तो तुझको सौंप के,

तुम्हारी रंगत में रंग जाने का जी करता है,

इजाजत है इस बात की,

या फिर आज भी खामोशी सी जुबां है,

हालांकि कुछ खामोशियां जरूरी होती है, बहुत कुछ बताने को...

कुछ खामोशियां जरूरी होती है, बहुत कुछ बताने के लिए"

दोनो के पैर पानी में डूबे हुए है, और दोनो एक दूसरे की आंखों में तांक हुए है, "कुछ पल ठहर कर दोनो ही आगे बढ़ते है,

राही और पथक होटल के रूम में जाते है....

आज जैसे इंतजार खत्म सा हुआ है,जैसे दोनो के बीच की दूरी, दूरी रही ही नही है,वो शाम बड़ी खास सी बनी है

जिसमे एक रूह का दूसरी रूह से मिलन होने को है......

प्यार की बाहर आने को है.....

क्या हुआ होगा, दोनो के बीच की दूरियां खत्म हुई होगी,

क्या हुआ होगा, दोनो मिले होंगे,

क्या हुआ होगा, दोनो का प्रेम जो सिर्फ दोनों का सपना था,वो हकीकत बना होगा, 

क्या दोनो को सुकून मिला होगा, 

क्या हुआ होगा.....

इस कहानी का अंत......

जैसा सोचा था वैसे या कुछ और.....                                  To be continued......