सुबह शौर्य नींद से जग चुका था, पर उसने आँखें नहीं खोलीं ,सामने के टेबल से कुछ टटोलने लगा और जैसे ही एक फोटो फ्रेम उसके हाथ में आया उसने उस फोटो फ्रेम को पकड़कर अपने सामने लाया और फिर उसने अपनी आँखें खोलीं।
ये आज का नहीं बल्कि उसकी हमेशा कि आदत थी। सबसे पहले वो आयान की तस्वीर को ही देखता जिसमें उसे खुद ही बनाया था। जैसे ही उसने उस तस्वीर को देखा उसके होंठों पर एक हल्की सी स्माइल आई फिर वो उठा और उठते ही उसने चारों तरफ अपनी नजरें दौड़ाईं हर जगह आयान की तस्वीर थी जिसे उसने खुद ड्रॉ किया था।
वहाँ आयान के अलावा और किसी की तस्वीर नहीं थी इस्केच पेंटिंग से रूम पूरा भरा हुआ था ।छोटी मोटी बड़ी सारी तस्वीरें थी , ये कहूँ कि उसे आयान के अलावा और किसी की तस्वीर बनानी ही नहीं आती ।
"गुड मॉर्निंग बेबी बॉय !तुम्हें पता है आज ऑफिस जाने का मन नहीं कर रहा ,तुम्हारे साथ ही रहने का मन कर रहा है ,अगर तुम सामने होते तो मुझे जाने के लिए मनाते या तो मुझे रोकते , पर तुम खुद ही नहीं हो इसलिए मैं तुम्हें पहले से बता रहा हूँ कि आज मुझे जाने का मन नहीं है ।आई डोंट वांट टू गो एनीवेर !क्योंकि आज मैं वहाँ जाना चाहता हूँ जहाँ मैं तुमसे पहली बार मिला था।
एक बार फिर से वहीं तुमसे मिलने के लिए क्योंकि आज हमारा वही दिन है जब हम पहली बार मिले थे, पहली बार मैंने तुम्हें देखा था, इसी दिन है।"
"सौर्य वाशू अपने रूम से रेडी होकर जैसे ही हॉल में पहुँचा, उसके डैड ने उसे ज़ोर से चिल्लाया,“कहाँ जा रहे हो, सौर्य? तुमने अपना ऑफिस सूट नहीं पहना है?”
“डैड, आज मैं ऑफिस नहीं जा रहा हूँ, मुझे कुछ काम है।”
“सौर्य, तुम्हें पता है कि आज हमारी कितनी इम्पोर्टेंट मीटिंग है। यू नो कि तुम्हें वहाँ जाना ही होगा।”
“डैड,i can't go, मुझे नहीं जाना । अब जितनी मीटिंग्स हैं, आप हैंडल कर लीजिए।”
“सौर्य, ! मैं देखता जा रहा हूँ, तुम्हारा बिज़नेस में बिल्कुल भी मन नहीं है। कल की तुम्हारी सारी हरकतें तुम्हारी मॉम ने मुझे बताया। अब तुम्हारी हरकतें सहने के लायक नहीं रही हैं, सौर्य। तुम बच्चे नहीं रहे।”
“हाँ डैड, मैं बच्चा नहीं रहा और मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि क्या मेरे लिए सही है और क्या मेरे लिए सही नहीं है। इसलिए मुझे बताने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है कि मुझे क्या चाहिए और क्या नहीं। एंड आज मैं कहीं नहीं जा रहा हूँ।”
इतना कहकर सौर्य अपने डैड से ज़ुबान लड़ाकर वहाँ से चला जाता है। उसने अपनी काली कार निकाली और चल पड़ा वहाँ, जहाँ उसकी मंज़िल थी।शौर्य की कार एक यूनिवर्सिटी के आगे थी, जिसमें लिखा था लर्न म्यूज़िक एकेडमी – संगीत विश्वविद्यालय।
कार जैसे ही वहाँ पर रुकी, उसकी धड़कन जैसे हार्टबीट करने लगी थी।फिर वो कार से उतरकर सामने के एक बेंच पर जाकर बैठ गया और बैठते ही आसपास की सारी तरफ के शोर-शराबों से दूर वो जगह बैठा था, जहाँ शांति छायी थी।और फिर उस सुकून में वो कुछ सोचकर मुस्कराने लगा।
जब उसने मोबाइल की स्क्रीन को ऑन किया, जिसमें आयान की तस्वीर थी, उसे देखकर मुस्कराने लगा।“तुम्हें पता है ना ये कौन सी जगह है।ये वही जगह है जहाँ हम मिले थे। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि तुम मुझे एक बार मिल जाओ यहीं पर।काश, मैं उस समय वापस जा पाता जहाँ पर हम मिले थे।”उस ने रोते-रोते कहा, तो उसकी आँखों के आँसू उसके मोबाइल की स्क्रीन पर टपकने लगे।और फिर वो अपने पिछले जन्म की यादों में गुम हो गया। जो कि उसे ऐसे याद थे जैसे कि वो पिछले साल के हों, पिछले जन्म के नहीं।
Past life16nov1995नाइन्टीन नाइन्टी फ़ाइव(1995) —
ये एक म्यूज़िक लर्निंग एकेडमी थी और यहाँ के जो हेड प्रिंसिपल थे, वो आयान के पिताजी थे शास्त्री जी।आयान को क्लासिकल म्यूज़िक में ज़्यादा इंटरेस्ट था। वो अपने पिताजी के साथ ऐसा सुर और तान छेड़ता कि मानो सीधे दिल पर उतर गई हो। उसकी बहुत ही स्वीट और नाज़ुक वॉइस में एक अलग ही सुकून मिलता था।
पर वक़्त के साथ क्लासिकल शास्त्रीय म्यूज़िक अब न्यू जनरेशन के लिए थोड़ा ओल्ड हो गया था, लेकिन आयान इसे दिल से गाता था। उसकी ज़ुबान से निकली हर एक मीठी आवाज़ सीधे दिल को छूती थी।ऐसे ही सुरीले अंदाज़ में आयान अपने पिताजी के जो वहाँ हेड शिक्षक संगीत के महान गायक के साथ एक शास्त्रीय संगीत प्ले कर रहा था, जिसे वहाँ के विद्यार्थी बड़े गौर से सुन रहे थे।
तभी एक झन्नाटेदार गिटार की आवाज़ ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसने इतने ज़ोर से गिटार की तान छेड़ी कि पूरा संगीत विद्यालय गूँज उठा। उसने माइक पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से गाना शुरू कर दिया और गिटार बजाने लगा।जितने भी वहाँ पर क्लासिकल म्यूज़िक सुन रहे थे, सब उठकर उसके लिए चिल्लाने के लिए भागे।
सबकी ज़ुबान पर एक ही नाम था — अनुपम रॉय, जो कि एक फ़ेमस सिंगर था।अनुपम अपने उस ज़माने का एक बहुत ही फ़ेमस रॉक स्टार सिंगर था। उसने अपने गिटार से धुन छेड़ी और सारे लोग जैसे उसे देखने के लिए उमड़ पड़े।जितने भी एकेडमी के लोग थे, सारे उसके लिए वहाँ आ गए संगीत सुनने के लिए।
और रह गए आयान और उसके पिता जी। उन्हें इसमें कोई इंटरेस्ट नहीं था, बल्कि उन्हें इस बात पर गुस्सा आ रहा था कि ये क्लासिकल म्यूज़िक सुनने की एकेडमी है, ना कि किसी रॉक स्टार का कॉन्सर्ट। यहाँ पर वो ऐसी हरकतें कर रहा है।इस बात के लिए वो दोनों बहुत नाराज़ हुए।“किसकी इतनी हिम्मत हो गई है जिसने अनुशासन तोड़ने की कोशिश की?
”पिता जी ने कहा, आप प्लीज वहां मत जाइए आप अगर चिल्लाएंगे तो आपकी तबीयत खराब हो जाएगी“ मैं देख लूँगा।”
“आयान, इसमें तुम क्या करोगे? ये कौन है? इससे मुझे ही निपटना है।”ऐसा बोलकर उसके पिता जी उसे रोकने के लिए उधर तेज़ी से चले गए।पर अनुपम था कि अपने ही मस्ती में था।सारे फैंस उससे बहुत प्यार कर रहे थे। सब उसके लिए चैअरप कर रहे थे। उसका नाम लेकर पुकार रहे थे।
और लड़कियाँ तो उसे चिल्ला-चिल्लाकर पागल ही हो गई थीं।यार, वो इतना अच्छा गाता था कि मानो हर किसी के पैर थिरकने लगे थे। अनुपम हिपाँप हिंदी, इंग्लिश और कुछ-कुछ पंजाबी मिक्सिंग का सिंगर था।हमेशा जब भी अनुपम का कॉन्सर्ट होता था, तो पूरा कॉन्सर्ट लड़कियों और लड़कों से भरा रहता था।
इंडिया लेवल पर वह बेस्ट सिंगर मे एक था, उसने कई सारे अवॉर्ड भी मिले थे। सिंगिंग रियलिटी शो में कई बार विनर भी हुआ था।ऐसा अनुपम यहाँ एकेडमी में क्या कर रहा है? , ये सबसे बड़ा सवाल था सबके लिए।लेकिन सबसे बड़ी बात ये थी कि उसे इतना लाइव सामने देखकर गाना — ये बहुत बड़ी बात थी।इसलिए सारे लोग उसके लिए चीयर अप कर रहे थे।और अनुपम था कि अपनी छुन में मस्त था।
बीच-बीच में जब रुकता, तो अपनी फैंस से बात करता और फिर शुरू हो जाता गाने के लिए।सब लोग उसका आनंद उठा रहे थे।पर इतने में ही हेड आयान के पिताजी ज़ोर से चिल्लाए, जिससे सब लोग बिखरकर इधर-उधर भागने लगे।हालाँकि किसी का मन नहीं था जाने के लिए, लेकिन वे एकेडमी में संगीत सीखने आए थे और वो वहाँ के हेड प्रिंसिपल थे।अगर कोई उनकी बात नहीं मानता, तो हो सकता है कि अगले दिन वह यूनिवर्सिटी में नज़र ही न आए।इसलिए टीचर्स सब भाग गए, सिवा कुछ टीचर्स के और कुछ हेड बॉडीगार्ड्स के, जो कि अनुपम की सुरक्षा के लिए आए थे।
“एक्सक्यूज़ मी, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि आप कौन हैं?आपको दिखाई नहीं पड़ता है कि लोग कितने एंजॉय कर रहे थे?”
“पहली बात, तुम मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते।मैं रघुविंद शास्त्री हूँ।और जिस जगह तुम खड़े हो ना, वो मेरे लिए एक मंदिर समान है, न कि तुम्हारा कॉन्सर्ट म्यूज़ियम।तो तुम यहाँ ऐसी हरकतें नहीं कर सकते।”
“ओह कम ऑन सर, आप इतने ओल्ड भी नहीं हैं जितना आप बातें कर रहे हो।आई नो कि ये म्यूज़िक एकेडमी है, इसलिए तो मैं यहाँ पर अपना म्यूज़िक सिखा रहा हूँ।अब अपना तो क्या, आप जाएँगे यहाँ से प्लीज़, मैं अपना काम कंटिन्यू करूँ।”“तुम्हें यहाँ आने के लिए किसने कहा था?तुम्हें अच्छी तरह से पता है कि यहाँ तुम जैसे लोगों को एडमिशन नहीं दिया जाता।यहाँ सिर्फ़ क्लासिकल म्यूज़िक सुनने वालों को ही एडमिशन दिया जाता है। नाव गेट आउट।”
“यू नो वॉट, मैं यहाँ आना भी नहीं चाहता था।मैं खुद के बनाए म्यूज़िक पर बिलीव करता हूँ।बट यू नो, माई मॉम वांटेड दिस।मेरी मॉम को क्लासिकल सुनने का शौक है और उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आता कि मैं मॉडर्न म्यूज़िक यूज़ करता हूँ।इसलिए मैंने सोचा कि मैं कुछ क्लासिकल सीखूँ, ताकि मैं अपनी मॉम के लिए उन्हें कुछ डेडिकेट कर सकूँ।आप समझ रहे हैं न मैं क्या कहने की कोशिश कर रहा हूँ?इसलिए मैंने यहाँ एडमिशन लिया है।तो मैं अपना काम कर रहा हूँ, आप अपना काम करो।”
“तुम ऐसे नहीं मानोगे।तुम जैसे लड़कों को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ।”इतने गुस्से से उसने चिल्लाया कि उसकी वजह से उसे अजीब सा लगने लगा।फिर उसके सीने में एक तड़प सी उठने लगी और वो वहीं पर गिर पड़ा।
“पिता जी!”आयान ने बहुत ज़ोर से चिल्लाया।आयान भागते हुए अपने पिता को संभालने के लिए आया।तब जाकर अनुपम की नज़र आयान पर पड़ी।“आपको स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए।डॉक्टर ने हमें मना किया है स्ट्रेस लेने से।"सुनिए, "आप जो भी हैं, आप यह सब नहीं कर सकते।”आयान ने अनुपम से कहा।तो अनुपम उसकी ओर देखने लगा।वो फर्स्ट यंग पर्सन था जिसने आयान को पहचानने से मना कर दिया।
“क्या तुम्हें नहीं पता कि मैं कौन हूँ?”अनुपम ने पूछा।“लिसन, आप जो भी हो, प्लीज़ आप जाइए यहाँ से।पिता जी ऑलरेडी एक हार्ट पेशेंट हैं और वो ऐसे चिल्ला नहीं सकते।तो आप जहाँ से आए हैं, वापस चले जाइए।”
“ साँरी! मुझे बहुत दुख हुआ है जानकर कि वह हार्ट पेशेंट है पर मैं यहां से नहीं जा रहा ,मैं यहां संगीत ही सीखने आया हू, चाहे इन्हें पसंद हो या ना हो मैं तो कहीं नहीं जा रहा हूँ।मैंने यहीं पर एडमिशन लिया है,” अनुपम ने कहा।“और मैं जो कर रहा हूँ, मैं वो करके ही रहूँगा।”“मैंने कहा यहाँ से जाओ!”आयान ने चिल्लाया।
“तुम मुझे ऐसे जाने के लिए नहीं कह सकते।मैंने यहाँ के लिए एडवांस पेमेंट किया है और एडमिशन लिया है।यू नो वॉट, मैं यहाँ पर म्यूज़िक सीखने आया हूँ, मैं सीखकर ही रहूँगा।”इतना बोलकर अनुपम वहाँ से जाने लगा।आयान उसे देखता ही रह गया।और उसके डैड भी आयान को बहुत ख़ामोशी से देख रहे थे।अनुपम उसे देखते-देखते चला गया।यह सब शौर्य बेंच पर बैठा-बैठा सोच रहा था।और सोचते-सोचते उसके होंठों पर स्माइल आ गई।
“ये फर्स्ट टाइम था जब हम मिले थे।तो मुझे कहाँ पता था कि तुम्हारे साथ एक अटूट बंधन में बंध जाऊँगा।ऐसा बंधन जो कभी टूटने नहीं वाला। हमेशा दिल में बस जाओगे।जो कभी नहीं निकलोगे।”"उस दिन हमारी पहली मुलाकात थी।और ऐसे-ऐसे कारनामों तक पहुँची कि मैं सोचता हूँ,मन करता है कि तुम्हारी यादों में ही गुम हो जाऊँ — तुम्हारे साथ।
I miss you ! अयान!!! शौर्य के आंखों से आंसू टपकने लगे ।पिछले जन्म की मुलाकात के बाद ऐसा क्या हुआ? कि अनुपम रॉय !जो की एक प्लेबॉय था ,इतना बड़ा रॉकस्टार था जिस पर लाखों लड़कियां फ़िदा थी, उसका दिल एक लड़के पर आया ?जाने के लिए पढ़ते रहिए! कमेंट करना न भुले!