Behad Junooniyat Raven hart द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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Behad Junooniyat

"प्लीज़ मुझे जाने दो। मुझे तुमसे शादी नहीं करनी। मेरे भी कुछ सपने हैं!" पंखुड़ी ने गिड़गिड़ाकर कहा।"तुम्हारे पास और कोई रास्ता नहीं है। तुम्हें मेरी बात माननी ही पड़ेगी, नहीं तो तुम्हारे घरवाले भुगतेंगे!" शिवांश ने डराते हुए कहा।"लेकिन तुम..." पंखुड़ी डर से आगे कुछ नहीं बोल पाई।"मैं क्या? अपनी बात पूरी करो!" शिवांश चिल्लाया।शिवांश सिंह ओबेरॉय — एक करोड़पति, जिसके पास सब कुछ है, सिवाय उस लड़की के — पंखुड़ी।पंखुड़ी एक नादान और सुंदर लड़की है, जिसे ड्रॉइंग और पेंटिंग से बेहद लगाव है। उसका सपना है कि अपने पापा की तरह वह भी पढ़-लिखकर एक टीचर बने।लेकिन उसे यह नहीं पता कि वह शिवांश की जुनून बन गई है।एक वादा — जिसके लिए शिवांश ने प्रण लिया कि पंखुड़ी की रक्षा करना उसकी ज़िम्मेदारी है, क्योंकि वह उसकी दोस्त की बेटी है। परंतु उसी रक्षा के बीच, शिवांश को पंखुड़ी से प्यार हो जाता है, और वह यह भूल जाता है कि वह उसकी दोस्त की बेटी है।अब उसे हासिल करना ही शिवांश का जुनून है — और उसके लिए वह कुछ भी कर सकता है।सपोर्ट करो गाइज! एक रीडर ने रिक्वेस्ट की थी कि उन्हें हिंदी वर्ज़न चाहिए।

कहानी के किरदार



शिवांश सिंह ओबेरॉय: करोड़पति, हैंडसम, ६ फीट २ इंच। खड़ूस, अकड़ू, लेकिन जब पंखुड़ी की बात आती है तो किसी की नहीं सुनता और किसी को भी उसके पास नहीं जाने देता।




पंखुड़ी गुप्ता: एक सुंदर, सुशील और साफ़ दिल की लड़की, जो दुनिया से कम और अपने आर्ट चित्रों से ज्यादा प्यार करती है। लेकिन उसे नहीं पता कि वह शिवांश की जुनून बन गई है।


⚠️ सामग्री चेतावनी (Content Warning)
इस अध्याय में शारीरिक हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, जबरदस्ती, धमकी और बिना सहमति के व्यवहार से जुड़े दृश्य हैं। यह सामग्री कुछ पाठकों के लिए परेशान करने वाली हो सकती है। पाठक विवेक से पढ़ें।

🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟

पंखुड़ी का POV

रात सन्नाटे में डूबी थी, सिवाय मेरे कान में गूंजते दिल की धड़कनों के। मैं यहाँ कैसे पहुँच गई? कमरे की हवा दम घोंटने वाली थी, मद्धम रोशनी दीवारों पर भयावह परछाइयाँ नाच रही थीं। मेरा चेहरा अभी भी उसके थप्पड़ की चोट से जल रहा था, और कंधे पर दांतों के निशान से दर्द हो रहा था। मेरा दिमाग बेचैन था—जवाब ढूँढता, रास्ता ढूँढता। लेकिन मुझे जो मिला, वह था शिवांश के चेहरे पर वह शैतानी मुस्कान—उसकी ताकत का क्रूर एहसास।

मेरी ज़िंदगी ऐसे कैसे बर्बाद हो गई? सब कुछ ठीक था—मुझे तो ऐसा लगा था। मैं ग्रेजुएशन की तैयारी कर रही थी, एक शांत, आज़ाद ज़िंदगी का सपना देख रही थी। मेरा परिवार ही मेरी दुनिया था, मैं उन्हें गर्व महसूस कराना चाहती थी। लेकिन शिवांश, अपनी भारी मौजूदगी के साथ, उसके अलग इरादे थे। वह हमेशा आसपास रहता था—मेरे परिवार का करीबी दोस्त, आकर्षक लेकिन रहस्यमयी शख्स। मैंने कभी उसकी तरफ़ खास ध्यान नहीं दिया, बस औपचारिक बातें। मुझे कभी अंदाज़ा नहीं हुआ कि वह मुझे देख रहा था, साजिश रच रहा था, सही मौके का इंतज़ार कर रहा था।

और उसने वार कर दिया।


Hello guys, aapki author 
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