रेड कोर - 2 Md Siddiqui द्वारा कल्पित-विज्ञान में हिंदी पीडीएफ

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रेड कोर - 2

आरव की चेतना धीरे-धीरे लौट रही थी। उसके शरीर में दर्द नहीं था, बल्कि एक अजीब सी गर्मी दौड़ रही थी, जैसे उसकी नसों में आग बह रही हो। जब उसने आँखें खोलीं तो सामने का आसमान नीला नहीं, बल्कि मुहिब भाई कुछ भी करने से पहले एक मीटिंग किया करो, उसमें भरोसेमंद लोगों को बुलाया करो एक बार समझाओ दो बार समझाओ, फिर भी बात न समझ आए तो एक्शन लो छोटी-मोटी गलती हो जाती है और कभी दूसरे को फ़ायदा भी मिल जाता है, लेकिन आजकल लोग काम निकलते ही दूसरा रास्ता अपना लेते हैं, इसलिए पहले अपना फ़ायदा-नुकसान सोचो मैं जो करने जा रहा हूँ उससे क्या नुकसान होगा और क्या फ़ायदा क्योंकि ग़ुस्से और जोश में लिया गया फ़ैसला हमेशा ग़लत होता है दो-तीन भरोसेमंद सलाहकार रखो उनसे मीटिंग करो फिर एक्शन लो। रंग का था, जिसमें बिजली जैसी रोशनी लगातार तैर रही थी। ज़मीन धड़क रही थी, मानो वह कोई जीवित चीज़ हो। हवा में धातु और ओज़ोन की गंध थी। यह पृथ्वी नहीं थी।
उसके चारों ओर खड़े प्राणी इंसानों जैसे नहीं थे। कुछ लंबे थे, कुछ के शरीर पर चमकदार कवच उगा हुआ था, और कुछ की आँखें पूरी तरह काली थीं। उनके बीच खड़ी वह महिला शांत थी, लेकिन उसकी मौजूदगी में डर था। उसने आरव को बताया कि उसका शरीर अब केवल एक ऊर्जा का वाहक नहीं है, बल्कि वह उस शक्ति का केंद्र बन चुका है, जिसे ब्रह्मांड में रेड-कोर कहा जाता है। यह वही शक्ति थी जिसने अनगिनत ग्रहों को या तो बचाया था या मिटा दिया था।
आरव को ज़्यादा सोचने का समय नहीं मिला। आकाश फटने लगा और वहाँ से विशाल युद्धपोत उतरने लगे। ये जहाज़ किसी भी पृथ्वी की तकनीक से कहीं आगे थे। लेज़र की बारिश शुरू हो गई। ज़मीन फटने लगी। जिन प्राणियों ने उसे घेर रखा था, वे अचानक सैनिक बन गए। हवा में उड़ते हुए, ज़मीन पर दौड़ते हुए, हर दिशा से हमला शुरू हो गया। आरव ने खुद को उनके बीच पाया, लेकिन इस बार वह भागा नहीं। उसने पहली बार महसूस किया कि उसकी शक्ति सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि नियंत्रण चाहती है।
उसके हाथ उठते ही हवा में कंपन हुआ। सामने आ रहे दुश्मन हवा में ही फट गए, जैसे अदृश्य दीवार से टकरा गए हों। हर वार के साथ उसकी आँखों की लाल चमक और गहरी होती गई। लड़ाई रुकने का नाम नहीं ले रही थी। जैसे-जैसे वह लड़ता गया, उसकी स्मृतियाँ खुलने लगीं। उसे दिखने लगा कि यह युद्ध नया नहीं है। यह हज़ारों साल पुराना है। वह केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि एक श्रृंखला का हिस्सा है।
उसे बताया गया कि पृथ्वी को बचाने के बाद ब्रह्मांड की शक्तियाँ जाग चुकी हैं। कई साम्राज्य ऐसे हैं जो पृथ्वी को सिर्फ एक संसाधन मानते हैं। रेड-कोर उनके लिए सबसे बड़ा खतरा और सबसे बड़ा हथियार है। और अब यह हथियार आरव के भीतर था। यही कारण था कि उसे जीवित रखा गया।
आरव को एक युद्धपोत में ले जाया गया। वह जहाज़ किसी शहर जितना बड़ा था। भीतर हज़ारों सैनिक, मशीनें, और ऊर्जा से बने हथियार थे। जैसे ही जहाज़ ने गति पकड़ी, अंतरिक्ष में एक और हमला हुआ। दुश्मन जहाज़ों ने चारों ओर से घेर लिया। लेज़र, प्लाज़्मा और विस्फोटों से पूरा अंतरिक्ष जलने लगा। आरव को आगे भेजा गया, सीधे युद्ध के बीच।
वह शून्य में तैरते हुए दुश्मनों से लड़ रहा था। हर घूंसा किसी उल्कापिंड जैसा भारी था। टूटते जहाज़, फटते शरीर, और चीखों से भरा सन्नाटा। एक विशाल दुश्मन, जो पूरी तरह मशीन था, उसके सामने आया। उसके शरीर से निकलती ऊर्जा आरव की शक्ति को चुनौती दे रही थी। दोनों टकराए और पूरा अंतरिक्ष हिल गया। यह लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि नियंत्रण की थी। अंत में आरव ने उसकी ऊर्जा को अपने भीतर खींच लिया, और वह दुश्मन राख में बदल गया।
लेकिन जीत के साथ सच्चाई भी आई। उस महिला ने बताया कि पृथ्वी अब भी खतरे में है। वोरैक्स मरा नहीं था। उसने अपनी चेतना को ब्रह्मांड के एक नेटवर्क में फैला दिया था। अब वह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक सिस्टम बन चुका था। अगर उसे रोका नहीं गया, तो वह हर ग्रह को एक ही दिमाग़ से नियंत्रित करेगा।
यात्रा शुरू हुई। अलग-अलग ग्रह, अलग-अलग युद्ध। कहीं आग बरसती थी, कहीं बर्फ़ के तूफ़ान में लड़ाई होती थी। कहीं गुरुत्वाकर्षण इतना तेज़ था कि हर कदम मौत जैसा था। आरव हर लड़ाई में खुद को और खोता गया, लेकिन साथ ही और मजबूत भी बनता गया। उसके भीतर इंसान और कुछ और के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही थी।
एक ग्रह पर उसने देखा कि पूरा शहर गुलाम बना हुआ है। लोग ज़िंदा थे, लेकिन उनकी आँखों में कुछ नहीं था। सब एक ही आदेश पर चलते थे। वहाँ वोरैक्स की मौजूदगी महसूस होती थी, भले ही उसका शरीर नहीं। आरव ने अकेले उस नेटवर्क पर हमला किया। हर कदम पर मशीनें टूटती गईं, लेकिन हर टूटने के साथ उसकी यादें भी बिखरती गईं। उसे डर लगने लगा कि कहीं वह खुद भी एक दिन वोरैक्स जैसा न बन जाए।
अंतिम लड़ाई की ओर बढ़ते हुए, ब्रह्मांड जैसे उसके खिलाफ़ खड़ा हो गया। कई साम्राज्य एक साथ आ गए। उनका लक्ष्य था रेड-कोर को खत्म करना। युद्ध इतना बड़ा था कि ग्रह टूट रहे थे, सूरज बुझ रहे थे, और अंतरिक्ष में आग के बादल बन रहे थे। आरव इस सबके बीच अकेला था, लेकिन फिर भी केंद्र में था।
आख़िरकार वह उस स्थान पर पहुँचा जहाँ वोरैक्स की चेतना का मूल था। वह कोई जगह नहीं, बल्कि एक विशाल ऊर्जा संरचना थी, जो पूरे ब्रह्मांड में फैली हुई थी। आरव ने हमला किया। हर वार के साथ उसे अपने भीतर कुछ टूटता हुआ महसूस हुआ। यह लड़ाई जीतने की नहीं, बलिदान की थी। उसने वोरैक्स के नेटवर्क को तोड़ दिया, लेकिन इसकी कीमत यह थी कि रेड-कोर पूरी तरह जाग गया।
जब सब कुछ शांत हुआ, तो युद्ध खत्म हो चुका था। साम्राज्य पीछे हट गए। ग्रह बच गए। लेकिन आरव अब पहले जैसा नहीं रहा। वह अब किसी एक दुनिया का नहीं था। वह एक जीवित शक्ति बन चुका था, जिसे कहीं टिकना नहीं था।
दूर पृथ्वी पर, नायरा ने आकाश में एक लाल तारा चमकते देखा। उसे नहीं पता था कि वह तारा आरव है या उसकी परछाईं। ब्रह्मांड में कहीं, आरव अकेले अंतरिक्ष में खड़ा था, यह जानते हुए कि यह शांति अस्थायी है। कहीं न कहीं, कोई और शक्ति जाग रही थी।
कहानी यहाँ खत्म नहीं होती।
यह सिर्फ युद्ध का दूसरा अध्याय