छुपा हुआ सच Kaushik dave द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • Rebirth of a Bench - 1

    चैप्टर 1: सपने, जूते और मेरा जेंडर क्राइसिससब कुछ कितना अजीब...

  • हमसफ़र

    बदन पर किसी ठंडी चीज का एहसास पाकर मेरी तंद्रा टूटी। विचारों...

  • सब्र का फल

    _लेखिका: डॉ वंदना शर्मा_---सब्र का फलएक समय की बात है। बिजनौ...

  • परायें हुए अपने

    " ससुराल का बुलावा "                    दोपहर का समय था , घर...

  • श्रापित एक प्रेम कहानी - 84

    आलोक की बात को सुनकर वृन्दा गुस्से से एकांश की और दैखकर कहती...

श्रेणी
शेयर करे

छुपा हुआ सच

सपनों की तरह शांत सुबह थी। दीपिका अपनी बालकनी में खड़ी चाय पी रही थी। दूर तक फैले पुराने स्कूल की इमारत पर उसकी नजरें टिक गईं। आज वही स्कूल फिर से खुलने वाला था।
“क्या मैं फिर से वही भीड़ में खुद को खो दूँगी?” दीपिका ने दिल में सोचा।
जैसे ही उसने कदम बढ़ाया, उसकी नजर एक लड़के पर पड़ी। वही लड़का जिसने 5 साल पहले उसकी जिंदगी बदल दी थी।
वो लड़का – आरव।
दीपिका की धड़कन तेज हो गई। “तुम यहीं हो?” उसकी आवाज़ कांप रही थी।
आरव मुस्कुराया, लेकिन उसकी आँखों में दर्द झलक रहा था।
“दीपिका… मैं…” वह बीच में रुक गया।
5 साल की दूरी और अनकहे शब्दों के बावजूद, उनका अटूट बंधन सामने आया। दीपिका के मन में सवाल उठ रहे थे – क्यों गायब हुआ था आरव? और अब क्यों लौट आया है?
दोनों ने धीरे-धीरे पुरानी यादें साझा कीं। दीपिका ने महसूस किया कि कुछ बातें छुपाई गई थीं।
आरव ने आखिरकार सच बताया – उसकी अचानक गायब होने की वजह एक बड़ा रहस्य था।
“मुझे माफ कर दो, दीपिका… मुझे मजबूरी थी। मैं तुमसे हमेशा सच्चाई छुपा रहा था।”
दीपिका की आँखों में आंसू थे। वह जानना चाहती थी – क्या उनका प्यार इस छुपे हुए सच को सह पाएगा?
आरव ने धीरे से हाथ बढ़ाया। “मैं लौट आया हूँ, सिर्फ तुम्हारे लिए।”
दीपिका ने उसकी आंखों में देखा। दर्द, प्यार और सच – सब झलक रहा था।
तभी स्कूल के पुराने हिस्से में एक आवाज़ गूँजी। ऐसा लगता था कि कोई उनका सामना कर रहा था। दोनों डर के मिश्रित जज़्बात में एक-दूसरे का हाथ कसकर पकड़े।
सच और प्यार की लड़ाई शुरू हो चुकी थी।
दीपिका ने खुद से कहा, “अगर प्यार में सच है, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं।”
और आरव ने भी यही महसूस किया।
वे दोनों धीरे-धीरे उस पुरानी इमारत की ओर बढ़े। हर कदम पर पुरानी यादें उनकी आँखों के सामने जीवंत हो रही थीं।
“तुम याद कर रहे हो?” दीपिका ने सवाल किया।
आरव ने सिर हिलाया। “हर वो दिन जब तुम मेरे साथ थीं… और मैं तुम्हारे बिना खो गया था।”
दीपिका की आँखों में आँसू और स्मित दोनों थे। वह जानती थी कि उनकी कहानी अब फिर से लिखी जा रही थी।
जैसे ही वे गैलरी के पास पहुँचे, एक धुंधली परछाई उनकी ओर बढ़ रही थी। दीपिका ने गहरी सांस ली।
“क्या ये वही रहस्य है जो तुमसे छुपा था?” उसने पूछा।
आरव ने नर्म स्वर में जवाब दिया, “हाँ… और मैं चाहता हूँ कि तुम पहले जानो कि तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा था।”
उस दिन, दोनों ने अपनी पुरानी गलियों में घूमा, स्कूल के पुराने बेंच पर बैठे और हर वह पल याद किया जो कभी अधूरा रह गया।
“हमारे प्यार में अब कोई दूरी नहीं रहेगी,” आरव ने कहा।
दीपिका ने सिर हिलाया। “सिर्फ सच और विश्वास।”
लेकिन उनकी खुशी लंबे समय तक नहीं टिक सकी। पीछे से कोई आवाज़ गूँजी – एक पुराना दोस्त, जिसे कभी वे भूल गए थे, सामने खड़ा था।
“तुम दोनों अब भी साथ हो? मुझे नहीं लगता कि सब इतना आसान है।”
यह वाक्य उनके लिए नया मोड़ लेकर आया – एक नया संघर्ष, एक नया रहस्य।
दीपिका और आरव अब तैयार थे – प्यार के लिए, सच्चाई के लिए, और उन रहस्यों के लिए जो अब सामने आने वाले थे।
यह सिर्फ शुरुआत थी।