विषैला इश्क - 30 NEELOMA द्वारा पौराणिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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विषैला इश्क - 30

(आद्या की नाग शक्ति जगाने के लिए पूजा की योजना बनाई जाती है, लेकिन आद्या डर और असहाय महसूस करती है। वह और अतुल्य नागधरा से भागने की कोशिश करते हैं, पर विराट उन्हें रोक लेता है। विराट आद्या को सम्मोहित कर अपने पास रखता है। बाद में वह आद्या से विवाह का प्रस्ताव देता है, जिसे आद्या शांति से स्वीकार करती है। नाग गुरु चैतन्य इस सम्मोहन और विवाह पर आपत्ति जताते हैं, लेकिन नाग रानी यह मानती है कि आद्या की शक्तियां समाप्त हो चुकी है और उसके लिए युद्ध करना समय और शक्ति की बर्बादी है। और नाग गुरू नागशौर्य उसे चेताते हैं कि यह विवाह नाग धरा को शक्तिशाली और वनधरा को शक्तिहीन बना देगा। विराट और आद्या के बीच विवाह और शक्ति जागरण का रहस्य नागधरा और वनधरा में रोमांच बढ़ाता है। अब आगे)

अतुल्य की वापसी 

विराट की शक्ति के आगे काले बादलों से ढकी हुई आकाशगंगा के नीचे, अतुल्य नागधरा की सीमा पर खड़ा था — उसकी आँखों में ज्वालामुखी जैसी बेचैनी थी।

चारों ओर नाग सैनिक तैनात थे। जैसे ही वह एक रूप धरता — कभी बुजुर्ग नाग साधक का, कभी कोई साधारण नाग सेवक — वह कुछ ही कदम चल पाता कि एक नीली ज्वाला उठती और उसका असली चेहरा उजागर हो जाता।

"अतुल्य! नागधरा में तुम्हारा प्रवेश वर्जित है!" सैनिकों ने चेताया।

अतुल्य ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया — थका नहीं था, लेकिन बेबस था। "बहन को कैद में देखूं और चुप रहूं?" उसने खुद से कहा।

उसने एक ओर देखा — वही स्याह दीवार जो नागधरा को बाकी लोकों से अलग करती थी।

अचानक उसके चेहरे पर दृढ़ता की रेखा उभरी। "नागधरा नहीं आने दे रहे? तो अब नागरानी के पास जाऊँ—वही मुझे अंदर ले जाने का मार्ग बताएगी!"

अतुल्य उठा — उसकी आँखों में अब भीषण ज्वाला थी।  "मेरी प्यारी बहना... मैं तुझे इस विषैले महल से निकालकर ही रहूनगा।"और वो चल पड़ा — वनधरा की ओर, नाग रानी से मिलने।

वनधरा, नागरानी का दरबार

वनधरा के महल में चांदी की रेशमी परतों वाले परदे फड़फड़ा रहे हैं। हवा में नागरक्त की सुगंध है।

नागरानी सिंहासन पर बैठी है — शांत, स्थिर, लेकिन उसकी आंखों में गहरी चालें तैरती हैं।

अचानक द्वारपाल आता है —"महारानी, कोई युवक आपसे मिलने की ज़िद कर रहा है। कहता है कि सहायता चाहिए।"

नागरानी बिना हिले कहती है,"नाम?"

"अतुल्य।"

एक पल को नागरानी की भौंहें हल्की सी उठती हैं। "उसे भेजो।"

दरबार में प्रवेश करता है अतुल्य। उसकी चाल में थकावट है, लेकिन चेहरे पर आग है।

"महारानी," उसने सिर झुकाया, "मुझे आपकी मदद चाहिए।" नागरानी की आवाज़ ठंडी थी —"किसलिए?"

"मेरी बहन आद्या नागधरा में कैद है। कोई राजकुमार है वहाँ का — विराट। उसने मेरी बहन को रोक रखा है।"

"वह तुम्हारी बहन है?" नागरानी की आवाज़ में दिलचस्पी आ गई।

"हाँ, मेरी छोटी बहन। उसके सिवा मेरा कोई नहीं।"

नागरानी चुप रही। उसकी आँखें अतुल्य को पढ़ने लगीं — जैसे कोई शक्ति खोज रही हो उस साधारण लड़के में।

"तुम्हें क्यों लगता है कि मैं मदद करूँगी?"

"क्योंकि... आप ही हैं जो नागधरा को टक्कर दे सकती हैं। आप चाहें तो उसे छुड़ा सकती हैं।"

नागरानी मुस्कुराई।

अतुल्य ने हाथ जोड़ गिडा़गिडाते हुए कहा "आप अगर मेरी मदद करें तो आजीवन वनधरा का सेवक बनकर रहूंगा। आप मुझे धरती से इसी कारण से लाती थी न। आप नाग धरा पर हमला मेरी बहन को मुक्त करने में सहायता...  "

नाग रानी ने बीच में ही कहा "और क्या तुम्हें  पता है नागधरा और वनधरा मित्र राज्य है, एक मित्र राज्य  कैसे दूसरे पर हमला कर सकते है?"

"नहीं। मुझे सिर्फ इतना पता है कि मेरी बहन को बिना किसी दोष के बंदी बनाया है ... और वनधरा की नाग रानी ही मेरा एक मात्र आशा है ।"

एक पल को नागरानी की मुस्कान फीकी पड़ी।

"ठीक है," उसने कहा।

"मैं सोचूँगी। पर एक शर्त है।"

"क्या?"

"अगर मैंने मदद की... और तुम्हें नागधरा में प्रवेश दिलाया, तो तुम किसी को नहीं बताओगे कि तुम्हारी मदद हमने की है और सही समय पर हम हमला करेंगे।"

अतुल्य ने हां में सिर हिला दिया‌। 

नागरानी मन ही मन सोचती है — "आद्या को मैं खुद नागधरा से नहीं निकाल सकती, लेकिन यह लड़का मेरे लिए मोहरा बनकर जाएगा। और जो मैं चाहती हूँ... वही वहाँ से बाहर लाएगा।"

नाग धरा 

आद्या के कक्ष में

"जो राजकुमार मुझे मारने को आतुर था, अब मुझसे विवाह करना चाहता है... क्यों?"

आद्या आईने में अपनी ही आँखों में झाँक रही थी — उनमें संशय, क्रोध और एक गहरी चाल तैर रही थी। तभी द्वार पर आहट हुई।

"नागराज पुत्र आपको अपने कक्ष में बुला रहे हैं," आवाज़ जानी-पहचानी थी। आद्या ने पलटकर देखा और चौंक गई। "रूचिका?"

उसकी आँखें चमक उठीं — वो दौड़कर उससे लिपट गई। लेकिन सामने खड़ी युवती का चेहरा भावशून्य था। "आपको भ्रम हुआ है। मेरा नाम विषका है," वह ठंडी आवाज़ में बोली।

"नहीं... तुम रूचिका हो! हम दोनों प्रगति कॉलेज में थे... हॉस्टल की वो छोटी बालकनी... तुम्हारे जोक्स... याद है?"

आद्या की आँखें भीग गईं।

लेकिन "विषका" ने सिर झुकाया,

"माफ कीजिए, आप मुझे किसी और समझ रही हैं। नागराजपुत्र आपका इंतजार कर रहे हैं।"

यह कहकर वह झुकी, प्रणाम किया... और ठंडी हवा की तरह बाहर निकल गई।

"विषका..." आद्या ने नाक सिकोड़ते हुए बुदबुदाते हुए विराट के कमरे की ओर बढी,

"विषका, छी कितना ज़हरीला नाम है। और अगर मैं उस नाग से शादी करूँगी, तो मेरी ज़िंदगी भी इतनी ही ज़हरीली होगी।"

वह आगे बढ़ी ही थी कि अचानक टकरा गई — सामने विराट था। विराट की मुस्कान सर्प के फन जैसी थी।

"जब विवाह नागधरा के सबसे शक्तिशाली नाग से हो रहा हो... तो विष से डर कैसा, भावी नागरानी?" वह मुस्कराता हुआ अपने कक्ष की ओर बढ़ गया।

"भावी नागरानी" शब्द आद्या को भीतर तक चीर गया। वह तेज़ी से उसके पीछे चली गई।

विराट का कक्ष — रेशमी परदे, सांपों के चित्र, और विष की सी गंध।

"आपने बुलाया?" उसने चेहरे पर झूठी मुस्कान लाते हुए कहा।

विराट ने उसका हाथ थामना चाहा —लेकिन आद्या ने तुरंत पीछे खींच लिया।

वह फिर भी मुस्कराया, और जबरन उसका हाथ पकड़ लिया — "नागधरा की नाग कन्याएं क्या जानें, तुम्हारा सौंदर्य कुछ और ही है।"

आद्या ने आँखें बंद कीं, गहरी साँस ली और बोली — "शक्ति से संपन्न नाग, सिर्फ सुंदरता पर रीझे — कितना अद्भुत है यह शासन!"

विराट हँस पड़ा — "बस तुम्हारी यही बातें पसंद हैं मुझे। तुम्हारी जुबां, तुम्हारा विद्रोह... यही सब जीवन भर साथ चाहिए।"

"मैं नागिन नहीं हूँ। इंसान हूँ। क्या यह जानकर भी मुझसे विवाह करेंगे?"

अब चौंकने की बारी विराट की थी।

एक पल को उसकी आँखें डगमगाईं, फिर उसने स्वर साधा —"तुम एक खोई हुई नागशक्ति वाली हो। मुझसे विवाह करोगी, तो तुम्हारी शक्ति लौट आएगी। हम दोनों मिलकर शासक बनेंगे — नागधरा के राजा और रानी।"

"बस यही बोलना था आपको?" उसने कहा और मुड़ी।

"मैं चाहता हूँ हम थोड़ा समय साथ बिताएं। ताकि हम दोनों एक दूसरे को समझ सके।."

"आप मुझे समझ सकें? नामुमकिन। और जितना मैं आपको समझ रही हूँ... विवाह उतना ही असंभव होता जा रहा है।"

वह रुक गई, गहरी साँस ली —"मैं अब लौटती हूँ।"

जैसे ही वह बाहर निकली, विराट मुस्कराया,

"रुकना तो तुम्हें पड़ेगा... हमेशा के लिए।"

---

ठीक उसी समय एक सेवक आया —"महाराज, वनधरा से कोई दूत आया है।"

"भीतर भेजो।"

अंदर आया एक अधेड़ नागमानव — गहरी भूरी नागपूंछ, चेहरा धूप से झुलसा, आँखों में थकान।

विराट मुस्कराया —"वाह... विराट के जादू को कोई काट जाए — कमाल है। इस बार सफल रहे रूप बदलने में?"

उसकी आँखों में नीली चमक दौड़ी और दूत का चेहरा बदल गया "अतुल्य!"

एक क्षण में सैनिकों ने चारों ओर से घेर लिया।

विराट ठहाका मारकर हँसा —"मेरी शक्ति ने आज तक किसी से धोखा नहीं खाया। सिर्फ एक को छोड़कर — तुम्हारी बहन।"

वह आगे झुका — "पता चल जाए उसने कौन सी विधि अपनाई है कि मैं उसे पहचान नहीं पा रहा...तो अगला शिकार वही होगी।" उसकी आँखों में जहर टपकने लगा।

"ले जाओ इसे — बंदीगृह में डाल दो।"

......

1. क्या विराट अतुल्य को मार देगा?

2. क्या सच में नाग रानी मदद करेगी?

3. विराट जैसे शक्तिशाली नाग से आद्या लड़ पाएगी।

जानने के लिए पढ़ते रहिए "विषैला इश्क"।