झग्गू पत्रकार - 6 Deepak Bundela Arymoulik द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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झग्गू पत्रकार - 6

झग्गू जी की उंगलियाँ की-बोर्ड पर फड़फड़ाईं और स्क्रीन पर चमका:

एक्सक्लूसिव खबर!

कॉलोनी के साया का सच!

साया कोई भूत नहीं!

फिर कौन हैं वो साया..? 

जैसे ही व्हाट्सऐप ग्रुप पर खबर गई कॉलोनी में भूचाल आ गया कॉलोनी वासियों के व्हाट्सप्प ग्रुप में मैसेजों की बाढ़ आ गई।

अंकल:- “लो भई! अब ये खबर अब तो वेदम हो गई।”

आंटी:- “अरे! ज़रूर कुछ तो गड़बड़ है।”

लड़का:-“जो भी हो कुछ तो मसाला मिलेगा।”

मोहतरमा का घर

मोहतरमा के घर के बाहर अब जिज्ञासु महिलाओं की छोटी-सी भीड़ खड़ी।

1.“बहनजी, कॉफी पी रहे थे या पुराने किस्से सुना रहे थे?”

2.“वो बालकनी में इतनी देर खड़े क्यों थे?”

मोहतरमा खीझकर बोलीं:–“बस करो! झग्गू जी ने तो जीना हराम कर दिया है।”

पति ने आँखें तरेरते हुए कहा:–“मैंने कहा था न, ये FB न्यूज़ वाला एक दिन पूरी कॉलोनी को बर्बादी कर देगा।”

यहां पप्पू नाई की दुकान पर बहस चल रही थी

बुजुर्ग कस्टमर:-“तो पप्पू, अब तू क्या कहता है?”

पप्पू:-“चच्चा आपको पता हैं झग्गू जी ने फिर बम फोड़ दिया, पर इतना तय है कि मोहल्ला अब चैन से नहीं रहेगा।”

दूसरा ग्राहक:- "पप्पू, तू दाढ़ी बना, और थोड़ा मुंह कम चला तेरे जैसा फालतू नही हैं हम तू भी कोई वेबजह बजने वाले भोपू से कम थोड़े ही हैं.

मौजूद अन्य लोग भी हसने लगते हैं पप्पू समझ जाता हैं पुराने चावल हैं ये नहीं समझेंगे.

तभी फिर ग्रुप में एक sms टपका

“लोग मुझे बुरा भला कहे या गाली दें, लेकिन FB न्यूज़ सच्चाई दिखाता रहेगा। कल का सच और बड़ा होगा। जुड़े रहिए FB न्यूज़ पर!”

कॉलोनी में बेचैनी फिर बढ़ गई, कोई छत पर जाकर झाँकता, कोई पड़ोस की खिड़की से फोटो लेने की कोशिश करता, वही जो बुजुर्ग दिन भर अख़बार चाटते थे वे अब अख़बार छोड़कर FB न्यूज़ फोन में स्क्रॉल करने में लगे थे.

रात होते ही एक और अपडेट आया-“कल सुबह 7 बजे FB न्यूज़ खोलेगा साया प्रकरण की सबसे बड़ी गुत्थी।
तब तक शुभरात्रि।"

और इसके साथ ही कॉलोनी भर के लोग करवटें बदलते हुए सोए, ये सोचते हुए—
“कल झग्गू जी क्या नया बम फोड़ेंगे?”

सुबह होते ही झग्गू जी ने फिर ब्रेकिंग का बम फोडा

“एक्सक्लूसिव! मोहतरमा की बालकनी में दिखा रहस्यमयी शख़्स पुराना कॉलेज-फ्रेंड निकला। क्या ये दोस्ती भर है या कुछ और? जुड़े रहिए FB न्यूज़ पर!”

रिटायर्ड मास्टरजी-“लो भई, आजकल के जमाने में "दोस्ती" का मतलब वही नहीं रहा जो हमारे जमाने में था। हम तो अपनी क्लास की लड़कियों से बात करने में भी हिचकिचाते थे।”

आंटी (सदा जिज्ञासु):-“अरे मास्टरजी, आपकी पीढ़ी तो अलग थी। अब ज़माना खुला है। लेकिन शादी के बाद पुराने फ्रेंड्स से मिलना... वो भी रात को? कुछ तो खिचड़ी पक ही रही होंगी।”

 फुटबॉल गैंग के लड़के:- लड़कियां भी शर्मा गई इनकी ऐसी हरकतों को देखके जब से ये खबर चली हैं एक भी नजर नहीं आ रही हैं.

 बुजुर्ग आंटी:-“वही तो म्हारे जमाने में तो परदे का इतना लिहाज था कि खिड़की से भी झाँकना बुरा समझा जाता। आजकल की औरतों को देखो, बालकनी में रात को खड़ी हैं और मोहल्ला में हल्ला कर रही है।”

इधर मोहतरमा के घर के बाहर

1. पड़ोसन:-“बहनजी, इतना गुस्सा क्यों हो रही हो? अगर सच्चाई साफ है तो डर कैसा?”

 मोहतरमा (खीझते हुए):-“मुझे किसी को सफाई नहीं देनी। ये सब झग्गू जी का किया कराया है। कॉलेज का दोस्त आया था, तो क्या उसमें भी गुनाह है?”

पति (दबी आवाज़ में):-“गुनाह नहीं है पर वक्त देखो! रात को आने की क्या ज़रूरत थी? अब लोग तो बातें करेंगे ही।”

2.पड़ोसन:-“भैया सही कह रहे हैं, बहन जी। अब मोहल्ले का ताना-वाना तो सुनना और झेलना ही पड़ेगा।”

पप्पू नाई की दुकान पर

1. ग्राहक:-“पप्पू, बताओ तो, झग्गू जी ने सच पकड़ा है या हवा बना रहे हैं?”

पप्पू (हाथ चलाते हुए):-“देखो भैया, ये तो पत्रकार का काम है 'नमक-मिर्च' के बिना उनकी न्यूज़ कैसे बनेगी? लेकिन मानना पड़ेगा, झग्गू जी ने सबको टीवी छोड़कर FB पर बाँध लिया।”

2.ग्राहक-“सच तो ये है कि अगर औरत ज़रा भी हंसी-ठिठोली करे तो मोहल्ला झग्गू जैसे पत्रकार को ही नहीं, पूरे सोशल मीडिया को मसाला दे देता है।”

3. ग्राहक- (बाल कटवाते हुए):-“अरे भाई, अगर ये दोस्त है तो खुलेआम मिलते। ये रात-बिरात बालकनी में क्यों?”

पप्पू (हँसते हुए):-“बस यही तो ड्रामा है। मोहल्ले की खबरें ही मोहल्ले को ज़िंदा रखती हैं वार्ना कौन किसको पूछता हैं।”

उधर C ब्लॉक की छत पर

1. लड़का:-“ रात को मैंने खुद देखा था, वो साया पतला-सा था, लंबा भी। झग्गू अंकल जी झूठ नहीं बोल रहें हैं।”

2.लड़का:-“अरे जा वे तू सपना देख रहा होगा दिन में अकेले जाने में तो तेरी फटती हैं रात में कैसे देख लिया

1. लड़का:- मां कसम सच में मैंने देखा था.

3. लड़का:- हो सकता है कोई डिलीवरी बॉय हो।”

4. लड़का:-3 (हँसते हुए):-“डिलीवरी बॉय बालकनी पर चढ़ गया था क्या?”

(सब हँसने लगते हैं।)

इधर झग्गू जी FB पर लाइव टेलीकास्ट हो चुके थे झुंझलाते हुए बोल रहें थे

झग्गू:-“कॉलोनी के लोग कह रहे हैं कि मैं हवा बना रहा हूँ। सुन लो सब! अगर मैं हवा बनाऊँ तो ये आग कैसे सुलगे? आग तभी लगती है जब चिंगारी सच में हो। और FB न्यूज़ वही चिंगारी है जो लोग कहते हैं कि झग्गू झूठा है वो लोग याद रखें, मैं वही दिखाता हूँ जो आप लोग देखना चाहते हैं. अगर साया था, तो सच भी है. बस सब्र रखो।”

क्रमशः----