तेरे मेरे दरमियाँ - 9 Neetu Suthar द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तेरे मेरे दरमियाँ - 9



🌸 तेरे मेरे दरमियाँ – एपिसोड 9

“जब अपने ही सवाल करने लगें…”




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"रिश्ते जब दिल से निकलकर समाज की नज़रों में आते हैं,
तो उन्हें सिर्फ निभाना नहीं, बल्कि साबित भी करना पड़ता है..."


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📰 सीन: कॉलेज मैगज़ीन का पब्लिकेशन – सुबह 9:00 बजे

कॉलेज के हर कोने में बस एक ही तस्वीर छपी हुई थी —
आरव और संजना की।

कॉलेज मैगज़ीन के कवर पर उनका इंटरव्यू और फोटो दोनों मौजूद थे।
टाइटल था:

> "हमने मोहब्बत को इज़्ज़त से जिया है — नज़रों से नहीं छिपाया"



कुछ लोगों ने तारीफ़ की, कुछ ने तालियाँ बजाईं…
लेकिन कुछ चेहरों पर अब भी सवाल थे।


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📞 सीन: संजना का फ़ोन – घर से कॉल

"तुम्हें थोड़ी भी शर्म नहीं है क्या?
तुम्हारी मम्मी की सहेलियाँ कॉल करके पूछ रही हैं कि क्या तुम्हारी बेटी हीरोइन बन गई है?"
पापा की आवाज़ गुस्से से काँप रही थी।

"पापा… वो कोई फोटोग्राफी का प्रोजेक्ट नहीं था,
वो मेरी सच्चाई थी। मैं झूठ नहीं जी सकती।"

"पर तू ये सब कॉलेज में क्यों कर रही है?
तुझे पढ़ाई करनी है, ये सब इश्क़-विश्क नहीं।
लड़कों की दुनिया अलग होती है… और लड़कियों की…"

संजना चुप थी। उसके कान सुन रहे थे, पर दिल काँप रहा था।

"पापा, मुझे सिर्फ इतना कहने दीजिए —
मैं किसी की बदनामी नहीं कर रही, बस अपने रिश्ते को छिपा नहीं रही।"


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🏠 सीन: आरव का घर – शाम 6:00

आरव की माँ चुपचाप टीवी देख रही थीं, लेकिन नज़रें स्क्रीन पर नहीं थीं।

"माँ… कुछ कहना चाहती हैं?"

"तुम्हें नहीं लगता कि ये सब थोड़ा ज़्यादा हो रहा है?
सबके सामने अपनी मोहब्बत दिखाना… क्या ज़रूरी था?"

"माँ, आप ही ने कहा था — अगर कोई लड़की मुझे बेहतर बना रही है,
तो वो मेरी सच्चाई है। अब अगर मैं अपनी सच्चाई से शर्माऊँ,
तो फिर क्या बचा?"

माँ ने धीरे से पूछा —

"क्या वो लड़की इस रिश्ते के लिए सब कुछ झेल सकती है?"

आरव ने बिना रुके कहा —
"उसने पहले से ही बहुत कुछ झेला है माँ…
अब मैं उसकी ढाल बनना चाहता हूँ।"


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📚 सीन: कॉलेज – अगले दिन

आरव और संजना को एक लेक्चर के बाद प्रोफेसर ने रोका।

"यू दोनों अच्छे स्टूडेंट्स हो, लेकिन अब नाम के आगे बदनामी जुड़ रही है।
डिग्रियाँ सिर्फ मार्क्स से नहीं, छवि से भी मिलती हैं।"

संजना ने गहरी साँस ली।

"सर, अगर एक लड़की और लड़का साथ पढ़ें, साथ काम करें,
तो क्या वो सिर्फ तभी अच्छे माने जाते हैं जब उनके बीच कुछ न हो?"

प्रोफेसर चुप रह गए।


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🧠 सीन: संजना की डायरी – रात 11:00 बजे

"मैं थक गई हूँ हर जगह सफाई देते-देते…
मैंने किसी का नुकसान नहीं किया।
मैं बस उस इंसान के साथ हूँ जो मेरे लिए वजूद से भी बढ़कर है।
तो फिर क्यों हर सवाल मेरी ओर आता है?"


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📸 सीन: इंस्टाग्राम लाइव – आरव का फैसला

रात 11:30 बजे, आरव ने लाइव आकर कहा:

"मैं जानता हूँ कि बहुत लोग हमारी तस्वीरों पर, हमारी बातों पर हँसते हैं…
पर उन लोगों से एक सवाल है —
जब हम किसी को सच्चा प्यार करते हैं,
तो क्या उसका साथ देना गुनाह हो जाता है?"

"मैं आरव, खुले तौर पर कहता हूँ —
संजना मेरी मोहब्बत है, मेरी प्रेरणा है।
अगर ये किसी की सोच को हिला रहा है,
तो वो सोच बदलने का वक्त आ गया है।"

हज़ारों लोग लाइव में जुड़ चुके थे। कमेंट्स आ रहे थे:

🌟 “Respect bro!”
🌸 “This is real love!”
💬 “दिल जीत लिया आरव!”


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🌄 सीन: अगली सुबह – संजना की माँ का कॉल

"बेटा…"
"माँ?"

"तेरे पापा अब भी नाराज़ हैं, लेकिन मैंने वो लाइव देखा।
मैंने तुझे मुस्कराते हुए देखा, पहली बार इतनी सच्ची मुस्कान थी…
अगर तू खुश है, तो मुझे कोई शिकायत नहीं।"

संजना की आँखों से आंसू बह निकले।

"माँ, मैं सिर्फ एक प्यार कर रही हूँ…
कोई गलती नहीं।"


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🏫 सीन: कॉलेज डायरेक्टर – दोबारा मुलाक़ात

"आप दोनों ने फिर से सोशल मीडिया पर कॉलेज का नाम जोड़ा है।"

आरव शांत था।

"इस बार हमने कोई अफ़वाह नहीं उड़ाई,
हमने सच बोला है।
अब ये कॉलेज पर है — वो सच्चाई के साथ है या सच्चाई से डरता है।"

डायरेक्टर ने सिर झुकाया।

"हम आपको बुरा नहीं समझते…
बस इतना कह सकते हैं कि आप दोनों अब रोल मॉडल बन चुके हैं —
तो हर कदम सोच-समझकर रखिएगा।"


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🌠 सीन: कॉलेज छत – वही पुराना कोना

आरव और संजना खामोश बैठे थे।

"शायद ये रिश्ता अब सच से आगे बढ़ गया है…"
आरव ने कहा।

"हां… अब ये सिर्फ 'हम' नहीं रहा —
अब इसमें ‘हमारी लड़ाई’ भी जुड़ गई है।"

"तो क्या तुम तैयार हो इस रिश्ते को अगले पड़ाव तक ले जाने के लिए?"

संजना ने उसकी तरफ देखा।

"अगर तुम हो… तो मैं हर पड़ाव पर चलने को तैयार हूँ।"


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💍 सीन: एक सरप्राइज़ – संजना की बर्थडे पार्टी

हॉस्टल में दोस्तों ने मिलकर पार्टी रखी थी।

और तभी लाइट बंद हुई।
स्पॉटलाइट में आरव आया, और सबके सामने घुटनों के बल बैठ गया।

"मैंने तुम्हें दोस्त समझा, फिर साथी… फिर मोहब्बत…
अब मैं चाहता हूँ कि तुम मेरी ज़िंदगी बन जाओ।
संजना, क्या तुम हमेशा के लिए मेरी हो जाओगी?"

पूरी भीड़ शांत थी।

संजना की आँखें भर आईं।

"हाँ आरव… मैं पहले से ही तुम्हारी थी, बस नाम बाकी था।"


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🔚 एपिसोड 9 समाप्त


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🔔 अगले एपिसोड में:

परिवार की बातचीत, रिश्ते का सामाजिक दबाव और भविष्य के फैसले —
क्या मोहब्बत अब शादी के रास्ते पर कदम रखेगी?
या फिर एक नया इम्तिहान आएगा?


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