इश्क और अश्क - 23 Aradhana द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

इश्क और अश्क - 23


चारों तरफ सितारों वाली लाइट, फूलों और प्रणाली की पेंटिंग से भरा वो कमरा, फूल उसकी राहों में... एक टेबल।

एवी: मैं चाहता हूं जितना प्यार मैं तुमसे करता हूं, उतना ही तुम भी करो।

रात्रि मुस्कुराई: तुम मेरी जिंदगी की वो पहेली थे जिसे सुलझाने के लिए मैं किसी भी हद तक जा सकती थी और अब वो पहेली सुलझ गई है, तो इसके आगे मैं कुछ नहीं चाहती।

एवी: क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?

रात्रि को कुछ समझ नहीं आया...

एवी: इतना परेशान मत हो, सोच कर जवाब देना। मैं वेट करूंगा।

रात्रि सोचने लगी: कहाँ मिलेगा इतना समझने वाला पार्टनर... उसने अपनी आंखें बंद की तो उसे कल की अपनी और अगस्त्य की नज़दीकियां याद आ गईं, उसने झटके से आंखें खोल लीं: मैं ये सब क्या सोच रही हूं!

एवी: चलो ब्रंच करते हैं।

रात्रि: हम्म...

दोनों उसी रूम में ब्रंच कर रहे हैं।

रात्रि: तुम्हें पता है कल मैंने एक सपना देखा... उसमें मैंने और तुमने एकदम सादे कपड़े पहन रखे थे, तुमने मेरी जान बचाई और तुम्हारे हाथ से खून आ रहा था... और तुम मुझे फूल बेचने वाली बोल रहे थे। वो तुम ही थे न?

एवी को खाने का धक्का लगा, वो खांसने लगा।

रात्रि: अरे क्या हुआ... ये लो पानी पियो...

एवी अपने होश संभालते हुए बोला: हां... मैं ही था और कौन होगा...

तभी एवी का फोन बजा।

एवी: थैंक गॉड, इस कॉल ने बचा लिया...!

कॉल पिक: हेलो...!

ये डायरेक्टर का कॉल था।

डायरेक्टर: हेलो एवी, आज शाम को ही शूटिंग के लिए निकलना है, सारे एक्टर्स की डेट्स खत्म हो रही हैं।

एवी: पर मेरे फेस पर तो...

डायरेक्टर: वो सब हम संभाल लेंगे, डोंट वरी।

एवी: ओके!

कॉल कट

रात्रि: क्या हुआ?

एवी: कुछ नहीं... शूटिंग के लिए निकलना है।

रात्रि: ओह!


---

दूसरी तरफ

अगस्त्य अपना सिर पकड़ते हुए उठ रहा है, उसका सिर इतना भारी है कि दर्द के मारे फटा जा रहा है...

अगस्त्य आंखें मिचमिचाते हुए और सिर को पकड़े हुए: उफ्फ... इतना दर्द... अरे कोई हैंगओवर के लिए कुछ लाओ।

तभी एक नींबू पानी का ग्लास और एक गोली आगे आई।

अगस्त्य: थैंक यू सो मच, I need it.

अर्जुन: Your most welcome, भाई...

अगस्त्य ने नजर ऊपर की... ये तो अर्जुन है।

अर्जुन: शूटिंग के लिए जा रहा था तो सोचा कि आपको हैंगओवर के लिए कुछ देता चलूं।

अगस्त्य सिप सिप करके नींबू पानी पी रहा है...

अर्जुन: भाई, आप रात्रि से प्यार करते हो ना?

अगस्त्य के मुंह से सारा नींबू पानी अर्जुन के मुंह पर जा गिरा। अर्जुन शॉक्ड रह गया और अब जूस बूंद-बूंद करके उसके चेहरे से टपक रहा है।

अगस्त्य: ओह शिट... सॉरी सॉरी सॉरी... (उसने टिशू लिया और उसके मुंह पर चिपका दिया) ले, साफ कर...

अर्जुन के पास शब्द नहीं हैं, पर अब बस वो खुद को अजीब से नज़रों से देख रहा है, सब चिपचिपा हो गया।

अर्जुन साफ करते हुए: ऐसा क्या बोल दिया मैंने...?

अगस्त्य: तू पागल है क्या? मैं और वो...? कभी नहीं।

अर्जुन: अच्छा... तो ये चोट कैसे लगी...? जवाब मुझे नहीं, खुद को देना। मैं चला।

अर्जुन जाने लगा और जाते-जाते बोला: वैसे कल नशे की हालत में भी आप उसी का नाम ले रहे थे।

अगस्त्य चिढ़ गया: तू जा रहा है या नहीं?

अर्जुन भोले से लहजे में: जा तो रहा हूं।

जाते-जाते अर्जुन नटखट आवाज में: हम्म... हम्म... हम्म... हम्म...

अगस्त्य: मैंने सुन लिया...

अर्जुन: सुनने के लिए ही बोला था।

वो चला गया।

अगस्त्य खुद से: क्या सच में, मैं उसका नाम ले रहा था...? नहीं, ऐसा नहीं होगा।


---

दूसरी तरफ

रात्रि घर पहुंची और घर पर उसके नाम का एक पार्सल आया हुआ था। उसने उसे ओपन किया, उसमें कुछ डॉक्यूमेंट्स थे। उसने उन्हें देखा तो उसके होश उड़ गए।

उसने तुरंत अर्जुन को फोन किया।

रात्रि गुस्से में: हेलो अर्जुन... तुम्हारे भाई ने ये बिल्कुल ठीक नहीं किया, ये उसे बहुत महंगा पड़ेगा।

और कॉल काट दी।

अर्जुन: इस लड़की का सच में कोई पेंच ढीला है क्या... और अब क्या कर दिया भाई ने... हे भगवान... या तो इन दोनों को अक़्ल दे दे या मुझे भी ऊपर बुला ले... दोनों मिलें, इनकी फिल्म देखेंगे।


---

कुछ देर में सब ऑफिस पहुंचे, जहां से उन्हें एक साथ शूटिंग के लिए निकलना था। सब वहां इकट्ठा थे, अगस्त्य भी, पर अगस्त्य वहां जाने वाला नहीं था क्योंकि उसने अर्जुन को बोला था कि वो अब इस मूवी का हिस्सा नहीं रहेगा।

डायरेक्टर: सब आ गए हैं तो निकलें?

अर्जुन: अभी रात्रि नहीं आई, हम थोड़ा वेट करेंगे।

अर्जुन अगस्त्य के पास गया और बोला: भाई अब आपने क्या कर दिया... मुझे पता है ये आपका ही किया धरा है।

अगस्त्य: मैंने कुछ नहीं किया। तू अपनी फिल्म पर ध्यान दे, मेरी फिल्म बनाने की कोशिश मत कर।

तभी रात्रि गेट से एंट्री करते हुए दिखती है।

डायरेक्टर: चलो, मिस रात्रि भी आ गईं। अब चलते हैं।

रात्रि बिना कुछ सुने चली आ रही है और सबको इग्नोर करके सबसे पीछे खड़े अगस्त्य की तरफ बढ़ रही है। उसकी आंखों में बहुत गुस्सा है। वह अगस्त्य के पास पहुंची और बोलने लगी:

रात्रि: तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है, दिक्कत क्या है मुझसे...? क्या मैं तुम्हें इतनी बुरी लगती हूं कि तुम इतना सब कुछ करने पर मजबूर हो गए? पहले वो फाइट वाला कांड और अब...

अगस्त्य शांति से बोला: हो गया? अब बताओगी कि हुआ क्या है... या बस मुझे देखना चाहती हो...?

रात्रि ने वो सारे पेपर्स अगस्त्य के मुंह पर फेंके और बोली: ये कॉन्ट्रैक्ट कैंसिलेशन के पेपर्स हैं जो तुमने भेजे हैं... तुम होते कौन हो मुझे इस प्रोजेक्ट से निकालने वाले?

ये देख कर वहां खड़े हर इंसान के होश उड़ गए कि रात्रि ऐसे अगस्त्य के मुंह पर पेपर फेंक सकती है।


---