पहली नज़र की खामोशी - 9 Mehul Pasaya द्वारा कुछ भी में हिंदी पीडीएफ

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पहली नज़र की खामोशी - 9


☕ एपिसोड 9 – जब चाय इकरार बन जाए




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1. एक धीमी सुबह – बुखार के बाद की राहत

नैना की आँखें सुबह देर से खुलीं।
आरव उसकी बगल में नहीं था,
लेकिन रसोई से चाय की हल्की-सी सौंधी खुशबू आ रही थी।

वो धीरे से बिस्तर से उठी,
बिना कुछ कहे रसोई तक पहुँची।

आरव ने बिना पीछे देखे कहा:

"अदरक कम, तुलसी ज़्यादा — तुम्हारी पसंद।
बैठो, मैं चाय लाता हूँ।"

नैना मुस्कुराई —
उसने पहली बार किसी ने उसकी पसंद बिना कहे समझी थी।


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2. चाय और खामोश बातें

टेबल पर दो प्यालियाँ चाय रखी थीं।
आरव ने नैना के सामने एक स्केच बुक रख दी।

"ये मेरा इकरार है — पेंसिल से, शब्दों से नहीं।"

नैना ने पन्ने पलटने शुरू किए।

हर पेज पर एक चेहरा था —
कभी उदास, कभी मुस्कुराता,
कभी चुपचाप…
और हर चेहरा — नैना का था।


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3. एक स्केच – जो बाकी सबसे अलग था

नैना का हाथ रुक गया —
एक स्केच पर उसकी आँखें ठहर गईं।

उस चित्र में नैना आरव के कंधे पर सिर रखे बैठी थी —
ठीक वैसे ही जैसे पिछली रात हुआ था।

उस चित्र के नीचे सिर्फ दो शब्द थे:

> “चुप्पी की बाँहों में।”



नैना ने बिना कुछ कहे स्केच बुक बंद कर दी,
और धीरे से अपनी डायरी टेबल पर रख दी।


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4. नैना की डायरी – टूटी पंक्तियों का प्रेम

आरव ने डायरी खोली।

पहला पन्ना:

> “किसी दिन कोई आएगा,
मेरी अधूरी कविताओं को समझेगा।
और मेरे मौन को पढ़ेगा
जैसे वो कोई किताब हो।”



दूसरा पन्ना:

> “मैंने कभी किसी को अपना दिल नहीं दिया।
डर था, कि अगर उसने रख लिया
तो शायद वापस ना करे।
पर अब... लगता है, कोई है जो लौटाने नहीं,
सहेजने आया है।”




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5. जब इकरार बिना बोले हो

आरव ने नैना का हाथ पकड़ा —
कोई ज़ोर नहीं, कोई ज़िद नहीं।

बस एक पकड़,
जैसे कोई पूछे —
"क्या मैं रह सकता हूँ?"

नैना ने सिर हिलाया —
ना ‘हाँ’, ना ‘ना’।

बस उसकी उंगलियाँ आरव की उँगलियों से उलझ गईं।


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6. चाय की आखिरी घूँट – और पहला हल्का चुंबन

आरव ने अपनी चाय खत्म की।

नैना अभी भी आधी प्याली के साथ खेल रही थी।

"चाय खत्म करोगी?"

नैना ने कहा:

"अगर तुम कहो तो..."

आरव ने प्याली उसके होंठों तक ले जाकर थाम ली —
हल्के से, धीरे से।

नैना ने चाय की आखिरी घूँट पी,
और जैसे ही प्याली नीचे रखी,
आरव ने उसके गाल पर हल्का चुंबन दिया।

ना योजनाबद्ध, ना रोमांटिक फिल्मों जैसा।

बस एक अहसास —
"अब तुम मेरी हो।"


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7. बाहर की हवा – और भीतर का सुकून

दोनों बालकनी में आए।
हवा ठंडी थी, लेकिन अब डर नहीं था।

आरव ने नैना के कान के पास फुसफुसाया:

"तुम्हारी खामोशी सबसे खूबसूरत आवाज़ है,
और अब मैं उसमें अपना घर ढूँढता हूँ।"

नैना ने धीमे से उसकी बाँह में अपना हाथ डाल लिया।


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8. नैना की डायरी की आखिरी लाइन आज जोड़ी गई

> “जिस दिन किसी ने मेरे बिना बोले समझ लिया,
उस दिन मैं ‘हाँ’ नहीं कहूँगी…
मैं बस उसकी चाय खत्म करूँगी।”




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🔚 एपिसोड 9 समाप्त – जब चाय इकरार बन जाए