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तेरा इंतकाम, मेरा इश्क़ - एक अनसुनी मोहब्बत की सीरीज - 4

"तेरा इंतकाम, मेरा इश्क़" – एक अनसुनी मोहब्बत की सीरीज

🩸 एपिसोड 4: मौत की देहरी पर मोहब्बत

पिसोड 4: मौत की देहरी पर मोहब्बत

🚑 2:45 AM – सिटी हॉस्पिटल, इमरजेंसी वॉर्ड
काव्या ICU में थी।
बॉडी से ब्लड निकला जा रहा था, हार्ट रेट गिर रही थी।
डॉक्टर्स ने तुरंत कहा —

🩺 "ब्लड ग्रुप AB- है, रेयर केस है, तुरंत डोनर की ज़रूरत है!"
बाहर बैठा शिवाय (आर्यन) सब कुछ सुन रहा था, मुँह से कोई आवाज़ नहीं, बस आंखों से आग और दर्द बह रहा था।


👨‍⚕️ नर्स ने पूछा,
"आप डोनर हैं?"

🧔‍♂️ आर्यन ने सिर्फ़ सिर हिलाया और बोला:

"उसने मेरा खून पहले भी अपने दिल में बहाया है… अब दोबारा बहा लेने दो।”

💉 ब्लड डोनेशन रूम – एक सन्नाटा
शिवाय का ब्लड बह रहा था, और उसके होंठ बुदबुदा रहे थे:

"मैंने दुनिया से बदला लिया… अब तेरे लिए खुद से भी ले लूंगा। बस तू एक बार फिर से 'काव्या' बन जा..."

🌄 सुबह – ICU में पहली हलचल
काव्या की उंगलियों में हरकत हुई।

मशीनों की बीप फिर से तेज़ हो गई।
डॉक्टर्स दौड़े, एक-दूसरे को देखा — और मुस्कुरा दिए।

🩺 "She’s stable now!"
शिवाय बाहर खड़ा था, दीवार से लगकर। जब उसने यह सुना… उसकी आंखों में पहली बार आंसू खुशी के थे।


🧍‍♂️ लेकिन तभी…
📢 टीवी पर न्यूज फ्लैश आया:

🗞️ “भोपाल पुलिस ने जारी की ‘शिवाय राठौर’ की फोटो — 3 मर्डर केस में Most Wanted।”
📸 और वो फोटो ICU के बाहर लगे टीवी पर भी थी।
👮‍♂️ पुलिस हॉस्पिटल में आ चुकी थी।


⚡ डॉक्टर का इशारा – "भागो..."
👨‍⚕️ डॉक्टर ने धीमे से कहा:
"जिसने तुम्हारा खून दिया… वो अब इस शहर का क़ातिल है। अगर तुम बची रहना चाहती हो, तो उससे दूर रहो।"
लेकिन काव्या मुस्कुराई।
"उसने मुझे ज़िन्दगी दी है... दुनिया चाहे जो कहे, मैं उसके साथ खड़ी रहूंगी।"


🔥 हॉस्पिटल के पिछले रास्ते – भागता आर्यन
जैसे ही पुलिस पहुंची — शिवाय पिछली खिड़की से निकल चुका था।
हाथ पर पट्टी थी, पर उसकी चाल में रुकावट नहीं।

वो कहीं दूर जा रहा था… लेकिन पहली बार उसके दिल में मौत नहीं, सिर्फ़ काव्या की ज़िन्दगी थी।


🏚️ एक पुराना बंगला – कहानी की गहराई
आर्यन एक पुराने टूटे बंगले में छिपा हुआ था —
दीवारों पर खून से लिखे कुछ नाम थे:

"विक्रम मित्तल"
"राजीव नागर"
"ACP Ajit Khurana"

🤯 ACP???

हां, अगला टारगेट वही था — वही ACP जिसने आस्था का केस फर्जी सबूतों से बंद करवाया था।

📱 तभी फोन बजा — Unknown Number
📲
"अगर तुम इंसान हो, तो वापस आओ आर्यन। वरना पुलिस से पहले मैं पहुंच जाऊंगी — और तुम्हारी आखिरी मोहब्बत बन जाऊंगी।"

— काव्या

😳 एक सन्नाटा…
आर्यन ने पहली बार हथियार गिरा दिया।
आंखें बंद कीं… और खुद से कहा:

"इंतकाम ख़त्म हो गया… अब शायद मोहब्बत की सज़ा शुरू होनी चाहिए।"

🌙 उसी रात – बनारस वापसी
शिवाय यानी आर्यन बनारस लौटा।
वही घाट…
वही मंदिर…
और वहीं खड़ी थी काव्या।

उसके पास गया, आंखों में देख कर बोला —

🧔‍♂️ "मैंने तुझे ज़िन्दा रखने के लिए लोगों को मारा… लेकिन अब अगर तुझे खोया, तो खुद को भी मार दूंगा।"
👩‍🦰 काव्या बोली:
"तो चलो, एक वादा करते हैं — अब न मौत से डरेंगे, न मोहब्बत से पीछे हटेंगे।"

🚨 लेकिन मोहब्बत के अगले मोड़ पर पुलिस थी
जैसे ही दोनों एक-दूसरे के करीब आए —
चारों तरफ से पुलिस ने उन्हें घेर लिया।

ACP खुराना खुद सामने आया और चिल्लाया —

👮‍♂️ "शिवाय राठौर… तुझे न्याय के लिए गिरफ्तार किया जाता है!"
काव्या चीख पड़ी — "नहीं!"
आर्यन ने उसकी आंखों में देखा… और खुद हथकड़ी के लिए हाथ बढ़ा दिया।

"अगर मेरा प्यार सच्चा था… तो इंतकाम भी गलत नहीं था। अब बाकी फैसला तेरी आंखों में देख लूंगा, अदालत से नहीं।"

🛑 एपिसोड 4 समाप्त।

❓अब आगे क्या?
क्या कोर्ट आर्यन को सज़ा देगी?
क्या काव्या अपनी गवाही से सब कुछ बदल सकती है?
क्या इंतकाम अब भी ज़िन्दा रहेगा… या इश्क़ उसे हरा देगा?