महाशक्ति - 26 Mehul Pasaya द्वारा पौराणिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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महाशक्ति - 26

महाशक्ति – एपिसोड 26

"रहस्यमयी द्वार और काल की चाल"

काशी में हलचल बढ़ चुकी थी। मंदिर की दीवारें कंपन कर रही थीं, गंगा की लहरें उग्र हो उठी थीं, और आसमान में अजीब-सी गड़गड़ाहट गूँज रही थी। अर्जुन और अनाया समझ चुके थे कि यह कोई सामान्य घटना नहीं थी—यह एक युद्ध की पूर्व सूचना थी।

वीरभद्र ने अर्जुन की ओर देखा, "समय बहुत कम है, अर्जुन! शिवजी की भविष्यवाणी की पहली परीक्षा यही है कि क्या तुम इस द्वार को पार कर सकते हो।"

अर्जुन ने अपनी मुट्ठी भींच ली। उसे समझ आ गया था कि यह केवल बाहरी शक्ति से पार नहीं होगा। उसे अपने मन की हर शंका, हर डर को खत्म करना होगा।

अनाया ने धीरे से अर्जुन का हाथ पकड़ा, "हम साथ हैं, अर्जुन।"

अर्जुन ने उसकी ओर देखा और एक गहरी सांस ली। उसकी आँखों में अब संकल्प स्पष्ट था।


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द्वार की अग्नि परीक्षा

अर्जुन ने अपनी आँखें बंद कीं और शिवजी का ध्यान करते हुए पुनः द्वार की ओर बढ़ा। इस बार, जब उसने द्वार को छुआ, तो एक दिव्य प्रकाश फैला और वह द्वार धीरे-धीरे खुलने लगा।

जैसे ही द्वार पूरी तरह खुला, अर्जुन और अनाया के सामने एक विशाल गुफा प्रकट हुई। गुफा के भीतर शिवजी की एक प्राचीन मूर्ति थी, जिसके चरणों में एक शिलालेख खुदा हुआ था।

"जो काल को जीतना चाहता है, उसे पहले अपने भय को जीतना होगा।"

अर्जुन ने शिलालेख को पढ़ते ही सिर उठाया।

"यह हमारी अगली परीक्षा है," उसने कहा।

लेकिन तभी, एक तेज गर्जना गूँजी और गुफा के भीतर से एक विशालकाय आकृति प्रकट हुई।


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कालभैरव की परीक्षा

यह कोई और नहीं, बल्कि स्वयं कालभैरव थे—शिवजी के रौद्र रूप। उनकी आँखों में अग्नि थी, उनके हाथ में दंड था, और उनकी उपस्थिति से पूरा वातावरण भयभीत हो उठा।

"कौन है जो इस गुफा में प्रवेश करने का साहस कर रहा है?" कालभैरव की गूँजती हुई आवाज से गुफा काँप उठी।

वीरभद्र पीछे खड़े हुए बोले, "अर्जुन, यही तुम्हारी अगली परीक्षा है।"

अर्जुन ने घुटनों के बल बैठकर कालभैरव को प्रणाम किया, "प्रभु, मैं कोई साधारण योद्धा नहीं। मैं शिवजी की भविष्यवाणी को पूरा करने निकला एक साधारण मानव हूँ, जिसने प्रेम और धर्म के मार्ग को अपनाया है।"

कालभैरव की आँखें और अधिक चमक उठीं। उन्होंने अर्जुन को देखा और पूछा, "यदि तुम प्रेम और धर्म के मार्ग पर हो, तो क्या तुम मृत्यु को स्वीकार कर सकते हो?"

अर्जुन ने बिना किसी डर के उत्तर दिया, "हाँ। यदि मृत्यु भी इस मार्ग का हिस्सा है, तो मैं उसे भी स्वीकार करता हूँ।"

कालभैरव मुस्कुराए। "तो यह परीक्षा पूरी हुई।"

अचानक उनकी आकृति धुएँ में बदल गई और पूरे गुफा में एक दिव्य रोशनी फैल गई।


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कालचक्र का रहस्य

अर्जुन और अनाया आगे बढ़े, तो उन्होंने देखा कि गुफा के अंत में एक जलता हुआ चक्र रखा था।

साधु जो पहले मंदिर के बाहर मिले थे, अब गुफा के द्वार पर खड़े थे। "यह है कालचक्र। यह केवल वही धारण कर सकता है, जो अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को एक साथ स्वीकार कर सके।"

अनाया ने अर्जुन की ओर देखा।

"अर्जुन, यह तुम्हारी परीक्षा है। यदि तुम इसे छूते हो, तो तुम्हारा भाग्य बदल सकता है। लेकिन यदि तुम्हारा मन डगमगाया, तो यह तुम्हें काल के गर्त में ले जाएगा।"

अर्जुन ने बिना हिचकिचाए कालचक्र की ओर हाथ बढ़ाया। जैसे ही उसकी उंगलियाँ चक्र को छूईं, पूरा वातावरण अचानक बदल गया।


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भविष्य की झलक

अर्जुन के सामने दृश्य बदलने लगे। उसने खुद को भविष्य में देखा—एक भयानक युद्ध के मैदान में, जहाँ अनाया घायल अवस्था में पड़ी थी, और उसके सामने एक शक्तिशाली राक्षस खड़ा था।

"नहीं!" अर्जुन चीख पड़ा।

लेकिन दृश्य वहीं समाप्त हो गया।

वह वापस गुफा में आ चुका था, और उसके हाथ में कालचक्र था।

साधु मुस्कुराए। "अब तुम्हें शिवजी की भविष्यवाणी को पूरा करना होगा, अर्जुन। तुमने अपने भविष्य को देख लिया है, लेकिन क्या तुम इसे बदल सकते हो?"

अर्जुन की आँखों में दृढ़ निश्चय था।

"मैं इसे बदलूंगा। किसी भी कीमत पर!"


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अगला क्या होगा?

क्या अर्जुन अपने भविष्य को बदल पाएगा?
क्या शिवजी की भविष्यवाणी पूरी होगी?

(अगले एपिसोड में जारी…!)