चालाक कौवा falguni doshi द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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चालाक कौवा

चालाक कौवा - पंचतंत्र से प्रभावित कहानी जंगल ग्राम - पार्ट 2

कौवा कालू मेहनती कंटेंट क्रिएटर था, जो सच्ची और काम की बातें जंगलग्राम पर पोस्ट करता था। लेकिन जंगल के असली इन्फ्लुएंसर—तोता टिपटिप और बंदर बंटी—बस मनगढ़ंत और मसालेदार बातें डालते थे।

"सुबह सबसे पहले केले का पत्ता खाने से बोलने की ताकत दोगुनी हो जाती है!" – तोता टिपटिप - ऐसी ऐसी तो कितनी ही पोस्ट वायरल हो रखी थी  |

"अगर कोई पेड़ से उल्टा लटक जाए, तो उसकी उम्र बढ़ जाती है!" – बंदर बंटी | बंटी अपनी हर पसंद को किसी फायदे के साथ जोड़ देता था और विडियो तैयार है |


इन फर्जी बातों को जंगल के जानवर आँख मूँदकर मानते थे। उनसे वह चीजे संभव हो या न हो करते रहते थे, अपने बच्चो पर भी अधिक दबाव डालते थे | उन्हें लगता था नहीं तो वे जीवन में पिछड़ जायेंगे |

कालू ने सीधा सच बताने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। उसे समझ आ गया कि लड़ाई सीधे-सीधे नहीं जीती जा सकती—दिमाग से चालाकी करनी होगी।

उसने एक प्लान बनाया।

कालू ने जंगलग्राम पर #GoldenPeacockTrend नाम से एक वीडियो वायरल किया —

"हर दिन नीम के पत्ते चबाने से मोर के पंख सोने जैसे चमकने लगते हैं!"

यह सुनकर जंगल के सभी मोर पागलों की तरह नीम के पत्ते खाने लगे।


तोता टिपटिप और बंदर बंटी को लगा कि यह ट्रेंड सच में वायरल हो रहा है। वे भी इस पर कूद पड़े और वीडियो बनाने लगे—

तोता: "देखो, मैंने खुद नीम के पत्ते खाए, अब मेरे पंख और चमक रहे हैं!"

बंदर: "अगर तुमने यह ट्रेंड फॉलो नहीं किया, तो तुम बहुत पीछे रह जाओगे!"


उनकी पोस्ट जंगलग्राम पर आग की तरह फैल गई।

अब कालू ने अगला वीडियो डाला—

"दोस्तों, पिछले हफ्ते मैंने यह अफवाह फैलाई थी कि नीम के पत्तों से मोर के पंख सोने जैसे हो जाते हैं। यह झूठ था। और देखो, कौन सबसे पहले इस झूठ को सच बताने आ गया?"

उसने तोता और बंदर के वीडियो को साथ में दिखाया। जिस में एडिटिंग से तोते के पंख में सोनेरी रंग भी दिख रहा था | साथ में आज की लाइव विडियो भी डाली |

जंगल के जानवर चौंक गए। वे समझ गए कि ये इन्फ्लुएंसर बिना सोचे-समझे बस वायरल ट्रेंड पकड़ते हैं, चाहे वह सच हो या झूठ।

अब सबने मिलकर तोता और बंदर को अनफॉलो कर दिया। जंगलग्राम पर अब लोग सच्ची और सही बातें जानने लगे।


अब जंगलग्राम पर कंटेंट सिर्फ सच्चे और सही ज्ञान के आधार पर वायरल होता था, न कि बस बेबुनियाद मसालों से!

 

 

 यहाँ दो पंचलाइन हैं, जो कहानी के सार को और दमदार बना देंगी—

1. "सच को बेचने से पहले कभी-कभी उसे भी ट्रेंड बनाना पड़ता है, ताकि झूठे लोग खुद उसमें फँस जाएँ!"


2. "जो बिना सोचे हर ट्रेंड के पीछे भागते हैं, वे कभी सच्चाई तक नहीं पहुँचते—बस भेड़चाल में खो जाते हैं!"

 

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- Falguni Doshi
7/3/2025