इधर उधर की - 2 Kishanlal Sharma द्वारा कुछ भी में हिंदी पीडीएफ

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इधर उधर की - 2

मरुधर एक्सप्रेस के स्टॉपेज है--ईद गाह, अछनेरा, भरतपुर, नदबई,  खेड़ली मंडावर, बांदीकुई

हम सेकंड ac मे बैठ गए थे।बातचीत करने लगें।मुझे DCM साहब के साथ खेड़लीतक जाना था।और विवेक को मंडावर।ट्रेन लेट थी  इसलिए हम करीब12 बजे खेड़ली पहुंचे थे।मैं और DCM महोदय खेड़ली उतर गये थे।हमने खेड़ली स्टेशन का निरीक्षण किया।यात्री सुविधाएं व अन्य चीजों का जायजा लिया।बुकिंग में टिकट आदि स्टॉक व सभी कार्य देखे थे।

दोपहर मे  स्टेशन मास्टर ने  हमारे लिये होटल से खाना मंगाया था।

उन दिनों बांदीकुई से बरेली के बीच सवारी गाड़ी चलती थी।यह ट्रेन कोरोना के दौरान बन्द हुई फिर दुबारा अभी तक नही चली है।यह गाड़ी एक बजे बांदीकुई पहुंचती थी और वहा से 3 बजे वापस चलती थी।इस ट्रेन से सुभाष गुप्ता और विवेक व चेकिंग स्टाफ लौटा था।हम लोग भी इसी से लौटे थे।

यही से मोड़ आया।मैं ,DCM महोदय, विवेक और सुभाष गुप्ता बैठे हुए बात कर रहे थे।चेकिंग स्टाफ दूसरे केबिन में बैठा था।खेड़ली स्टेशन से ट्रेन चलते ही विवेक और सुभाष उठकर चले गए हमने ध्यान नही दिया कुछ ही  देर बाद कोच में शोर होने लगा।एक आदमी बड़बड़ाता हुआ कोच में हल्ला मचाने लगा।DCM मुझसे बोले,"क्या हुआ?"."

मैं सीट से उठते हुए बोलादेखता हूं"

और मैंने पता किया तो मालूम चला।विवेक ने चेकिंग स्टाफ को लेकर कोच में चैकिंग शुरू करा दी थी।एक औरत बिना टिकट थी।वह चलती ट्रेन से कूद गई थी।वह मरी या जिंदा थी पता नही।लेकिन उसके परिचित ने कोच में हंगामा शुरू कर दिया था।मैंने DCM महोदय को सारी बात से अवगत कराते हुए कहा,"क्या आपने चैकिंग करने का आदेश दिया था।

"नहीं।मैं तो तुम्हारे पास ही बैठा हूँ"

"मैने भी नही कहा।"हम दोनों में से किसी ने नही कहा था।विवेक और सुभाष ने ही निर्णय लिया था।

कोच में हो रहे हंगामे के बीच ट्रेन तलचेरा बरौली रान फ्लैग स्टेशन पर रुकी थी यह पैसेंजर ट्रेन थी और हर छोटे बड़े स्टेशन पर रुकती थी।और ट्रेन रुकते ही कुछ लोगो ने हौज पाइप निकाल कर फेंक दिये थे।विवेक का और चैकिंग स्टाफ का पता नहीं था।

मैं और DCM साहब बैठे थे तब कुछ MST वाले हमारे पास  आये और बोले,"इन्होंने फोन कर दिया है।कयकम्म् कुछ देर में गांव से टेक्ट्रो में भर कर लोग आ जायेंगे।आप लोग फोर्स का इन तजम कर  ले।यह लोग गाड़ी नही चलने देगे।

आजकल मोबाइल ऐसा हो गया है कि आप चाहे जहाँ से बात कर सकते है।लेंड लाइन में ऐसा नही होता था।मोबाइल तो जेब मे रखा रहता है

मैं आने वाले खतरे को भांभते हुए DCM साहब से बोला,"

आप सर् पीछे की साइड से गार्ड के पास जाए और बाकी टाकी से बात करे

और मैंने उन्हें गार्ड के पास भेज दिया था।और  कुछ देर बाद गांव से टेक्क्ट्रो मे भरकर लोग आ गए थे।और एक एक करके रेलवे वालो को खींचकर ले जाते और पिटाई शुरू।उनकी नजर में विवेक दोषी था।ट्रेन ऐसे जंगल के स्टेशन पर खड़ी थी जहां पर पुलिस जल्दी भ नही पहुंच सकती थीसऔर एक एक को गांव वाले पकड़कर ले जाते और लठ बरसाते।जब दूर मारा पिटी चल रही थी।तभी अचानक विवेक आ गया।मैं बोला,"तुम कहा थे।तुम्हे वे लोग ढूंढ रहे हैं।तुम एक काम करो पीछे के रास्ते से इंजन में चले जाओ।पर यह दूसरी दिशा मे गए और पकड़े गए।

मेरे पास देवदूत बनकर भरतपुर के 3 लड़के आय।वे बोले,"अंकलजी आप चिता मत करे।आपको कोई हाथ नही लगा सकता और वह मुझे, सुभाष को और सी टी आई को इंज्म में ले गये थे।

जब खेड़ली से यह खबर आ गई कि औरत जिंदा है तब ट्रेन वहा से चली थी।हम लोग उस मंजर से जिंदा लौट आये थे।यह सब पत्नियों का प्रताप था क्योंकि उस दिन करवा चौथ थी।

और ईद गाह आने पर घण्टो इन्क्वायरी

बाद मे रेलवे ने अनुपम सक्सेना के नेतृत्व में उस सेक्शन मे चेकिंग अभियान चलाकर अच्छा सबक सिखाया था