अंधेरा बंगला - 8 Mansi द्वारा क्लासिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • धोखा - 1

    1999 था। गाँव वैशाली की मिट्टी में उस समय भी एक अजीब सी दहशत...

  • त्रिपिंड चित्त-दर्शन

    त्रिपिंड चित्त-दर्शन(The Tri-Pinda Consciousness Model)प्रस्...

  • राहें - 6

    पुत्र सुखमनु खाना खाने बैठा - थाली की सब्जी में बाल उसे फिर...

  • तेरी मेरी खामोशियां। - 15

    सुबह की ताज़ा धूप जब सुल्तान मेंशन के आँगन में उतरी, तो घर मे...

  • WAIT FOR WET - 1

    मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद...

श्रेणी
शेयर करे

अंधेरा बंगला - 8

भाग 8

अब तक आपने देखा कि बंगले का गेट अपने आप खुल गया ओर वह आत्मा बाबा कि को उठा कर ले गई ओर गेट अपने आप फिर से बंध हो गया।

बाबाजी की वह चीख ओर यह भयानक दृश्य देख कर सारे गाव वाले डर से कप कपाने लगे।एक आदमी बोला कितनी खतरनाक आत्मा है , यह बाबा जी को ले कर चली गई ,हम सब खतरे में है यहां रुकना सही नहीं है यहां से जाने मे ही हम सब की भलाई है। तब गुड़िया की मा ने कहा नहीं मे अपनी बच्ची को लिये बगर कहीं नहीं जाऊंगी जब तक वह बाहर नहीं आ जाती मे यही खड़ी रहूंगी। तब एक आदमी ने कहा अरे गुड़िया की अम्मा, बात को समजने की कोशिश करो हमने शायद हमारी गुड़िया को खो दिया है अब कभी वह वापस नहीं आने वाली है ।

तब मंजरी ने कहा आप ऐसा केसे बोल सकते है , मेरे जीने का सहारा ही गुड़िया है उसके अलावा मेरा इस दुनिया मे है ही कोन, उसके बिना जीने के बारे में मे सोच भी नहीं सकती हु , अगर आप सबको डर लग रहा है तो आप सब जा सकते है पर में यहा से कहीं नहीं जाऊंगी बात खतम, तब गाव की सारी औरतें बोलती है मंजरी बहन हम सब तुम्हारे साथ है हम यही खड़े रहेंगे। तब मुख्या जी ने कहा नहीं हम सब मर्द भी यही है हम गुड़िया का इंतज़ार करेंगे।

तब एक ओरत बोलती है इंतज़ार के अलावा हम कुछ नहीं कर सकते है , हम सब ने खुद वह अजीब शक्ति को महसूस किया है बहुत खतरनाक हे वो, हम अगर अंदर गए तो वह हम सब को मार डालेगी। सब लोग उसकी बात से सहमत होते है , सब लोग वही खड़े रहते है शाम से रात हो चुकी थी । अब कोई उमिद नहीं थी कि गुड़िया बाहर आयेगी ,अब सब लोगो ने मंजरी को समझाया कि अब वह यह बात मानले की गुड़िया वापस नहीं आयेगी ।

वह बूढ़ी महिला ने कहा बेटा मंजरी शायद गुड़िया का साथ तुम्हारे साथ यही तक का था ,यही नियती की इच्छा होगी बेटी अब घर चलो। थोड़ी देर बाद मंजरी को भी लगा की उसने अपनी बच्ची को खो दिया है , वह बड़ी मुश्किल से मान जाती है घर चलने के लिए सब लोग जा ही रहे होते है की पीछे से "मम्मी" ऐसी आवाज आती है , सब लोग पिछे मुड़ते है तो गुड़िया होती है , गुड़िया को देख कर मंजरी ओर गांव वालो के खुशी का ठिकाना नहीं रहता । मंजरी गुड़िया को कस कर गले लगा लेती है ओर बोलती है मेरी प्यारी बच्ची अच्छा हुआ तुम आ गई मुझे तुम्हारी बोहत चिंता हो रही थी।

मंजरी ने पूछा वह दुष्ट आत्मा ने बहुत परेशान किया ना मेरी बच्ची को , तभी गुड़िया कहती है , मम्मी उस घर के अंदर मेरी जितनी ही एक बच्ची थी हम दोनों ने मिलकर खूब खेला।
गुड़िया के मुंह से यह बात सुन कर सारे गांव वाले ओर मंजरी चकित रह जाते है।

आगे की कहानी का भाग 9 जल्द आयेगा।😊 तब तक सोचिये आगे क्या होगा।