अंधविश्वास प्रियंका द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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अंधविश्वास

सन 2017 में राजस्थान में एक आतंक फैला था, जिसका नाम था -"गंजी देवी का आतंक"
सब कुछ ठीक चल रहा था। बच्चों को गर्मियों की छुट्टियां हो गई थी। सभी बच्चे अपनी नानी और दादी के घर घूमने गए थे।
अचानक एक खबर आई कि हमारे पड़ोस की चाची की चाची की बहू सुनीता ने रात को अपने घर वालों को खाना खिलाया और बच्चों सुला दिया।
सुनीता के पति ने भी खाना खाया और सो गया। सुनीता भी अपने पति के पास लेट गई। उस कमरे में पति के अलावा और कोई नहीं था। सुबह जब सुनीता उठी वॉशरूम गई। उसके बाद उसने अपना चेहरा आईने में देखा तो वह जोर जोर से चिल्लाने लगी और रोने लगी।
सुनीता का शोर सुनकर उसका पति राकेश उठा। उसने कहा-"क्या हुआ सुनीता?"
यह कहकर उसके पति ने आंख खोलकर सुनीता को देखा तो हक्का बक्का रह गया।
उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
उसने देखा कि सुनीता गंजी हो चुकी थी। उसके सिर पर सात बड़ी-बड़ी सिंदूर की बिंदिया लगी हुई थी। सभी घरवाले हैरान- परेशान हो गए। सब सोचने लगे कि सुनीता को रात के अंधेरे में गंजा किसने किया?
सभी परिवार वालों ने मिलकर सुनीता को जैसे-तैसे शांत किया। 4 दिन बाद सुनीता की तबीयत खराब हो गई। डॉक्टर ने जवाब दे दिया था कि अभी यह नहीं बच सकती।
देखते ही देखते पूरे राजस्थान में से ऐसे बहुत से मामले सामने आए।
लड़कियां और महिलाएं सो रही होती और रात में कोई अदृश्य प्राणी आकर उनके बाल काट कर चला जाता।
हालांकि यह घटना हमारे गांव में कहीं नहीं हुई थी ना ही हमने किसी ऐसी महिला को देखा था जिसके साथ ऐसा हुआ हो
जब भी हम ऐसी घटना सुनते तो हमें बहुत हंसी आती।
गर्मी की छुट्टियां हुए 5 दिन बीत गए थे। मामा जी किसी व्यस्तता के चलते अभी तक हमें लेने नहीं आए थे। मैंने एक दिन गुस्सा होकर मामा जी को फोन किया।
मामा जी का फोन बंद आ रहा था। मैंने मामी को फोन किया। मामी ने बहुत देर बाद फोन उठाया। मैंने मामी से इसका कारण पूछा तो मामी ने बताया-"मामा जी का फोन चार्ज नहीं है। आपकी नानी और मैं पड़ोस वाली रामी काकी के घर गए थे। क्योंकि उनकी बहू को किसी ने रात के अंधेरे में गंजा कर दिया।
तब भी मुझे बहुत हंसी आई। मैंने फोन रख दिया, लेकिन इस बार में ननिहाल नहीं गई। क्योंकि अब मुझे भी बहुत डर लगने लगा था कि कहीं मेरे साथ ही ऐसा ना हो जाए। मैं रात को सोती तो हनुमान चालीसा पढ़ कर सोने लगी।
जैसे -जैसे इस चीज की खबर चारों तरफ फैली तो लोगों से सुना कि किसी देवी ने अवतार लिया है, लोग अभी उसे जानते नहीं हैं, इस कारण लोग देवी की पूजा नहीं करते और देवी महिलाओं और लड़कियों के बाल काटती है।
इस बकवास को बुद्धिजीवी वर्ग और कुछ अनुभवी बुजुर्ग नहीं मानते थे। लेकिन कुछ मूर्ख लोग बच्चे और भोली भाली जनता इस कुचक्र में फंस गई। 1 दिन पड़ोस के सुमित भैया जो बहुत दिनों के बाद लौटे थे वह भाभी को लेकर हमारे घर आए।
तभी गंजी देवी की चर्चा हमारे घर में छिड़ गई। भैया बोले-"यह सब बकवास है। देवी क्या खुद गंजी है जो महिलाओं के बाल काटती है? "यह सब सुनकर सभी जोर से हंसने लगे।
थोड़े ही दिनों में सभी लोगों ने अपने घरों की लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुल देवियों का जगराता करवाया और मनौती मांगने लगे, घर के आगे सिंदूर और कोयले से त्रिशूल, स्वास्तिक आदि बनाने लगे। कुछ लोगों ने अपने घर के आगे नींबू मिर्ची टांग दिए।इस कारण निंबू -मिर्च का भाव बाजार में बढ़ गया।
मूर्ख लोगों को पढ़े लिखे लोग बहुत समझाते पर कोई सुनता नहीं। थोड़े दिनों बाद अखबार में फोटो सहित खबर आई कि पुलिस ने 5-7 लोगों को पकड़ा है जो यह अफवाह फैला रहे थे।
मैं अखबार पढ़ रही थी और मैंने अपनी दादी और मम्मी को अखबार दिखाया। दादी बोली-"कुछ लोग जिनके घर में गाय, भैंस या फिर घोड़ी होती है। वह अगर सही से क्रोस नहीं हो पाती और बच्चा नहीं देती है तो ऐसे में उसका मालिक ऐसी अफवाह फैलाता है। जितनी दूर तक यह अफवाह से लेगी और लोग उसको सच मानेंगे उतनी ही जल्दी उनके बच्चा होने की संभावना बढ़ जाएगी।
इस शब्द को सुनकर पहले हंसी आई, फिर गुस्सा आया ऐसे लोगों पर उसके बाद अफसोस हुआ कि हम व्यर्थ में ही डर गए थे। 4 महीनों के बाद लोग सामान्य जीवन जीने लगे। क्योंकि पुलिस ने अफवाह फैलाने वाले लोगों के ऊपर डंडे बरसाए थे।
फिर जिज्ञासा हुई कि वह महिलाएं जो इस कारण मरने की कगार पर थी उन सब का क्या हुआ? क्या वह सब झूठ था?
फिर धीरे-धीरे जिज्ञासा शांत हुई। पता चला कि कुछ लोग अफवाह फैलाते की उनके घर की महिलाओं के साथ ऐसा हुआ है फिर उस महिला की तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर घर में रखते। लोग मिलने जाते तो लोगों को बताया जाता है कि डॉक्टर ने किसी को भी मिलने से मना किया है।
लोग यह सुनकर वापस लौट आते। आज वास्तव में अंदर क्या हो रहा होता यह बात किसी को पता नहीं चलती।
इस घटना से सबको एक सीख मिली की हमें किसी की बात को ऐसे ही नहीं मानना चाहिए। अपनी शिक्षा, बुद्धि और स्वविवेक का भी प्रयोग करना चाहिए।