Tere Ishq me Pagal - 9 books and stories free download online pdf in Hindi

तेरे इश्क़ में पागल - 9

ज़ैन को अपनी तरफ गुस्से से बढ़ते देख वोह कांपने लगी।

तभी अचानक से एक लड़के ने पीछे से ज़ैनब को आवाज़ दी। ज़ैनब ने पीछे मुड़ का देखा तो उसका सीनियर था।
वो उसके पास आ कर बोला:"जैनी तुम कहा हो तुम्हे पता है ना समेसरर्स स्टार्ट हो रहे।"

ज़ैनब ने पहले ज़ैन को देखा जो गुस्से से लाल आँखों से उसकी तरफ देख रहा था और फिर अपने सीनियर की तरफ देखा जो उन दोनों को हैरानी से देख रहा था।

"ज़ैनब क्या हुआ तुम्हे कोई प्रॉब्लम है क्या?" उसने ज़ैनब के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

यह देख कर ज़ैन जो अब तक अपना गुस्सा कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रहा था अगले ही पल आगे बढ़ कर उसका हाथ पकड़ कर उसे मोड दिया।

उस लड़के की दर्द से भरी चीखे सुनकर ज़ैनब ने जल्दी से ज़ैन को धक्का दिया और गुस्से से बोली:"आप समझते क्या है अपने आप आपको आप जो चाहे वोह कर सकते है। आप इंसान है या हैवान।"

ज़ैन और अहमद तो एक पल के लिए हैरान ही हो गए थे। क्योंकि उन्होंने इतने दिनों में कभी ज़ैनब को गुस्से में नही देखा था।

ज़ैन ने उसका बाज़ू पकड़ा और उसे खुद से करीब करते हुए बोला:"कहा जा रही हो बटरफ्लाई।"

ज़ैनब को उसकी उंगलिया अपने बाज़ू में धंसती हुई महसूस हो रही थी। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे।
अहमद जल्दी से ज़ैनब के पास आया और ज़ैन के हाथों को झटक कर ज़ैनब को कार में बिठाया।

घर पहोंच कर अहमद ने ज़ैनब को कमरे में जाने के लिए कहा। यहाँ नीचे ज़ैन हाल में चक्कर काट रहा था। उसने ज़ैन के रूम को देखा और उसकी तरफ बढ़ ही रहा था कि अहमद ने उसके हाथों को पकड़ कर उसे रोक लिया।

ज़ैन ने न समझी से उसकी तरफ देखा।

अहमद उसकी नज़रों का मतलब समझते हुए उससे बोला:"पहले अपना गुस्सा ठंडा करो।"

"मैं कुछ नही करूँगा।" ज़ैन ने उसका हाथ हटाया और अंदर की तरफ चला गया।

ज़ैनब कमरे में बैठी रो रही थी। दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनकर उसने दरवाज़े की तरफ देखा। वहां ज़ैन को खड़ा देख वोह डर कर खड़ी हो गयी।

ज़ैन उसके पास गया और गुस्से से उसके बाज़ू को पकड़ कर उसे दीवार से लगा दिया। ज़ैनब को उसकी उंगलिया अपने बाज़ू में चुभती हुई महसूस हो रही थी।

"यहां से क्यों भागी?" ज़ैन ने गुस्से से पूछा।

वोह.....वोह मैं। ज़ैनब हकला रही थी।

मुझे ल....गा मैं य..हां से..फ न..ही हु क्योंकि आ...प मुझे यहां खरीद कर लाये है। ज़ैनब ने हकला कर कहा।

उसकी बात सुनकर ज़ैन को बहोत गुस्सा आया उसने टेबल पर पड़ा जग उठाया और उसे ज़मीन पर दे मारा। जग टूटने की वजह से शीशे के टुकड़े जगह जगह बिखर गए।

ज़ैनब सहम कर रोने लगी।

अहमद अंदर आया तो अंदर का मंजर देख कर उसका दिमाग हम गया।

अहमद ने खुद को काबू करते हुए ज़ैन को ज़ैनब से दूर धक्का दिया। ज़ैन दोबारा ज़ैनब की तरफ बढ़ ही रहा था कि अहमद ने इस बार उसे ज़ोर से मुक्का मारा और वोह सीधा जा कर ज़मीन पर गई गया।

ज़ैन ने वापस से उठ कर अहमद को धक्का दिया, अहमद लड़खड़ाते हुए काँच के टुकड़ों के पास जा कर गिर। कांच के कुछ टुकड़े उसके बाज़ू में चुभ गए थे और उससे खून निकलने लग गए थे। अहमद ने ज़ैन को देखा जिसका एक हाथ ज़ैनब के बालों में जकड़ा हुआ था जबकि उसके दुसरे हाथ से उसने ज़ैनब को मुंह दबोच कर बोला:"तुमने मुझे दरिंदा समझ लिया है। तो क्यों ना मैं तुम्हे बता दु दरिंदा होता कैसा है।"

अहमद ने बेदर्दी से अपने हाथों से कांच के टुकड़ों को निकाला और ज़ैन को धक्का दे के उसे उंगली दिखाते हुए बोला:"अगर अब तू भाभी के पास भी आया तो मैं इन्हें इतनी दूजे भेज दूंगा की तू कभी भी उन तक पहोंच नही पायेगा और तू जनता है मैं ऐसा कर सकता हु।"

उसकी बाद सुनकर कर ज़ैन पीछे हो कर अपना हाथ मसलते हुये गुस्से से लाल आंखों से ज़ैनब को देखा और फिर अहमद से बोला:"अहमद मौलवी को बुला मुझे आज और अभी इसी वक्त मुझे इससे निकाह करना है।" इतना कह कर वोह वहां से बाहर चला गया।

अहमद ने बेबस नज़रो से ज़ैनब को देखा जिसका चेहरा आंसुओं से तर था।

भाभी....... अहमद ने सिर्फ इतना ही कहा।

"नही,भाई प्लीज मुझे उनसे शादी नही करनी है,वोह बहोत बुरे है मुझे मरेंगे।" ज़ैनब ने रोते हुए कहा।

ज़ैनब की बात सुनकर अहमद को ऐसा लगा जैसे उसका सीना किसनी ने गोलियों से भून कर छन्नी कर दिया है।

अहमद ने उसे बेड पर बिठाया और खुद उससे कुछ दूर खड़ा हो गया।

"देखे भाभी वोह बहोत ही अच्छा इंसान है, आप से बहोत प्यार करता है लेकिन गुस्से का तेज है। उसे आपका यहां से भागना अच्छा नही लगा इसीलिए वोह गुस्सा में था। लेकिन आप फिक्र न करे मैं उसे समझा दूंगा वोह दोबारा ऐसा नही करेगा, मैं आपसे वादा करता हु। अब आप ने मुझे भाई कहा है तो एक बार अपने इस भाई पर यकीन भी कर लीजिए। आप परेशान मत हो मैं अभी आपकी दोस्त सानिया को ले कर आता हूं।"

"वोह सच मे बुरे नही है।" ज़ैनब ने झिझकते हुए कहा।

"नही, मेरी प्यारी बहेन।" अहमद ने उसके सिर पर चपत लगाते हुए कहा।

उसकी बात सुनकर ज़ैनब मुस्कुरा दी।

"भाभी आप हसती भी है मुझे लगा आपको सिर्फ रोना आता है।" अहमद ने हस कर कहा।

उसकी बात सुनकर ज़ैनब ने मुंह बना लिया।

"अच्छा......अच्छा सॉरी मेरी प्यारी बहेन। अब मैं चलता हूं उस नवाबज़ादे ने मौलवी को बुलाने का आर्डर दिया है।"

अहमद दो कदम ही आगे बढ़ा था कि ज़ैनब ने उसे आवाज़ दी। उसने पीछे मुड़ कर देखा तो ज़ैनब ने कहा:"आप सच मे सानिया को ले कर आएंगे?"

"हु।" अहमद ने मुस्कुरा कर कहा और बाहर चला गया।

अहमद बाहर आया तो ज़ैन सिगरेट पी रहा था। वो ज़ैन को इग्नोर करते हुए कासिम को अपने साथ आने का कह कर बाहर चला गया।

कासिम के साथ मौलवी को भेज कर उसने अली को कॉल करके सारी सिचुएशन बताई।

"यार अहमद मैं तो शहर में नही हु तू सानिया कोले कर चला जा।" अली ने कहा।

"ठीक है तू मुझे उसका नम्बर भेज दे।" अहमद ने कहा और फोन रख दिया।

अहमद ने सानिया को फ़ोन किया, सानिया ने तीसरी बेल पर फ़ोन उठाया।

"कौन?"

"मैं अहमद हु।"

"कौन अहमद?" सानिया में पूछा।

"अली का दोस्त।" अहमद ने कहा।

"कौनसा दोस्त उसके तो बहोत दोस्त है।" सानिया ने मुस्कुराते हुए कहा।

"छिपकली मैं हु।" अहमद ने चिढ़ कर कहा।

"ओह बंदर तो तुम हो, तुम्हे मेरा नंबर कहा से मिला?" सानिया ने पूछा।

"तुम्हे लेने आ रहा हु रेडी रहना।" अहमद ने उसकी बात को इग्नोर करते हुए कहा और फ़ोन रख दिया।

उसके घर के बाहर पहोंच कर अहमद ने उसे फिर से फ़ोन किया और उसे बाहर आने के लिए कहा।

"क्या है?" सानिया ने घूर कर कहा।

"चलो मेरे साथ।" अहमद ने उसे इग्नोर करते हुए कहा।

"मैं क्यों चलूं तुम्हारे साथ कहि अगर तुमने मुझे अगवा कर लिया तो।" सानिया ने अपनी आंखें नाचते हुए कहा।

"ओह बत्तमीज़ लड़की तुम्हारे भाई को पता है और उसी से मैं ने तुम्हारा नंबर लिया है।" अहमद ने चिढ़ कर कहा।

क्या पता तुम झूठ बोल रहे तो........

"बस अब सुकून से आ कर गाड़ी में बैठ जाओ मुझे तुम्हारी आवाज़ सुनाई ना दे।" अहमद ने गुस्से में कहा तो सानिया आ कर गाड़ी में बैठ गयी। उसके बैठने के बाद अहमद ने गाड़ी सड़क पर दौड़ा दी।

"सॉरी।" अहमद ने सानिया को देखते हुए कहा।
"इट्स ओके।" सानिया ने दूसरी तरफ देखते हुए कहा।

"यार मैं पहले से परेशान था और तुम्हारे सवाल खत्म ही नही हो रहे थे।" अहमद ने उसे एक्सप्लेन करते हुए कहा।

"इट्स ओके, लेकिन तुम मुझे कहा लेजा रहे हो?"

वोह दरअसल..............अहमद ने उसे सारी बात बता दी।

"ज़ैनब के साथ इतना सब कीच हो गया और उसने मुझे बताई भी नही, वो ठीक तो है ना?" सानिया ने आंखों में आंसू लिए हुए कहा।

कहानी जारी है.....
©"साबरीन"


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