The Author Shamad Ansari फॉलो Current Read द एजेंटस - 2 By Shamad Ansari हिंदी फिक्शन कहानी Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तान। - एपिसोड 92 अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तान एपिसोड 92— वो बचपन... ज... सोनिया को सतीश से प्यार - 5 कभी-कभी प्यार किसी बड़े पल से शुरू नहीं होता।किसी के साथ बित... कागज़ की आत्मा कागज़ की आत्मायादों, सपनों और एक अनसुनी आवाज़ की कहानीअध्याय... Money Vs Me - Part 35 उन्होंने मुझ पर अपने फैसले नहीं थोपे थे। उन्होंने मुझे अपन... Mafia saiya chapter 10 अध्याय 10 : हवेली का भूत और पहली किसपूरा कमरा अंधेरे में डूब... श्रेणी लघुकथा आध्यात्मिक कथा फिक्शन कहानी प्रेरक कथा क्लासिक कहानियां बाल कथाएँ हास्य कथाएं पत्रिका कविता यात्रा विशेष महिला विशेष नाटक प्रेम कथाएँ जासूसी कहानी सामाजिक कहानियां रोमांचक कहानियाँ मानवीय विज्ञान मनोविज्ञान स्वास्थ्य जीवनी पकाने की विधि पत्र डरावनी कहानी फिल्म समीक्षा पौराणिक कथा पुस्तक समीक्षाएं थ्रिलर कल्पित-विज्ञान व्यापार खेल जानवरों ज्योतिष शास्त्र विज्ञान कुछ भी क्राइम कहानी उपन्यास Shamad Ansari द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी कुल प्रकरण : 6 शेयर करे द एजेंटस - 2 (7.4k) 26k 32.6k 1 दिव कहता है कि सीधे पुलिस और मिलिट्री फोर्स भी हमारे पिछे पड़ गए हैं। एनआईए के चीफ कहते है की आप सब घबराइए नहीं अभी सब पता चल जाएगा ।अभी बस हम सभी एजेंसी के चीफ मास्टर आॅबरो आते ही होंगे , फिर पांच मिनट बाद मास्टर औबरो भी आ जाते है ,फिर विवेकानंद सभी को बताते है मैंने इन लड़कों को चुना है,जैसा कि आप लोगों ने मुझे काम सौंपा था ।इन सभी में वह सारी खूबियां है को आप लोगो ने ढूंढने से पहले बताया था। यह सभी टीम में मिलकर काम करते हैं, उन अपहरणकर्ताओं को पकड़ने के लिए दिमाग का प्रयोग किया । जिसका मतलब यह है कि यह लोग समझदार भी है।तभी मास्टर ऑब्रो बोलते है अपने इनको चुना है तो कुछ सोच समझ के ही चुना होगा ,लेकिन मैं पहले इन सभी का परीक्षण करूंगा,ताकि मुझे भी इनकी काबिलियत पता चल सके हालांकि अगर अपने इनको चुना है तो मान लीजिए मैंने भी इनको पास कर दिया है। तभी वो उन लड़कों की तरफ देखते हुए कहते है पहले इनकी पढ़ाई पूरी करवाएं जिस भी देश में इन्हे पढ़ाई पूरी करनी हो ये वहां जाके पढ़ाई पूरी कर सकते है , उन सभी लड़कों ने एक साथ कहा हम सब अभी 11वी कक्षा में है हम 12वी तक की पढ़ाई लंदन मे करना चाहते है , आेर उसके आगे की पढ़ाई U.S.A अमेरिका में । वहा पर मौजूद लोग कहते हैं ठीक है जैसा आप सभी को comfortable लगे वैसा करिए । आप सभी की पढ़ाई का खर्च हमारे देश की सरकार उठाएगी ,अब हमे बस तुम्हारे parents we बात करनी है तभी विवेकानन्द कहते है इन सभी के माता पिता से में जल्द ही बात करके इन्हे पढ़ने के लिए भेज दूंगा। आेर मीटिंग वहीं पर समाप्त हो जाती है और मास्टर आब्रो तुरंत वहां से पूरी सुरक्षा के साथ चले जाते हैं। विवेकानन्द उन लड़कों की तरफ देखते हुए कहते है कल मैं तुम्हारे माता पिता से बात कर लूंगा, फिर वह अफसरों की तरफ देखते हुए कहते है ये तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ के आ जाएंगे तब सिकंदर अचानक से कहता है ठीक है पर आप सब ये हमारे लिए कियुं कर रहें है ???? और हमे ही कियूं चुना । फिर विवेकानंद ने कहा हमारे डिपार्टमेंट में बहुत सारे खुफिया एजेंट है जो हमारे देश की सारी जानकारी लीक कर देते है और कुछ तो हमारे देश के ही है ,मगर पैसे का लालच मिलते ही वह देश से गद्दारी कर देते है ,हमरे देश में क्राइम रेट भी बहुत बढ़ गया है। इसीलिए हम भरोसेमंद ,समझदार, देशभकथ, नियमों का पालन करने वाले टीम को ढूंढ रहे थे , और तभी तुम सब मिल गए तुम्हारी आंखों में वह क्रांतिकारियों जैसा जोश देखकर और उस दिन तुम्हारी काबिलियत देखकर तुम सभी को चुन लिया गया। तुम फिक्र मत करो तुम्हें कुछ नहीं होगा आगे सब समझ जाओगे ,London जाने की तैयारी करो। मैं तुम सभी के माता पिता से बात कर लूंगा ।पहले तो सिकंदर और विक्रम के माता पिता ने माना कर दिया लेकिन बाद में उन्होंने सोचा कि इन लोगों की जिंदगी बदल जाएगी इनकी London मै अच्छी पढ़ाई होगी और आगे चलकर बहुत अच्छी नौकरी भी मिल जाएगी ये दोनों कमियाब हो जाएंगे। Cheif इनके पासपोर्ट और विजा तैयार करवा देते है। हालंकि यह सब स्पेशल इजाजत से जा रहे थे । लेकिन फॉर्मेलिटी तो ज़रूरी थी न , फिर ये सब London जाने के लिए रवाना हो जाते है साथ में खूब मस्ती भी करते है । सब बैठ के बात कर ही रहे थे कि तभी विक्रम दिव से पूछता है कि ??? ‹ पिछला प्रकरणद एजेंटस - 1 › अगला प्रकरण द एजेंटस - 3 Download Our App