भारत - 3 नन्दलाल सुथार राही द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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भारत - 3


आपके स्नेह और प्रेम के कारण भारत काव्य संग्रह का भाग तीन प्रस्तुत कर रहा हूँ। भाग तीन की थीम भारत की "आध्यात्मिकता" है। भारत का धर्म सम्पूर्ण विश्व का सबसे प्राचीन और सबसे सहिष्णु धर्म है। इस सनातन धर्म की दो प्रमुख धाराएं है आदर्श के पर्याय श्रीराम और हर बंधन से परे श्रीकृष्ण।
पहली काव्य रचना श्री कृष्ण के जीवन के कुछ पलों पर आधारित है "श्याम" और दूसरी काव्य रचना "श्री राम का पता" है जिसमें ये बताने का प्रयास किया गया है कि आखिर अगर हमें भगवान राम की खोज करनी है और उसे ढूंढना है तो हमें कहाँ जाना होगा? राम का पता क्या है?
आशा है आप रचना को पढ़कर प्रतिक्रिया देकर मुझे आगे लिखने को प्रेरित करते रहेंगे। इसी आशा के साथ
-राही





(7)

(श्याम)


*श्याम*

श्याम वर्ण को श्याम है मेरो
शाम सुरीली सी बंसी बजावे।
मन हर जावे ,मन तर जावे
मुझ मानुष को मुक्ति दिलावे।

गैंया चरावे, गोपी नचावे
गोकुल में गोपाल रास रचावे।
सबको है भावे, सबको रिझावै
कान्हा ऐसे करतब बतावे।

माँ से माखन चोरी से खावे
माँ को मुँह में जग है बतावे।
लड़ते सखा से,लड़ते सखा पे
और सखा की लाज बचावे।

जब वो है चाले ठुमक -ठुमक
गोपिया सारी मन मुस्कावे।
जादू कर जावे,जब नाच नचावे
ये नंद नंद पे वारी जावे।

माथे पे मटका, मटके में माखन
माखनचोर तोड़ के जावे।
आवे पकड़ने मैया उसे जब
कान्हा तो बच के दौड़ लगावे।

बांधे उसे जब मैया महल में
जो पूरे जग से बाँधा न जावे।
गोपियां आवे, उसको छुड़ावै
माखन उसको खूब खिलावे।

खेले सखा संग खेल रे कान्हा
गेंद यमुना में वो जान उड़ावे।
यमुना में जावे, गेंद वो लावे
यमुना को नाग से मुक्ति दिलावे

बरसे रे बदरा इंद्र कहन से
कान्हा नगर में आफत आवे।
सब डर जावे,अब कौन बचावे
कान्हा गिरि को तब उठावे।

मथुरा में छाया कंस कुशासन
वो संतन को खूब सतावें।
कान्हा तब जावे,कंस गिरावे
मथुरा में फिर से सुशाशन छावे।

*नन्दलाल सुथार"राही"*
*रामगढ़,जैसलमेर*


(8)

(श्रीराम का पता)


कुछ पूछते है किस जगह पर रहता तेरा राम है
जो चल रही है प्राणधारा उसमें रहता राम है।
बहती हवा में राम है और व्योम में भी राम है
श्रीराम तो है हर जगह,हर रोम में भी राम है।

कुछ पूछते है किस जगह पर रहता तेरा राम है
हर सत्य में श्रीराम है और न्याय में भी राम है
सबरी के जूठे बेर में,हर प्रेम में बसते राम है
श्रीराम तो है हर जगह ,हर श्वास में ही राम है।

कुछ पूछते है किस जगह पर रहता तेरा राम है
हर पितृ के सम्मान में और राज के बलिदान में
हर भ्रात के विश्वास में और मित्रता की लाज में
श्रीराम तो शुद्ध भाव में,हर पुनीत हिय में राम है।

कुछ पूछते है किस जगह पर रहता तेरा राम है
करूणा में बसते राम है,विश्वास में भी राम है
वो दानवों के संहार में और प्राणियों के उद्धार में
श्रीराम तो है हर जगह,हर कण में बसते राम है।

कुछ पूछते है किस जगह पर रहता तेरा राम है
तुलसी के पद में राम है तो शून्य में भी राम है
भक्तों के मन में राम है और सिय से हिय में राम है
श्रीराम तो है हर जगह,हर बून्द में भी राम है।

कुछ पूछते है किस जगह पर रहता तेरा राम है
हर माँ के दिल में राम है,शुभ काज में भी राम है
श्रीराम सगुण अवतार में और निर्गुण धार में
श्री राम तो है हर जगह, वो है सकल संसार में।


जय श्री राम

जय श्री कृष्ण