अनजान कातिल - 3 V Dhruva द्वारा जासूसी कहानी में हिंदी पीडीएफ

अनजान कातिल - 3

आगे आपने पढा कि अमन सहगल की कार का एक्सीडेंट हो जाता है। एक्सीडेंट में ही उसकी मौत हो जाती है और इं. मिश्रा तहकीकात कर के अमन की बॉडी पोस्टमार्टम करने भेज देते है।

अब आगे,

इं. मिश्रा अपने घर पहुंचकर पहले तो नहाने जाता है। नहाकर फ्रेश होने के बाद वह किचन में कॉफी बनाने चला जाता है। कॉफी बनते ही उसे लेकर बाहर सोफे पर बैठता है और सोचता है 'आज इतनी सारी वारदात एकसाथ कैसे हो गई? ये तीनों एकदुसरे को पहचानते तो नहीं?' वह तुरंत ही अपने खबरी को फोन लगता है। खबरी के फोन रिसीव करते ही इं. मिश्रा उन्हे आज की वारदात बताते है और यह भी बताते है कि कहीं यह तीनों एकदूसरे को पहचानते तो नहीं? उसे कल तक खबर निकालकर फोन करने को कहा।

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अगले दिन सुबह पुलिस चौकी में इं. मिश्रा जल्दी पहुंच जाते है। तावड़े भी थोड़ी देर में आ जाता है। वह अपने साथ चाय नाश्ता लेकर ही ऑफिस में जाता है। उसे देख इं. मिश्रा पूछते है- आज इतनी सुबह मे नाश्ता मंगवा लिया?
तावड़े- मंगवाया नहीं है। धर्मपत्नी ने आपके लिए बनाकर भेजा है। उसे पता था आप ने कल ठीक से खाना नहीं खाया होगा। तो सुबह सुबह यह कोथंबिर वडे और पोहे बना दिए है। अभी गरम गरम ही है, चलिए पहले कुछ खा लीजिए। फिर पता नहीं पूरे दिन कहां कहां घूमना पड़े?
इं. मिश्रा- हां, सही कह रहा है तु। ला चल जल्दी नाश्ता कर लेते है, फिर पहले यज्ञेश के घर चलते है छानबीन के लिए। अभी शायद लाश पीएम से नहीं दी गई होगी। जरा त्रिपाठीजी को फोन करके तीनों लाश का स्टेटस पूछ लेना, फिर चलेंगे।

दो घंटे बाद पुलिस स्टेशन मे तीनों लाशों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भिजवा दी जाती है। और सबकी लाशे उनके परिवार को सौंप दी जाती है।
इं. मिश्रा रिपोर्ट पढ़ते है। उन्हे यज्ञेश और वकील सुदेश कुमार की रिपोर्ट्स में कुछ खास नहीं मिला। पर अमन कि बॉडी मे एल्कोहोल की भारी मात्र पाई गई थी और ड्रग्स की भी कुछ मात्रा थी। तावड़े भी रिपोर्ट देखता है और कहता है- ये अमन तो शराबी निकला। तभी यह एक्सिडेंट कर दिया।
बाते करते हुए दोनो यज्ञेश के घर जाने के लिए निकलते है।

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यज्ञेश के घर पहुंचे तो देखा के अभी अभी सब यज्ञेश का अग्निदाह कर के वापस आए थे। उसकी मां के साथ घर की दूसरी महिलाएं बैठी हुई थी। यज्ञेश की मंगेतर भी वही बैठकर रो रही थी।
इं. मिश्रा यज्ञेश के पिताजी के पास जाकर उनसे पूछते है- अगर आपको सही लगे तो हम बात कर सकते है?
मि. केलकर- जी सर! आइए। हम मेरे रूम मे चलकर बात करते है।

रूम में पहुंचकर इं. मिश्रा यज्ञेश के पिता मि. केलकर से पूछते है– मि. केलकर क्या आपको किसी पे कोई शक है? आपका कोई पुराना दुश्मन या यज्ञेश का?
मि. केलकर - मेरी या मेरे बेटे की आज तक किसी से कोई दुश्मनी नहीं हुई। यहां तक कि किसी के साथ हमारा लड़ाई जगड़ा भी नही हुआ। हम लोग ऐसी चीजों से हमेशा दूर रहते है सर। पता नही किसी ने क्या दुश्मनी निकाली हमसे?

इतना बोलते ही वे रो पड़े। इं. मिश्रा ने वहां पड़े जग से ग्लास में पानी निकालकर मि. केलकर को दिया और कहा कि- आप चिंता ना करें। हम खूनी को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे। अभी मिसेज केलकर को देखकर लगता है कि वह बात करने की स्थिति में नहीं है। आप उनसे भी पूछ लेना अगर कोई ऐसी बात पता चले जिससे हमे मदद मिल सके तो। वैसे में दोबारा उनसे पूछताछ के लिए आऊंगा। पर आपको कुछ पता चले तो जरूर बताएगा। अच्छा..., उनकी मंगेतर को कुछ पता होगा?

मि. केलकर- उस बेचारी को क्या पता होगा? अभी कुछ दिन पहले ही सगाई हुई है। और वो ज्यादा मिले भी नही थे। अगर फोन पर कोई बात हुई है तो मुजे पता नही।
इं. मिश्रा- ठीक है, क्या उनसे अभी बात हो पाएगी?
मि. केलकर - मै अभी उसे बुलाकर लाता हुं।

इं. मिश्रा जब माही को देखते है तब सोचते है 'माही की आंखे रो रोकर सूज गई है। लगता है कुछ ही दिनों में दोनो के बीच अच्छी बॉन्डिंग हो गई थी।'
वह माही से पूछता है - माही जी, क्या आप एक बात बता सकती है कि आप लोगो को उस दिन ऐसा कुछ अनुभव हुआ जो कुछ अलग हो?
माही- नही सर, उस दिन उनके चेहरे पर चिंता की एक लकीर तक नही आई थी। वे बहुत खुश लग रहे थे। हम पार्टी एंजॉय कर रहे थे। फिर भूख लगने पर अभी टेबल पर बैठे ही थे की यह सब हो गया।
इं. मिश्रा- यानी आपको कोई अंदाजा नही कि कौन खून कर सकता है?
माही- जी नहीं सर!

इंस्पेक्टर मिश्रा माही को जाने के लिए बोल देते है। उन्हे वहां से कुछ खास जानकारी नहीं मिली तो वह मि. केलकर से मिलकर थाने आ गए। दोपहर को तावड़े के साथ लंच लेकर वापस दोनो सुदेश कुमार के घर पर जाते है। जो पेशे से वकील थे।

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सुदेश कुमार के यहां भी रिश्तेदारों की भीड़ थी।
इं. मिश्रा उनके बड़े बेटे मुकेश को साइड में बुलाकर बात करते है- आप के घर में कौन कौन रहता है?

घरवालों की डिटेल मिलते ही वह बारी बारी सबका बयान लेते है। घर में सुदेश कुमार की पत्नी, दो बेटे और उन दोनो की बहुएं, घर में काम करनेवाली नौकरानी, और एक ड्राइवर थे। ड्राइवर सुदेश कुमार की कार ही चलता था। वह कोर्ट आने जाने के अलावा अपने साहब के साथ हर जगह साथ ही जाता था।
इं. मिश्रा मुकेश से कहते है - ड्राइवर को बुलाइए उससे भी पूछताछ कर लेते है।

ड्राइवर जब आया तब इं. मिश्रा के पूछने पर बताया के साहब अभी कुछ दिनों से कुछ अलग ही लग रहे थे।
इं. मिश्रा- अलग मतलब?
ड्राईवर- सर जी! वह चार पांच दिनों से कुछ उखड़े उखड़े रहते थे। मैने साहब से पूछा के कोई बात है जो आपको परेशान कर रही है? पर उन्होंने कोई बात नही है कहकर आगे कुछ बताया ही नहीं। शायद कोई केस का लफड़ा होगा यही सोचकर दोबारा नहीं पूछा।
इन. मिश्रा- तुमने कभी ऐसी कोई बात सुनी हो या वह किसी से कोई ऐसी बात करते हो जो इस केस के लिए क्लू हो?
ड्राइवर - नही सर! हां, एकबार किसी का फोन आया था तो साहब बोले थे तुम चिंता मत करो मैं संभाल लूंगा। मुजे लगा कोई केस के सिलसिले में किसी से बात कर रहे हैं। और कुछ नही जानता सर जी।

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इं. मिश्रा ने यज्ञेश और सुदेश कुमार के मोबाईल पर किसने किसने कॉल किया उसकी डिटेल निकलवाकर देखता है। पर उसमे भी कोई जानकारी नहीं मिली। अमन सहगल का मोबाईल नही मिला था पर उसके घरवालों से नंबर लेकर उसकी डिटेल भी निकलवाते है। एक्सिडेंट के बाद उसका फोन स्विच ऑफ ही आ रहा था। एक्सिडेंट के वक्त उसके मोबाईल की लास्ट लोकेशन वही बता रही थी जहा एक्सिडेंट हुआ था। पर छानबीन के दौरान कही पर मोबाईल नही मिला था तो इसका मतलब कोई था जो मोबाईल ले गया है।
इं. मिश्रा का सर दर्द से फटा जा रहा था। एक भी कड़ी मिल नही रही थी। ऊपर से कमिश्नर साहब ने अल्टीमेटम दे दिया कि केस इस महीने के अंत तक सॉल्व हो जाना चाहिए। अब इस महीने के पंद्रह दिन तो बीत चुके है, रह गए सिर्फ पंद्रह दिन। और मर्डर हुए अभी दो दिन ही बीते है। क्या करू...???

इतने में तावड़े खुश होता हुआ ऑफिस में आता है। वह इं. मिश्रा को कहता है- सर! एक बहुत ही अहम कड़ी हाथ लगी है।
इं. मिश्रा- क्या? जल्दी बता।
तावड़े- सर जी! हमारी टीम ने फिर से उस होटल के सीसीटीवी चेक किए है जहां यज्ञेश का मर्डर हुआ था। और चौकाने वाली बात यह है कि वहां अमन सहगल भी मौजूद था।
इं. मिश्रा- क्या? वो वहां क्या कर रहा था?
तावड़े- वह तो वहां जाकर ही पता चलेगा के वो वहां क्या कर रहा था? जब सब बाहर निकल रहे थे उसमे वह भी था। वो उस दिन काफी नशे में था। बाहर के सीसीटीवी में कोई लड़की उसे सहारा देकर गाड़ी में बिठा रही थी। और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ गई थी। पर सर, उस लड़की का चेहरा नहीं दिख रहा है कैमरे में। उसने केप पहन रखी थी।
इं. मिश्रा- पहले ध्यान कैसे नही गया हमारा?
तावड़े- सर जी! वहां पर काफी अच्छे घराने के पियक्कड़ लोग भी आते है। और दुसरो के सहारे से ही बाहर निकलते है। तो पहले ध्यान नहीं गया। पर जब हमारी टेकनिकल टीम सीसीटीवी को दुबारा रिचेक कर रही थी तो उन्हे वहां अमन सहगल दिखाई दिया।

इं. मिश्रा चौंकते हुए- ओह! अभी शाम होने को है। वहां भीड़ इकट्ठा होने लगे उससे पहले वहां पूछताछ कर लेते है। तो चलो अभी उस होटल पर ही चलते है। साथ में अमन का फोटो ले लेना।

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इं. मिश्रा होटल के मैनेजर से अमन का फोटो बताकर पुछता है - क्या यह शख्स यहां हमेशा आता था?
मैनेजर - हमेशा तो नहीं कह सकते। पर आ जाते थे कभी कभी।
इं. मिश्रा - अकेले आता था या कोई साथ में होता था।
मैनेजर - क्या बताए साहब? हर बार नई लड़की होती थी साथ में।
तावड़े इं. मिश्रा के कान में कहता है ही उसकी बीवी तो बोली थी वह शरीफ इंसान थे।
इं. मिश्रा - बड़े घर के लोग ऐसे ही शरीफ होते है।

वह मैनेजर से पूछता है- आप इतना सारा ध्यान रखते थे उसका?
मैनेजर - हां, सर! क्योंकि वह तगड़ा बिल करके जाते थे और वैटर को भी अच्छी खासी टीप देकर जाते थे इसीलिए बस..।
इं. मिश्रा - अच्छा...! और कोई बात जो अलग लगी हो कभी? अपने सभी स्टाफ को बुलाइए, मै उनसे बात करना चाहता हुं।
सभी स्टाफ के लोग आ गए तो इं. मिश्रा ने उन सभी को अमन का फोटो बताते हुए पूछा - यह आदमी जब यहां आता था तो उसका ऑर्डर कौन कौन लेता था?
एक बैरे ने तुरंत जवाब दिया कि ज्यादातर तो मैं ही उनका ऑर्डर लेता था। अगर मैं न होता तो यह यशपाल लेता था उनके ऑर्डर्स।
इं. मिश्रा - और कोई नही जाता था उसके पास?
एक बैरा मुंह बिगाड़ते हुए बोलता है - हमे तो जाना होता था पर ये दोनो ही ज्यादा टिप मिलने की लालच में हमे नही जाने देते थे। पुराने स्टाफ में से जो है। हम तो यहां अभी अभी ज्वॉइन किए है।

इं.- मिश्रा उन दोनो के अलावा बाकी सबको वापस काम करने के लिए भेजते है। वह उन दोनो से पूछता है - क्या कभी तुम लोगो ने कोई ऐसी बात नोटिस कि जो कुछ अलग लग रही हो?
दोनो में से एक बैरे ने हां में जवाब दिया और दूसरे ने ना में जवाब दिया।

क्रमशः

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Aditya jay shanideva Sk

Aditya jay shanideva Sk 8 महीना पहले

Suresh

Suresh 9 महीना पहले

King Hasnain

King Hasnain 10 महीना पहले

Balkrishna patel

Balkrishna patel 10 महीना पहले

Ina Shah

Ina Shah 10 महीना पहले