संयोग--मुराद मन की - 3 - (अंतिम भाग) Kishanlal Sharma द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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संयोग--मुराद मन की - 3 - (अंतिम भाग)

अकेली रह जाने पर पूनम साइकिल से आने लगी थी।अकेली रहने पर भी वह उससे बात करने की हिम्मत नही जुटा पाया था।लेकिन जब उसे पता चला कल पूनम का आखिरी दिन है।तब उसे सोचना पड़ा।
पिछले एक साल से वह पूनम को रोज देखता आ रहा था।उसकी उससे अभी तक कोई बात नही हुई थी।लेकिन वह उसे ग्रीटिंग्स और पत्र भेजता आ रहा था।उसके पत्रों को पूनम ने फाड़कर डस्टबिन में फाड़ फेंका था।इसका साफ मतलब था कि उसकी पूनम में कोई दिलचस्पी नही थी।फिर भी वह उससे अपने दिल की बात कहना चाहता था।इसीलिए वह एकांत जगह में खड़ा होकर पूनम का इन्तजार करने लगा।जैसे ही वह उसके पास आयी।वह उसके सामने जा खड़ा हुआ।पूनम को साईकिल से उतरना पड़ा।
"क्या बेहूदगी है?"पूनम नाराज हो गई।
"मैं तुमसे अपने दिल की बात कहना चाहता हूँ।"
अनुराग की बात सुनते ही पूनम बुरी तरह उखड़ गई,"डोंट ट्राय टू बी स्मार्ट।मैं तुम्हारे जैसे मजनुओं को अच्छी तरह पहचानती हूं।मैं जानती हूं तुम क्या कहना चाहते हो।बट माइंड इट।मैं तुम्हारी कोई बात नही सुननाचाहती।आई हैट यू"।
अनुरागभौंचक्का सा उसे देखता रह गया।पूनम चली गई।
पूनम के उत्तर ने उसका दिल तोड़ दिया।वह पूनम को चाहता था।प्यार करता था।पर पूनम उससे नफरत करती थी।उसे मजनू समझती थी।उसके प्यार को आजमाए बिना ही उसने उसे ठुकरा दिया था।
पूनम की बातों ने उसका दिल तोड़ दिया।वह पूनम को चाहता था और उसे अपनी बनाना चाहता था।लेकिन उसका यह सपना टूट गया था।माँ उसकी शादी की रट लगाए हुए थी।अब तो वह कहने लगी थी,"लगता है मेरे मरने के बाद बहु लाएगा"।
लड़कियों की लंबी लिस्ट माँ के पास थी।अनुराग को सिर्फ पूनम चाहिए थी।वह माँ की पसंद की किसी भी लड़की को अपनी पत्नी बनाने के लिए तैयार नही था।वह तो चाहता था अगर पूनम नही मिली तो आजीवन कुंवारा रहेगा।पर माँ के रहते ऐसा सम्भव नही था।वह जानता था।पूनम नही मिली तो भी उसे माँ की इच्छा पूरी करने के लिए किसी लड़की से शादी करनी पड़ेगी।यही सोचकर उसने अखबार में विज्ञापन दिया था।
उस विज्ञापन के बदले में अखबारवालों ने उसे ढेर सारे पत्र भेजे थे।उनमें से एक लिफाफे में पूनम का फोटो निकलने पर उसकी खुशी का ठिकाना नही रह था।उसने स्वप्न में भी नही सोचा था।जिस पूनम ने उसे दुत्कार दिया था।उसी के पिता की तरफ से एक दिन शादी का प्रस्ताव आएगा।उसने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने में देर नही लगाई थी।
एक दिन अनुराग के माता पिता उसके घर आ पहुंचे।अनुराग उन्हें पसंद आ गया।जब उन्होंने लड़की देखवे का प्रस्ताव रखा तो वह बोला,"मैने फ़ोटो देख ली।मुझे आपकी बेटी पसंद है।"
"आपकी कोई मांग?"
"मुझे सिर्फ आपकी बेटी चाहिए,"अनुराग बोला,"मैं दहेज के सख्त खिलाफ हूँ।"
पूनम सुंदर होने के साथ शिक्षित भी थी।उसने हर कुंवारी लड़की की तरह उसने सपना देखा था कि उसकी शादी किसी डॉक्टर, इंजीनियर या अफसर से ही होगी।इसी सपने का असर था कि वह छोटे पद पर आसीन लड़के से शादी के प्रस्ताव को ठुकराने लगी।उसे अपने रुओ और शिक्षा पर गर्व था।
परन्तु दहेज के अभाव में उसकी रूप और शिक्षा को किसी ने तजरीह नही दी।जो जितने ऊंचे पद पर था,उतना ही ज्यादा दहेज चाहता था।पूनम के पिता रिटायर्ड फौजी थे।फिर पूनम के अलावा तीन और बेटियां थी।कहां से लाते ढेर सारा दहेज।उसके पिता चाहते थे,उनकी बेटी अपने स्तर के लड़के से शादी कर ले।लेकिन पूनम को यह मंज़ूर नही था।
पूनम ज़िद्द पर अड़ी रही और एक दिन ऐसी स्थिति आयी कि एक दिन रिश्ते ही आने बन्द हो गए।उससे छोटी बहने भी थी।उनकी भी शादी करनी थी।पूनम चाहती थी।पिता उसकी शादी का इरादा छोड़ दे।लेकिन ऐसा सम्भव नही था।और पूनम को शादी के लिए तैयार होना पड़ा।
अनुराग के हां कहते ही चट मंगनी पट ब्याह।पूनम अनुराग की पत्नी बनकर आ गयी।
सुहागरात को सुहागजोडे में पूनम घूंघट निकालकर बैठी थी।अनुराग ने पास आकर उसका घूंघट उठाया था।पूनम ने आंखे बंद कर ली।
"सूंदर अतु सूंदर
आवाज सुनकर पूनम ने आंखे खोल दी,"तुम?आई से
"कह दो।यू हेट मी
"नही।तुम गलत समझ रहे हो"पूनम बोली,"तुम वास्तव में मुझे दिल से चाहते हो।इसलिए तुमने मुझे पा ही लिया।"
और पूनम ने अपनी बाहें अनुराग के गले मे डाल दी।