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बदला


ये कहानी काल्पनिक है और इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है, अगर किसी की कहानी इससे मिलती है, तो वो बस एक मात्र संयोग है.

अक्षत रोज की तरह आज भी सुबह जल्दी उठ गया था, चाय की चुस्की लेते हुए न्यूज़ पेपर पढ़ ही रहा था की अचानक से कोई खबर पढ़ के गहरी सोच मे डूब गया, उसका सोच मे डूब जाना भी स्वाभाविक ही था क्युकी बात ही कुछ ऐसी थी , ओर वैसे भी अक्षत पेशे से पत्रकार था तो उसका इस चीज मे अलग ही इंट्रेस्ट था.

दरअसल पूरा शहर ही इस खबर से असमंजस मे था, मांजना ये था के पिछले 3 महीनों से लगातार कुछ सवेदनशील हालत मे लोगो की मौत हो रही थी. इसमें पुलिस के कई आला अफसर, डॉक्टर्स,फ़िल्मी हस्तिया, पॉलिटिशियन ओर पत्रकार थे.

अब तक 17 लोगो की मौत हो चुकी थी, मरने का तरीका इन सब केसो मे हूबहू एक ही था. मरनेवाले का कमरा अंदर से बंद पाया जाता, ओर शव पंखे से लटका पाया जाता, गले पर फंदे के निसान लटकने वाले कपडे से बिलकुल मेल नहीं खाते थे. मरने वाले की पैर की हड्डी टूटी हुई पायी जाती. ओर इन सब केस मे कोई खून का सबूत नहीं मिल रहा था.

आख़िरकार ऐसा कैसे हो सकता हे सभी 17 मौत एक ही तरीके से हुई.हैरानी की बात ये थी के जिन जिन लोगो की ऐसे मौत हुई वो अपने जीवन मे काफ़ी खुश थे ओर उनके पास मरने की कोई वजह भी नहीं थी , पुलिस ने अपना पूरा जोर लगाया इन केस पर लेकिन सबूतों के अभाव मे एक एक कर इन सब केसो को आत्महत्या घोषित कर बंद कर दिया गया .


1 महीने बाद:

अक्षत के हाथ मे अख़बार था ओर वो वही खबर पढ़ रहा था, मौत का सिलसिला अब भी बंध नहीं हुआ, मौत का आंकड़ा अब 28 हो चूका था, अब अक्षत ने सोच लिया था के वो अपने तरीके से खुद पुरे केस की छानबीन करेगा.

सबसे पहले अक्षत ने सब मरने वालों की लिस्ट बनाय, अब अक्षत ने एक एक कर हर मरने वाले की हिस्ट्री खंगाली. 7 दिन की कड़ी मेहनत के बाद अक्षत ने सबके जानकारी जुटा ली थी.

अब अक्षत ने सब मरनेवालों मे क्या बात सामन्य थी वो खोज ना सुरु किया, दिन रात की काफी परिश्रम के बाद जो जानकारी अक्षत के हाथ लगी वो देखकर उसके होश उड़ गए.

उसके कुछ कुछ बात समज मे आने लगी पर भरोसा करना मुश्किल था ये जो सभी मौत हो रही थी कही ना कही इनका तालुक एक पुरानी घटना से था. बात आज से 15 साल पुरानी थी
15 वर्ष पेहले (साल 2005)

सुहाससींग एक अति लोकप्रिय ओर चर्चित अभिनेता था , स्वभाव से सरल ओर लोगो का खूब चहिता कलाकार था, एक दिन उसकी रहस्य्मय हालातो मे मौत हुई, चश्मदीद के अनुसार सुहास का शव उसके फ्लैट मे पंखे से लटका पाया गया, हलाकि बहुत हो हल्ला मचाया सुहास के चाहने वालों ने ,कायदे से देखे तो ये हत्या ही थी पर तब की मौजूदा सरकार ने मामले को पूरी तरह दबा दिया, ना तो कोई छानबीन हुई ना कोई पूछताछ बल्कि सबूतों को पूरी तरह से पुलिस ने मिटा दिया .

पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने गलत रिपोर्ट बना कर आत्महत्या साबित कर दिया, ओर बिकाऊ पत्रकारों ने सुहास को जम के बदनाम किया.

कुछ फ़िल्मी हस्तीओ ने भी सुहास को नसेड़ी ओर हताशा के चलते खुद ने ही आत्महत्या कर लेने की कहानियाँ फैलाय.
सुनने मे ये भी या था के सुहास की हत्या के पीछे बड़े पॉलिटिशियन का हाथ था इसी वजह से मामले को पूरी तरह से दबा दिया गया.

हलाकि अक्षत ने अपनी ओर से पुरे प्रयास किये सच्चाई बाहर लाने को पर बड़े बड़े लोगो के सामने वो कुछ ना कर पाया.

आज 15 साल बाद जो ये रहस्य्मय मोतो का सिलसिला चल रहा हे इसमें मरने वाले सब ही के तार उस केस से जुड़े थे, चाहे वो पुलिस वालों की संदिग्ध मौत हो या डॉक्टरों की या पॉलिटिशियन की या पत्रकारों की या फ़िल्मी हस्तीओकी.

अक्षत पूरी बात समज चूका था के सुहास अपना न्याय लेने आया हे जो उसे तब नहीं मिला, आज सुहास गिन गिन के हिसाब ले रहा हे.

जिस फ्लैट मे सुहास की मौत हुई थी वो 15 साल से बंद पड़ा हे पर कई बार जिस रूम मे सुहास को मारा गया था उस कमरे की लाइट जली हुई आसपास वालों को दिखा देती हे.

1 साल बाद

अक्षत ने फिर अख़बार मे उसी तरह हुई मौत की खबर आज फिर पढ़ी. चेहरे पे एक हलकी मुस्कान के साथ अक्षत ने थोड़ी ख़ुशी महसूस की.

अब तक 51 लोग का नाम इस सूची मे जुड़ चूका हे ओर कई जुड़ने वाले हे मन ही मन ये सोचकर अक्षत बोला लगता हे सुहास के गुन्हेगार अभी भी ज़िंदा हे. देखते हे कितने लोगो के हाथ सुहास के खून से रंगे हे.

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