इश्क़ - 2 ArUu द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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इश्क़ - 2

ये कहानी है आरोही और निक्षांत की मोहब्बत की
जिंदगी के हर बुरे दौर से गुजर कर भी दोनों अपनी मोहब्बत को निभाते है
किस तरह बदलती दुनियाँ में भी दोनों एक दूसरे की प्रति समर्पित रहते है
आरोही की जिंदगी की खाली जगह कैसे निक्षांत के आने से पूरी हो जाती है और वो ज़रा जरा मोहब्बत मे डूब जाती है

Part-2

झमुरा अपने आप को पूरी तरह अकेला कर देता है
उसे किसी भी चीज में अब दिलचस्पी नहीं रहती
आज वो अकेला खेत में बैठा है
अपने दो बैल के साथ खेत की जुताई में लगा है
आम तौर पर वो अपना काम जल्दी निपटा के घर चला जाता है
पर आज उसका जी घर जाने को नही कर रहा
गाँव का एक छोटा लड़का आके उसे बताता है की आज उसके घर में बहुत भीड़ है
वो एक लंबी सांस ले की फिर बैठ जाता है
बरगद की छाव में
और विचारो में खो जाता है
उसे याद है की आज उसकी बेटी का नामकरण समारोह है पर वो अपने घर की तरफ रुख नहीं करता और छाव में बैठा विचारों की प्रवाह मे खो जाता है
उधर घर में मेहमान आए हुए है
कोई खास भीड़ तो नहीं पर रतना के पीहर वालों की कतार लगी थी नन्ही कली को देखने के लिए
रतना के एक बहन थी पर उसके कोई संतान नहीं थी
उसने ही प्यार से उसका नाम आरोही रख दिया
वैसे तो रतना के बड़ी बेटी का नाम भगवती था पर सब उसे बिछिया कहते थे
वो बड़े नाज़ों से पली थी आखिर पहली संतान थी रतना और झमूरे की।
मंझली बेटी का नाम छाया था उसे भी झमुरे ने थोड़ा प्यार तो दिया था पर आरोही के हिस्से में आते आते उसके प्यार की पोटली खाली हो गयी थी
वो किसी भी हाल में एक और लड़की की बोझ को उठाना के लिए तैयार नहीं था
आज नामकरण के दिन रतना की बहन जीवा ने उसकी ये परेशानी भांप ली थी
जीवा के मन में तो आरोही के लिए ममता का सागर उमड़ रहा था
वो चाहती थी की वो आरोही को अपनी बेटी बना के अपने साथ ले जाए
आखिर इतने सालों से वो जिस ममत्व से वंचित रही वो ममत्व आरोही को देख के आज छलक रहा था
पर इतनी छोटी बच्ची को साथ ले जाना उसने मुनासिब नहीं समझा
उसने कहा "देख रतना.. तुझे अब इतनी चिंता करने की जरूरत नहीं है
आरोही आज से मेरी अमानत है
में इसे थोड़ी बड़ी होने पर अपने साथ ले जाऊंगी
तु तब तक मेरी बेटी का ख़्याल रखना समझी"
रतना ने दीदी के मुख से ये बाते सुन कर उसके मन का बोझ भी हल्का हो गया
उसे पता था की झमुरा कभी भी आरोही के रहते पहले जैसे उससे बात नहीं करेगा
वो मन ही मन भगवान को धन्यवाद देती है
उधर वक़्त बीतता जाता है

आज झमुरा अपने सभी बच्चो के साथ खेत पर है
पिछली साल उसकी फसल इतनी अच्छी हुई की उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था
और जीवा की बाते रतना से उसे पता चलने पर वो अब निश्चित था
छाया बाबा की गोद में सिर रख की सो रही थी उधर दूर रखे पालने में आरोही की सिस्कारिया साफ सुनाई दे रही थी
पर सब अपने काम में व्यस्त थे
किसी ने झहमत नहीं उठाई उसे चुप कराने की
रतना भी अब झमुरे के डर से आरोही का ध्यान कम ही रखती थी। उसे तो अपने घर के काम से ही फुर्सत नही मिलती
अम्मा जी दिन रात माला जपती पर कभी आरोही को गोद मे नहीं लेती
दिन में खेत मे अपने पालने में सोती रहती और रात मे अपने में ही रमी रहती
बिछिया और छाया खूब प्यार लुटती अपनी छोटी बहन पर

आज दो साल बाद फिर रतना ने एक संतान को जनम दिया
पर इस बार अम्मा का चेहरा देखते ही झमुरा खुशी से भर गया
वो अंदर गया और अपने बच्चे को हाथ म लिया और प्यार से उसके माथे पर एक चुंबन दिया
उसने रतना को इतने प्यार से पहली बार देखा था
आज रतना उसे बहुत खूबसूरत लग रही थी
बाहर खड़ी आरोही सब नजारा देख रही थी
उसे ज्यादा कुछ तो समझ नहीं आया
पर अपने बाबा का ये रूप उसने पहली बार देखा था
छोटी छोटी बातों पे उसे डांट देने वाले बाबा क्या सच में इतना स्नेह भरा है उनके अंदर...?
तभी बिछिया अंदर आगयी
उसने अपने भाई को गोद में लिया
श्याम.. बाबा इसका नाम श्याम है ना
हा बिछिया मेरे राजा बेटा का नाम श्याम हैं
उसने फिर रतना की तरफ प्यार भरी नजर से देखा
और चल दिया गाँव की तरफ
आज उसके चेहरे की जो रौनक थी
वो इतने सालों से गुम थी
आरोही बाबा के जाने के बाद कमरे मे गयी
उसने अपने छोटे से हाथों से उसे छुआ और तुतलाते हुए बोली
"माँ ये तोन है"
"ये तुम्हारा छोटा भाई है आरोही"
रतना ने जवाब दिया
6 दिन बाद पूरे गाँव में झमुरे ने दावत रखी
सबको भर पेट खाना खिलाया
जितना उससे हो सका उसने श्याम के छठी के समारोह पे लुटा दिया
मौसी जीवा भी आयी
रतना से उसने आरोही को अपने साथ ले जाने के लिए इज़ाज़त लेना चाहा पर इतनी छोटी बच्ची को अपने माँ से दूर करना उसने मुनासिब नहीं समझा
वो शाम को बिना कुछ कहे चली जाती है

झमुरे की परेशानी अब और बड़ जाती है। वो आरोही के प्रति और उपेक्षित व्यवहार करना शुरू कर देता है
इन सालों मे कभी उसने आरोही से बात नहीं की
ना ही कभी उसे एक प्यार भरी नजर से देखा
बाबा को जब श्याम के साथ खेलते हुए देखती तो नन्ही आरोही की मन मे एक ही बात आती
आखिर बाबा उससे प्यार क्यु नही करते
अब बिछिया और छाया भी अपना स्नेह श्याम पे लुटाने लगी थी।
जीवा के इस रवेये के बाद रतना भी आरोही की तरफ ध्यान कम ही देती थी