आरुषि भाग - 6 Ashish Jain द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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आरुषि भाग - 6

【 घर पहुँच कर..! आरुषि आरव के कंधे पर सिर रख कर लेटी है..!】

अपने उस दिन के बाद कभी आहिरा के बारे में नही बताया..! आज बताओ न..! मुझे भी तो जानने का हक़ है ना..!(आरुषि)

ठीक है.. पर सुनते सुनते सोना मत..!(आरव)

हाँ ठीक है, बताइए आप..!(आरुषि)

कहते है कि बारिश का मौसम सब मौसम से ज्यादा रोमेंटिक मौसम होता है, पर अपनी कहानी अलग थी। अपना रोमेंटिक मौसम तो वो तेज धूप वाली गर्मी थी जिसमे कभी हमारा पहला प्यार हमारे साथ हुआ था। हालांकि प्यार तो उस मोहतरमा से बहुत पहले था, पर जब ये उसके सामने ऑफिसियल हुआ तब मौसम गर्मी का था।

बहुत सी यादें जुड़ी है इस मौसम से, तेज धूप में कई बसों को छोड़ कर उसका वैट करना, पानी पूरी वाले की स्टाल का परमानेंट ग्राहक बनना, एक्स्ट्रा पपड़ी का उसको बिना बताए पे करना और भी बहुत कुछ..!

तो बात कुछ ऐसी थी कि कॉलेज के पहले साल में उनसे अपने प्यार का इज़हार किया था हमने..! रोज सुबह साथ कॉलेज जाना खुद बस में न बैठ कर उसे सीट देना। ये सब रूटिन सा हो गया था और अच्छा भी लगने लगा था। फिर कुछ सात-आठ महीने बीते और मेडम ने दूरिया बनानी चालू कर दी। सोचने लगी कि मीडिल क्लास लड़का है, शायरी वायरी गाने वाने लिखता है इसका क्या फ्यूचर होगा। साथ वाले कोई mains दे रहा है कोई डॉक्टर बन रहा है कोई मैनेजमेट में जा रहा है और ये महाशय प्राइवेट कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहे है।
तो एक दिन उन्होंने मैसेज करके कहा कि तुम जैसे आदमी को मुझे फ्रेंड बोलते भी शर्म आती है.. आज के बाद मुझे कभी मैसेज मत करना..! भूल जाओ मुझे..!

शॉक्ड हो गया था मैं ये सुन कर.. और सोचने लगा कि यार वो ऐसी नही है वो कभी ऐसा नही बोल सकती.. फिर मैंने उससे कहा कि "अच्छा लगा जानकर कि तुम मेरे बारे में ये सोच रखती हो, जिस लड़की को मैं जानता था वो ऐसा कभी नही कह सकती शायद होगा कोई जिसके कारण मुझे ये सुनना पड़ा। तुम खुश रहो अपनी जिंदगी में..!"
और उस समय मैंने कुछ लाइन लिखी कि

"एक अबस तमन्ना को साथ लेकर
कुछ कदम एक मुसाफिर तेरे साथ आया है
जो बोलती है वो तू नही कहती
कहलाता वो है जो अब तेरा साया है
उस जादा को, तेरे हर माझी को
मैं हर सिरे से भूल जाऊंगा
पर जब वो पुकारेगा तुम्हें जो मैं कहता था
तो वादा कर तुझे मैं तब याद नही आऊंगा..!

जब नजदीकियों में दोनों के होंठ बेहद पास होंगे
जब तेरे जेहन में मुज्महिल हो, झलक उठेगा
पाकर अक्स मेरा उस रक़ीब के चेहरे में
मुद्दत से ठंडा पड़ा गुस्सा तेरा, भड़क उठेगा
तेरी इस अफसुर्दगी से, मुज्महिल से
मैं बिन बोले ही सब कह जाऊंगा
नही पूछेगा वो कभी तुमसे कि मैं कौन था
क्योंकि तब मैं खुद अपना पता उसे दे जाऊंगा"

ये सब हो गया ज़िंदगी में अच्छा ही हुआ क्योंकि नियति ने मेरे लिए तुम्हें लिखा था या शायद किसी और को..! (आरव)

अभी भी आपको ऐसा लगता है कि कोई और भी आएगा आपकी ज़िंदगी में..! (आरुषि)

मेरा पहला प्यार कौन था मैं बेशक ये बता सकता हूँ, मेरा लास्ट प्यार कौन होगा ये मैं कभी नही बता सकता..!(आरव)

मतलब मेरी इतनी बुरी किस्मत है कि न मैं आपका पहला प्यार बन सकी और न ही शायद लास्ट बनूँ..!(आरुषि)

पर मैं तो तुम्हारा पहला प्यार बन गया ना..! और रही बात आखिरी की, तो जब तक मैं मर नही जाऊं, तब तक साथ देना मेरा..! मेरा आखिरी प्यार बन कर..!(आरव)

हमेशा..!(आरुषि)

To be continued...

aj4584@gmail.com
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