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Corona Crime - 3 (The Final Chapter)

जिस लक्ष्य पर शौर्य निकला था,वो लक्ष्य अब लगभग पूरा हो चला था।
लैपटॉप हाथ आ गया था,अब ये सूचना सिर्फ उसे अपने
I S A C O (भारतीय गुप्त अपराध निरोधक संगठन) के संस्थापक मुरली अरियप्पा को देनी थी।


1 मार्च ,2020 इस्तांबुल (तुर्की)

शौर्य ने अपने रूम में कॉफी की चुस्कियां लेते हुए अपने फ़ोन की तरफ हाथ बढ़ाया और एक नम्बर डायल किया,
उसने फोन पर मुरली अरियप्पा से बात करना शुरू की।

शौर्य : सर,लैपटॉप मुझे मिल चुका है।

मुरली : गुड। बहुत अच्छे शौर्य मुझे पता था,तुम ये काम कर
लोगे,अब जल्दी से भारत आने की तैयारी करलो।

शौर्य : ह्म्म्म.....जल्दी ही भारत लौट आऊँगा।

इतना कह कर शौर्य ने फोन कट किया और फिर से कॉफ़ी का कप उठाया और ड्राइंग रूम से अपने बेड रूम में आ गया,उसने बेड पर पड़े लैपटॉप को बहुत गंभीरता से देखा और कई सेकंड देखने के बाद उसने उस लैपटॉप को उठाया और सामने रखी टेबल पर उसे रख दिया।

फिर उसने उस लैपटॉप को ऑन किया,वो लैपटॉप में उस फ़ाइल को ढूंढने लगा जिसमे नुक्लेयर का फार्मूला था,लेकिन वो फ़ाइल नही खुली पासवर्ड न मालूम होने की वजह से वो असफल रहा।

कुछ देर कोशिश करने के बाद जब वह पूरी तरफ से असफल रहा उसने सोचा शायद ओमार ओगलु के घर जा कर उसे पासवर्ड का कोई सुराग मिल जाये।

वो अब ओमार ओगलु के घर में बहुत सावधानी से इधर-उधर देखता हुआ कूद गया,उसने ओमार ओगलु का पूरा घर तीतर-बितर कर दिया पर कोई सुराग नही मिला,फिर उस के मन में नीचे तेख़ाने में जाने का विचार आया जिसमे उसने ओमार ओगलु की लाश छुपाई थी।

ठपाक! उसने तेख़ाने का दरवाज़ा खोला और नीचे जाने लगा।
ठक...ठक...ठक... करते उसके कदम ओमार ओगलु की लाश तक बढ़े उसने ओमार ओगलु की लाश देखने के लिए संदूक खोला खटाक!

ओमार ओगलु की लाश वहाँ नहीं थी।

वो आश्रयचकित हो उठा,उसने तुरंत सीढ़ियों की तरफ देखा और भागना शुरू किया,भागते हुए सीधा अपने घर मे आया और अपना बैग पैक करना शुरू कर दिया।


सारा सामान रखने के बाद उसने लैपटॉप को भी बैग में रखा।

तभी अचानक से कुछ आवाज़ें सुनाई दीं,

गड़गड़गड़गड़गड़..... और एक हेलीकॉप्टर उसे अपनी खिड़की के बाहर दिखाई दिया,उसने रूम के पिछले हिस्से में भागना शुरू कर दिया और सीढ़ी चढ़कर सीधा छत पर पहुँच गया,छत पर पहुँचते ही उसने देखा उसके ऊपर दो हेलीकॉप्टर मंडरा रहे थे,उसने तुरंत छत पर लगे आपातकालीन अग्निशमन पाइप की तरफ देखा और झट से उसे पकड़ कर खींचते हुए भागने लगा,इतना देख हेलीकॉप्टर में बैठे लोगों ने उस पर गोलियां बरसना शुरू कर दीं।

लेकिन उसने एक क्षण भी बिना देरी किये पाइप का सहारा लेकर छत से छलांग लगा दी,वो नीचे बहुत तेज़ी से आने लगा,लेकिन ये क्या पाइप तो छोटा पड़ गया अब शौर्य ज़मीन से तकरीबन दो मंज़िल ऊपर लटक कर रह गया था।

तभी उसकी नज़र सामने कांच की खिड़की पर गई,उसने कस के पाइप को पकड़ कर ज़ोर लगाया और दीवार पर दो-तीन बार अपने पैर की सहायता से अपने शरीर को लंबे झोंके दिए और खिड़की तोड़ता हुआ कमरे में दाखिल हो गया।

वो तुरंत संभला और उसने रूम का दरवाज़ा खोला बाहर निकला, तभी उसने देखा दोनों तरफ से कमांडो की पोशाक में हाथ में बड़ी-बड़ी बन्दूकें लिए कुछ लोग उसकी तरफ भागते हुए आ रहे थे।

उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि ये लोग क्यों उसके पीछे पड़े हैं अब उसके पास सिर्फ लड़ने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा था।

ज़िईईप! उसने तुरंत अपना बैग खोला और अपने हथियार निकाल लिए।

वो दोनों हाथों में बड़ी-बड़ी बंदूक लिए दरवाज़ा खोलकर उनके सामने आ गया।
टिक टिक घड़ी की सुइयां चल रही थीं दायीं और बायीं दोनों तरफ से लोग भागते हुए आ रहे थे।
शौर्य ने अपने दोनों हाथ दोनों दिशाओं में उठा दिए और शुरू कर दिया विनाश घोर विनाश !

धड़धड़ धड़धड़ धड़धड़ !

फायरिंग शुरू हो चुकी थी,शौर्य की बंदूक से निकली गोलियां दुश्मनों को मानो ढूंढ ढूंढ कर उनके जिस्म में घुस रही थीं।

एक कमांडो की लाश गिरती तो दूसरा उसे देख भी नहीं पा रहा था कि उसकी लाश गिर जाती,इतनी बिजली की रफ्तार से गोलियां बरसा रहा था अपना वीर जवान शौर्य।

कभी लेटकर,कभी घुटनों पर बैठकर ,कभी दीवारों पर छलांग लगा कर उड़ते हुए छत्तीस पैंतरों से उसने अपनी गोलीबारी की कलाओं का प्रदर्शन किया और दुश्मनों को धराशायी करता गया।

खट्ट-खट्ट ! खट्ट !

ये आवाज़ें गोलियां खत्म होने की थीं,अब सिर्फ बाज़ुओं का सहारा बचा था,उसने दोनों गन्स सामने आते हुए कमांडो पर फेंकी और फिर उसका हाथ पकड़ कर अपने कंधे पर रख कर तोड़ दिया और उसी की गन लेकर बालकनी की तरफ भागना शुरू किया और सीधा सड़क की तरफ कूद गया।

कूदते ही वो लाल चमकीली कार के सामने खड़ा हुआ और गन देखकर कार का ड्राइवर बाहर निकल कर भाग गया,शौर्य तुरंत उस कार में बैठा और रवाना हो गया।

उसकी कार के ऊपर आवाज़े आना शुरू हो गईं
गड़गड़ गड़गड़.....दोनों हेलीकाप्टर उसकी कार के ऊपर मंडराने लगे ।

फिर एक आवाज़ आई खट्ट! उसने कार का गियर डाला और अपनी कार को रफ्तार दी और कार अब हवा की रफ्तार में थी।

तभी उसकी कार के पीछे जट्ट-जट्ट की आवाज़ें आना शुरू हो गयीं,उसने कार के शीशे में देखा दो बाइक उसका पीछा कर रही थीं और उस पर सवार आदमी उस पर गोलियां चला रहे थे।

उसने कार का दरवाज़ा खोला और बाहर की तरफ लटक कर फायरिंग कर दी उसकी एक गोली ज़ू..... करती हुई निकली और सीधे एक बाइक सवार के जिस्म में जा घुसी और वो वहीं गिर कर ढेर हो गया।

शौर्य अंदर वापस स्थिर हो कर अपनी सीट पर बैठा और कार की स्टेयरिंग सम्भाली और खटाक से कार का दरवाज़ा बंद किया।

उसने देखा सामने दो ट्रक थे जिन दोनों के बीच बहुत सीमित जगह थी उसने बिना कोई संकोच किये कार का स्टेयरिंग दायीं तरफ झटके से घुमाया और कार दो पहिये पर चलने लगी और दोनों ट्रक के बीच से होकर गुजर गई।

बाइक सवार भी उन्हीं दो ट्रक के बीच मे घुस गया लेकिन जब तक शौर्य की कार को देख एक ट्रक ड्राइवर का बैलेंस बिगड़ गया और दोनों ट्रक आपस मे करीब आ गए और एक आवाज़ हुई, ढप !

और बाइक सवार उन दोनों ट्रॅक के बीच दब गया।

उसने कार को सामान्य स्तिथि में किया और कार की रफ्तार बढ़ाई,लेकिन अभी जान कहाँ छूटने वाली थी,एक हेलीकाप्टर में बैठे एक कमांडो ने एक ग्रनेड शौर्य की कार पर दाग़ दिया लेकिन इस से पहले शौर्य उसका शिकार बनता उसने कार से छलांग लगा दी।

और बूम्म...!

कार में धमाका हुआ और शौर्य सड़क पर से उठकर खड़ा हुआ और उसकी निगाह फ्लाईओवर के किनारे लगी एक लोहे की सरिया पर पड़ी उसने झट से सरिया को उखाड़ लिया और बाज़ू घुमा कर उस सरिया को सीधे हेलिकॉप्टर की तरफ फेका और सरिया धछ से जा कर पायलेट के सीने में जा घुसा।

और फिर हेलीकाप्टर बेकाबू हो कर ज़मीन पर आ गिरा और भड़ाम से हेलीकाप्टर में धमाका हुआ।

लेकिन दूसरा हेलीकॉप्टर तो अब शौर्य के करीब आ रहा था,उसमे बैठा कमांडो शौर्य पर निशाना लगाए हुए था और शौर्य के पीछे ज़ूरररर....किर्रर्रर्ररर....करके 5 कारें आ कर रुक गयीं और उसमें से उतरे लोगों ने उस पर बन्दूकें तान दीं।

शौर्य को लगा अब सब खत्म उसने जल्दी से अपना बैग उतारा (जिसमें लैपटॉप था) और फ्लाईओवर के दायीं तरफ समंदर की ओर फेंक दिया ये देख उसके पीछे लगे कमांडो क्रोधित हो उठे,जैसे ही उन्होंने शौर्य को निशाना बनाना चाहा,तभी एक और हेलिकॉप्टर की आवाज़ सुनाई दी।

गड़गड़ गड़गड़ गड़.....

शौर्य ने उसी समंदर की दिशा में देखा जिस दिशा में उसने बैग फेका था,
उसे दिखा की फ्लाईओवर की दीवार की बगल से एक हेलिपकॉप्टर ऊपर उठ रहा है और विशालकाय हेलीकाप्टर बिल्कुल सटीक दिख रहा था और उसके पायदान पर लटका बैग झूल रहा था जैसे उम्मीद प्रसन्न हो कर विजय के आसमान में झूल रही हो।

हेलीकाप्टर में बैठे व्यक्ति ने दुश्मन के हेलिपकॉप्टर पर फायर किया और भड़ाम करके वो हेलिकॉप्टर ध्वस्त हो गया।

फिर उस व्यक्ति ने निशाना लगाने के बाद अपनी बंदूक नीचे की तो उसका तेजस्वी चेहरा सामने आया और वो चेहरा किसी और का नही ज़मीर का था।

हाँ वही ज़मीर जिस से शौर्य चीन की एक्सपोर्ट फैक्ट्री में मिला था,वही मजबूर मज़दूर।

और उसके पीछे बैठे 15-20 कमांडो जो वही मज़दूर थे जिनसे शौर्य चीन की एक्सपोर्ट फैक्ट्री में मिला था और जिन्हें हिंदुस्तान भेजने में शौर्य ने सहायता की थी।

शौर्य बस एक टूक उन सबको देखे जा रहा था,तभी ज़मीर हेलिपकॉप्टर से उतरा और दो उंगलियों के इशारे से सबको बाहर आने के लिए कहा और उसके सारे कमांडो धप-धप करके सभी हथियारों से लैस फ्लाईओवर पर उतर गए।

और सामने खड़े दुश्मनों को ध्वस्त करने लगे कुछ ही सेकंडों में उस जगह सिर्फ और सिर्फ लाशें थीं,जगह-जगह धुआँ,जलती आग उल्टी सीधी पड़ी जलती कारें और दो फुके हुए हेलिपकॉप्टर थे।

मंज़र ऐसा था कि प्रलय आ गया हो थोड़ी देर बाद पुलिस के सायरन बजने लगे मीडिया की आवाज़ें आने लगी इतने में ये सब इस जगह पर पहुँचते ज़मीर ने शौर्य को पकड़ कर हेलीकॉप्टर में डाल दिया और वो वहाँ से उड़न छू हो गए।

उसी रात इस्तांबुल के किसी पुराने चर्च में,
सामने बैठा शौर्य ज़मीर को देख रहा था,टिक टिक घड़ी की सुइयों की आवाज़ बहुत साफ सुनाई पड़ रही थी इतनी शांति थी वहाँ तभी उस शांति को चीरते हुए घड़ी के घंटे की आवाज़ सुनाई दी "ठन"!
और शौर्य के सामने चर्च का दरवाज़ा खुला ठक!
दरवाज़े पर खड़ा था एक आदमी लंबे ओवर कोर्ट में और सर पर एक लंबा काला हैट,ठक ठक ठक कदमो की आवाज़ करके आगे आने लगा और चलते-चलते उसने अपने हैट को उतार दिया और रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी और चेहरा साफ दिखाई दिया।

चेहरा था गुरमीत चड्ढा का हाँ वही भारतीय दूतावास का कर्मचारी जो चीन में शौर्य को मिला था,जिसने शौर्य को शिन झाओ तक पहुंचाया था।

तभी शौर्य ने गुरमीत की तरफ देखा और उसके मुँह से निकले ये शब्द "गुरमीत" तुम।

तभी गुरमीत ने एक हल्की मुस्कान दी और शौर्य की गलतफहमियां दूर की।

गुरमीत : नहीं, जेम्स वाड्रा।

शौर्य : तुम जेम्स वाड्रा हो?

गुरमीत : यस आई एम जेम्स वाड्रा !

इसके तुरंत बाद ही ज़मीर ने भी कुछ कहा-

ज़मीर : और मैं हूँ,अहान ख़ान ।

फिर जेम्स वाड्रा ने शौर्य के मन मे उलझी पहेलियों को सुलझाने में मदद की।

जेम्स : दरसअल बहुत लंबी कहानी है, शौर्य जिस संगठन के
के लिए तुम काम करते हो वो कोई दुनिया का
हितकारी नहीं बल्कि उसका सबसे बड़ा दुशमन है।

फिर जेम्स शौर्य को कुछ साल पीछे ले जाता है वो बताता है
की मैं भी "I S A C O" (भारतीय गुप्त अपराध निरोधक संगठन) के लिए काम करता था।

और वो संगठन का सर्वश्रेष्ठ एजेंट था,मुरली अरियप्पा के सबसे करीब और देश का भला चाहने वाला और उस पर जान कुर्बान करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाला व्यक्ति।

जेम्स को कुछ वर्षों के लिए चीन भेजा गया था,एक गुप्त मिशन पर,उसका लक्ष्य था चीनी प्रयोगशाला में जा कर वहाँ से एक फार्मूला ले कर आना,उसे बताया गया था कि उस फार्मूला में एक खास वायरस तैयार करने की विधि है इस वायरस को तैयार करके चीन पुरी दुनिया मे वायरस फैला कर राज करना चाहता है।

जेम्स अपने लक्ष्य में सफल हुआ उसने चीन की प्रयोगशाला से उस फार्मूला को चुरा कर,मुरली अरियप्पा को सौंप दिया।

एक दिन एक सुनसान रेगिस्तान में एक हेलीकाप्टर उतरता है चारो तरफ रेत ही रेत उड़ने लगी,फिल्मी अंदाज़ में उस हेलीकाप्टर से बाहर आया जेम्स वाड्रा और वहाँ दो लोग और भी थे मुरली अरियप्पा और डॉक्टर फैज़ान मलिक और साथ मे कुछ बॉडी गार्डस।

जेम्स सीधा उन दोनों के पास पहुँच गया और जेम्स ने वो फार्मूला मुरली को दे दिया,मुरली ने उसे शाबाशी दी और कहा "मुझे पूरा भरोसा था कि तुम ही ये काम कर सकते थे जेम्स और कोई नही कर सकता था"।

तभी बीच मे टोकते हुए डॉक्टर फैज़ान मलिक ने कहा कि "भला अपनी जान गवा कर कौन देश के लिये इतना कुछ करता है"।

डॉक्टर के ये लफ्ज़ सुनकर जेम्स चोंक गया,और उसने कहा "जान गवा कर लेकिन मैं तो ज़िंदा हूँ"।

"हाहाहा, थोड़ी देर के लिए फिर तो तुम्हारी जान जाने ही वाली है" मुरली ने एक हास्यपद लहज़े में कहा।

फिर मुरली ने जेम्स को बताया की जेम्स का इस्तेमाल किया गया है चीन से जो फॉर्मूला जेम्स चुरा कर लाया है वो वायरस बनाने का नही,वायरस को खत्म करने वाली दवाई का फॉर्मूला है,दरअसल चीन और अमेरिका मिलकर चीन में एक वायरस तैयार कर रहे थे जिसका नाम है कोरोना (covid 19) इसे जान बूझ कर चमगादड़ से निकाला गया,
और तैयार किया गया।

लेकिन उस वायरस को तैयार करने के लिए चीन और अमेरिका साथ मे काम कर रहे थे,अमेरिका चीन को आर्थिक सहायता देता था और चीन के वैज्ञानिक इस पर खोज करते थे।

इस के पीछे मकसद था की पूरी दुनिया में इस वायरस को फैला कर सभी देश मौत की सीमा पर पहुँच जाएं और दोनों विदेशी ताकतें उन पर कब्ज़ा कर लें।

लेकिन उन्होंने इस वायरस को तैयार करने के साथ ही इसका एन्टी डॉट (प्रतिरोधक) भी तैयार कर लिया था,ताकि दोनों देश अपने लोगों को इस वायरस से बचा सकें।

और वायरस की दवाई का फार्मूला जेम्स से मंगवाया गया और डॉक्टर फैज़ान मलिक और मुरली अरियप्पा वायरस के फैल जाने के बाद उस वायरस की दवाई को ऊँचे दामों पर दुनिया में बेचना चाहते थे।

इतना सुन कर जेम्स का खून खोल गया उसने जैसे ही हथियार निकालने की कोशिश की,मुरली ने तुरंत उस पर गोली दाग़ दी और जेम्स वहीं पर गिर गया।

मुरली और डॉक्टर फैज़ान उसकी लाश को चील-कौवों के लिए छोड़ गए थे और उस फॉर्मूला को ले गए।

कुछ देर बाद....

जेम्स की पलकें हिलीं उसमे थोड़ी जान बाकी थी उसने अपनी जेब से एक यंत्र निकाला और उसका बटन दबा दिया,
उस यंत्र से जेम्स की टीम को एक संदेश पहुँच गया साथ ही उसकी लोकेशन भी,अहान खान को संदेश प्राप्त हुआ थोड़ी देर में ही जेम्स की टीम हेलीकॉप्टर के ज़रिए वहाँ पहुँच गयी और जेम्स को बचा लिया गया।

कुछ दिन बीत जाने के बाद जेम्स और उसकी टीम मुरली और डॉक्टर फैज़ान पर निगरानी करने लगे जेम्स की टीम ने पता लगाया कि उस फॉर्मूला की जो हार्ड डिस्क थी (कॉम्प्यूटर व लैपटॉप की विशेष प्रकार की मेमोरी) उसे एक लैपटॉप में जोड़ दिया गया है और वो डॉक्टर फैज़ान के पास है।

मुरली को नहीं पता था कि जेम्स की टीम उसके कार्यालय में ही कार्य करती है जेम्स की टीम ने उस लैपटॉप को डॉक्टर फैज़ान की लैब से चुरा लिया।

लेकिन ये बात मुरली और डॉक्टर फैज़ान को मालूम हो गयी,और उन्होंने हमारे लोगों को डिपार्टमेंट में पहचानना शुरू कर दिया और उन्हें ढूंढ कर पूछताछ करते पर कोई भी जानकारी न मिलने की वजह से उन लोगों को मारना शुरू कर दिया।

जेम्स और उसकी टीम के बचे हुए साथी लैपटॉप को ले कर चीन चले आये।
और मुरली ने जेम्स को माफिया और देश द्रोही बता दिया और उसके सभी डिपार्टमेंट से जुड़े रिकॉर्ड मिटा दिए।

जेम्स ने उस लैपटॉप को खोल कर उसमें से फॉर्लमुला की फाइल को निकालने की कोशिश की तो पता लगा कि ये बिना पासवर्ड के नही खुल सकती और इसका पासवर्ड डॉक्टर फैज़ान के पास है।

इतने में चीन ने इस वायरस को दुनिया मे फैलाना शुरू कर दिया इस भरोसे की उसके पास तो वायरस की दवाई है,
लेकिन लैब में दवाई का फार्मूला न मिलने पर उन्हें पता चला कि उसे तो चुरा लिया गया है और फार्मूला दोबारा बना नही सकते थे,क्योंकि चीनी सरकार ने फार्मूला बनाने वाले वैज्ञानिकों को पहले ही मृत्यु लोक भेज दिया था,ताकि मिशन गुप्त रहे।

और बहुत देर हो चुकी थी दुनिया के खिलाफ साजिश करने वाले दोनों देश अपने आप को ही जला बैठे थे,
इधर जेम्स के पास इसकी दवाई थी पर पासवर्ड दुश्मनो के पास था।

इसी बीच जेम्स को पता लगा लैपटॉप का पासवर्ड तोड़ने में चीन में एक व्यक्ति माहिर है जिसका नाम था शिन झाओ का पति मिन सु जेम्स उसकी बर्थ डे पार्टी के बहाने मिन सु के घर गया और पासवर्ड तोड़ने के लिए कहा और उसे पैसों का लालच दिया।

लेकिन उस से ये पासवर्ड नही टूटा।

मिन सु और शिन झाओ गुरमीत चड्ढा के मुखबिर थे उन्होंने ये बात गुरमीत को बताई और गुरमीत ने मुरली को।
और इसी दौरान डॉक्टर फैज़ान और मुरली ने झूठी नुक्लेयर मिसाइल की कहानी बनाकर शौर्य को लैपटॉप वापस लाने के लिए चीन भेज दिया था।

जब जेम्स को ये बात पता लगी तो उसने एक प्लान बनाया,वो गुरमीत को मार कर खुद गुरमीत बन गया और उसका फ़ोन लेकर शौर्य का फोन आने का इंतेज़ार करने लगा।

और एक दिन यही हुआ शौर्य का फोन आया और जेम्स उस से गुरमीत बन कर मिला ।
उसके बाद जेम्स एक बार फिर मिन सु से मिला और जेम्स ने उसे कुछ पैसे दिए तब मिन सु ने जेम्स को बताया कि ओमार ओगलु नाम का एक व्यक्ति इस्तांबुल में रहता है वो शायद इसका पासवर्ड तोड़ सकता है।

जेम्स ओमार ओगलु से मिलने इस्तांबुल चला आया इसी बीच उसे पता चला कि मिन सु मारा गया और शौर्य जेम्स को ढूंढता फिर रहा है और उसे पता चल गया है कि जेम्स इस्तांबुल में ओमार ओगलु से मिलने गया है और शौर्य ने भी इस्तांबुल जाने के लिए चीन की एक एक्सपोर्ट फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया है और उसी फैक्ट्री में जेम्स की टीम नाम बदल कर काम कर रही है जिसमे अहान खान (ज़मीर) उनका नेतृत्व कर रहा था।

इधर जेम्स ने ओमार ओगलु से कई बार मुलाक़ात की पर उसका पासवर्ड तोड़ने में वह हर बार असफल रहा,अब जेम्स समझ चुका था कि इसका पासवर्ड सिर्फ डॉक्टर फैज़ान ही जानता है और उसके लिए इस लैपटॉप को वापस डॉक्टर फैज़ान के पास भेजना होगा।

और इसीलिए उसने प्लान बनाया की अहान खान और पूरी टीम मिलकर शौर्य को तुर्की पहुँचने में सहायता करें, इसलिए अहान खान(ज़मीर) ने शौर्य को फोन करके तुर्की जाने वाले कन्साइनमेंट के बारे में बताया।

और जेम्स ने शौर्य को जानबूझ कर अपने पास आने का मौका दिया,और फिर ओमार ओगलु को कुछ पैसे देकर मरने का नाटक करने को कहा।

और उस दिन अपने एक आदमी को ओमार के घर भेज कर ओमार की हत्या का नाटक किया और ओमार की जेब मे वो कागज़ का टुकड़ा डाला जिस पर जेम्स ने लिखा था,
"मुझसे मिलने की ख्वाहिश में कब्रिस्तान पहुँच जाओगे"
ताकि शौर्य को लगे कि उसे कब्रिस्तान आने के लिए इंगित किया गया है।

और उससे पहले ही जेम्स ने कब्रिस्तान पहुँच कर अपनी नकली कब्र बनाई और उसमें लैपटॉप दफना दिया।

ऐसा जेम्स ने इसलिए किया ताकि शौर्य उस लैपटॉप को लेकर भारत चला जाये और डॉक्टर फैज़ान और मुरली को देदे और जैसे ही डॉक्टर फैज़ान पासवर्ड उसमें डाले और जेम्स और उसकी टीम डॉक्टर फैज़ान को लैपटॉप समेत अग़वा करके जबरन उस से फ़ाइल खुलवा ले।

लेकिन ऐसा नही हुआ,क्योंकि मुरली को कोई भी सबूत नही छोड़ना था,उसने पहले से ही तय कर रखा था कि शौर्य को लैपटॉप मिलते ही वो अपने लोग उसके पास भेज कर उसे मरवा देगा और लैपटॉप ले लेगा साथ ही कोई ऐसा सबूत भी नही बचता जिस से वो किसी तरह के शक के घेरे में आये।

वो तो शुक्र है कि जेम्स शौर्य पर अपनी टीम के द्वारा उसकी निगरानी कर रहा था,और वक़्त पर अहान खान को टीम के साथ भेज कर शौर्य की जान बचा ली।

तभी एक आवाज़ हुई ठन!
चर्च की घड़ी का दूसरा घंटा बज चुका था।

शौर्य अतीत से बाहर आया और उसे बहुत अफ़सोस हुआ,
की वो ऐसे संगठन के लिए काम कर रहा है जो भ्रष्ट है।
फिर उसने जेम्स से गुफ्त गु शुरू की.....

शौर्य : बहुत ही पेचीदा कहानी है ये।

जेम्स : लेखक ने इतनी मेहनत से लिखी है पेचीदा तो होगी
मतलब ऊपर वाले ने,वही तो लिखता है इस दुनिया
की सारी सच्ची कहानियां।

शौर्य : अब तक उन लोगों को सब मालूम चल गया होगा,
बिना पासवर्ड के ये लैपटोप भी किसी काम का नही,
और कोरोना तेज़ी से दुनिया मे फैल रहा है,इस
वायरस ने भारत मे भी कदम रख दिया है इसे कैसे
रोकें?


इधर भारत में मुरली अरियप्पा अपने ऑफिस के ट्रैकिंग रूम में लगी स्क्रीन पर शौर्य की लोकेशन ट्रैक करवा रहा रहा था और फिर मुरली एक फोन मिलाता है,

"वो इस्तांबुल के पुराने चर्च में छुपा बैठा है जल्दी से वहाँ हमारी फ़ोर्स भेजो" कड़क आवाज़ में इतना कह कर उसने फोन काट दिया।

इधर शौर्य ये सोच रहा था कि उस पर हमला करने के लिए मुरली ने जो कमांडो भेजे थे उनको शौर्य के ठिकाने का पता कैसे चला,उसने तो अपनी लोकेशन किसी को बताई नही थी।

तभी जेम्स ने उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा क्या सोच रहे हो,जांबाज़।

शौर्य ने जवाब दिया कि उसे मेरी लोकेशन का पता कैसे चल गया था,मैं इस बारे में सोच रहा था।
ये सुन कर जेम्स ने तुरंत शौर्य की तलाशी लेना शुरू कर दी
वो भी इस बात पर गौर करना भूल गया था,और तलाशी लेते से समय जेम्स के हाथ में लगी एक माइक्रो चिप जो शौर्य की बंदूक के अंदर छुपी हुई थी।

तुरंत ही जेम्स ने कहा "शौर्य इसका मतलब,मुरली इस चिप के ज़रिए से पता लगाता था,की तुम कहाँ हो।
और उसे अब इस जगह के बारे में भी मालूम हो गया होगा,हम लोगों को अब यहां से निकलना चाहिए।"

अहान ने सारे साथियों को इशारा किया और सब चर्च के बाहर आ गए,जैसे ही वो सब बाहर आये,उनके चेहरे पर तेज़ प्रकाश पड़ा और हेलिकॉप्टरों ने उन्हें घेर लिया उन पर गोलीबारी शुरू कर दी,धीरे-धीरे सब मरने लगे।

जेम्स की पूरी टीम खत्म होने लगी,जेम्स जैसे-तैसे अपने आपको और शौर्य को छुपते-छुपाते पीछे के रास्ते से जंगल मे ले गया और दोनों एक झील के किनारे पहुँच गए,वहाँ जेम्स की एक प्राइवेट जेट स्की (स्वचालित नाव) खड़ी थी।

जेम्स ने शौर्य को वो जेट स्की दी और लैपटोप दिया और कहा "अब तुम्हारे कंधे पर देश के साथ पूरी दुनिया की ज़िम्मेदारी है,तुम मर जाना,मिट जाना पर अपनी मंज़िल तक पहुँच जाना"।

शौर्य ने उसे अपने साथ चलने के लिए कहा पर वो नही माना जेम्स ने कहा "मेरे लोगों का मुझ पर कर्ज़ है और आज मुझे वो क़र्ज़ उतारने का मौका मिला है मैं उन का साथ नही छोड़ सकता" ।

और शौर्य को उसने वहाँ से भेज दिया और उसके कानों में उसके साथियों की चीखें सुनाई पड़ी और जेम्स क्रोधित हो उठा और उसने वापस चर्च की तरफ दौड़ना शुरू किया,वह दौड़ते हुए वहाँ पहुंच गया।

जेम्स ने अपना ओवर कोर्ट खोला और उसमें से दो बंदूके निकाल कर पहला फायर एक हेलीकॉप्टर के फ्यूल टैंक पर किया और हेलीकॉप्टर धमाके से जल उठा।

दूसरा फायर उसने सामने आते हुए कमांडो पर किया वो भी वहीं धराशायी हो गया और जेम्स ऐसे ही एक के बाद एक दुश्मनों को गिराता हुआ आगे बढ़ने लगा,उसे देख बाकी साथियों में भी हिम्मत आ गयी थी मानो वो भी बहादुरी से मुक़ाबला करने लगे।

अहान हाथ मे हैंड ग्रेनेड लेकर दौड़ता हुआ एक हेलीकाप्टर के पास गया और एक छलांग मारी और हेलीकाप्टर का पायदान पकड़ कर लटक गया उसमे बैठे एक व्यक्ति ने उसके हाथ मे हैंड ग्रेनेड देखा और अहान पर वार करने लगा और अहान ने हैंड ग्रेनेड की पिन निकाली और एक धमाका हुआ भड़ाम और हेलीकॉप्टर ध्वस्त हो गया और अहान भी शहीद हो गया।

ऐसे ही करते-करते हर एक जेम्स का साथी वीरगति प्राप्त करता चला गया,ये देख जेम्स हताश होने लगा उसने दुश्मनों पर और आक्रामक हमले शुरू कर दिए अब सिर्फ एक ही हेलीकाप्टर बचा था उसमें से एक व्यक्ति की आवाज़ आती है कि "अरे इसे छोड़ो उस लड़के को ढूँढ़ो जिसके लिए हमें यहाँ भेजा गया है हेलीकाप्टर झील की तरफ लो"और वो लोग हेलीकाप्टर लेकर शौर्य की तरफ ले गए झील की दिशा में।

इधर,शौर्य झील को चीरता हुआ जेट स्की लेकर भागे जा रहा था,तभी उस पर एक प्रकाश पड़ा उसने पीछे देखा तो हेलीकाप्टर उसके पीछे आ रहा था इतने में हेलीकाप्टर में बैठे कमांडो ने गोलियां बरसाना शुरू कर दीं।

अब तो जैसे खेल खत्म होने को था,घुररररर....घुररररर करती एक और आवाज़ सुनाई दी शौर्य ने पीछे मुड़ कर देखा जेम्स जेट स्की लेकर उसको बचाने आ गया था,उसका ओवर कोर्ट उतरा हुआ था और जेम्स का एक हाथ जेट स्की के एक्सीलरेटर पर था जो पूरा घूमा हुआ था और दूसरे हाथ मे लोहे की एक मोटी जंजीर जिसके आगे एक हुक था।

जेम्स ने जेट स्की हवा में उछाली और हेलीकॉप्टर के करीब से होकर निकलने के दौरान उसने वो जंजीर का हुक हेलीकॉप्टर के पायदान में फंसा दिया और जेट स्की हवा में से वापस पानी पर आई और जेम्स ने तुरंत जेट स्की का रुख हेलिपकॉप्टर की उलट दिशा में मोड़ दिया।

अब हेलीकाप्टर और जेट स्की आपस मे जंजीर से जुड़ चुके थे,हेलीकॉटर शौर्य को पकड़ने के लिए आगे बढ़ने की कोशिश करता लेकिन जेम्स उसे जेट स्की से दूसरी तरफ खींचने लगता।

बस आवाज़ें आ रहीं थीं हेलीकाप्टर की गड़गड़......गड़गड़............
जेट स्की की घुर्रर्ररर........घुरररररर......

शौर्य आगे निकल चुका था और जेम्स ने दुश्मनों को थाम रखा था।
तभी जेम्स ने आवाज़ लगाई और कहा "उसके पीछे जाना बेकार है आओ मैं तुम्हें जहनुम की तरफ ले चलता हूँ"

और जेम्स ने एक्सीलरेटर के नीचे लगा बटन दबा दिया जिसको दबा देने के बाद जेट स्की की नाइट्रो (रफ्तार बढ़ाने वाली एक विशेष गैस) चालू हो गयी और जेट स्की बहुत तेज़ी से हेलीकाप्टर को खींच कर आगे बढ़ने लगी।

जेम्स जेट स्की को इधर-उधर मोड़ रहा था जिस से हेलीकाप्टर झील के किनारे लगे पेडों से टकरा रहा था और उसे क्षति पहुँच रही थी।

और टकरा कर वो आखिर कार भड़ाम से ध्वस्त हो गया साथ ही धमाके से जेम्स झील के किनारे जा गिरा उसने अधमरी सी हालत में जेब से एक सिगार निकाला और लाइटर से जलाया और लंबे कश लेने लगा और कहने लगा-

"जब अपनी कब्र खुद खोदोगे तो मौत को तो मौका मिलेगा ही मुलाक़ात का,ज़िन्दगी भर लड़ा अब सिर्फ आराम करूँगा थक गया हूँ मैं,सिर्फ आराम"।

ये शब्द कह कर उसकी आँखें बोझल हो गयीं और वो वीर हमेशा के लिए सो गया।

उसके बाद वक़्त बीतता चला गया कोरोना का आतंक बढ़ता चला गया लोग मरने लगे इस ला इलाज बीमारी से दुनिया में हाहाकार मच गया।

भारत में इस बीमारी ने आतंक मचाना शुरू कर दिया था,देश के प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन (गृहबन्दी) कर दिया ताकि जनता की जान बचाई जा सके।

और शौर्य का भी कोई पता नही था कि वो कहाँ है?

1 जून,2020 भारत ।
I S A C O दफ्तर में,

डॉक्टर फैज़ान : तुम एक इंसान को महीनों से नही पकड़
पाए शर्म की बात है।

मुरली : पता नही उसे धरती खा गई या आसमान निगल
गया,शौर्य को ये मिशन दे कर मैंने जीवन की सबसे
बड़ी गलती की है।

डॉक्टर फैज़ान : जल्दी उसे ढूँढ़ो कोरोना की दवाई की
क़ीमत विदेशी मुँह मांगी देने को तैयार हैं।


काफी समय बीत गया,शौर्य क्यूबा के किसी जंगल में समंदर के किनारे रहने लगा था बिल्कुल अकेला एक लकड़ी का घर उसने बना लिया था वो खाना बनाने के लिए लकड़ी जला रहा था,तभी एक हेलीकाप्टर वहाँ उतर आया,उसमें से मुरली बाहर निकल कर आया।

शौर्य उसे देख रहा था और मुरली उसके पास आ खड़ा हुआ,और फिर.....

मुरली : तुम्हे ढूंढना इतना मुश्किल भी नही था,शौर्य तुम
बुद्धिमान हो और हो तो शिष्य ही एक गलती कर
ही बैठे,अपनी गर्ल फ्रेंड को फोन हमने तुम्हारी गर्ल
फ्रेंड का फोन ट्रैकिंग पर लगाया और उसमें तुम्हारा
कॉल दिखा और तुम्हारी लोकेशन निकाल ली।

शौर्य : मैं लैपटॉप नही दूँगा,मैं मर जाऊंगा तब भी नही।

मुरली : मुझे इसी जवाब की उम्मीद थी,लेकिन जब कोई
अपना मरने वाला हो तो शायद तुम्हें सोचना पड़
सकता है,जैसे तुम्हारी गर्लफ्रैंड।

इतने में हेलीकाप्टर से डॉक्टर फैज़ान बाहर आया और वो भी शौर्य के पास आ खड़ा हुआ और शौर्य से कहा-

डॉक्टर फैज़ान : वैसे भी शौर्य तुम्हारी गर्लफ्रेंड बहुत
खूबसूरत है कहीं उसे मेरी नज़र न लग
जाए।

इतना सुनने के बाद,शौर्य ने चाकू से डॉक्टर की बाज़ू पर वार किया और डॉक्टर ने हाथ से अपना घाव दबा लिया,

तभी,मुरली बोल पड़ा,
"फैज़ान इसे थोड़ा वक्त देते हैं,इतना बड़ा फैसला है,थोड़ा मुश्किल होगा इसके लिए"।

इतना कह कर मुरली डॉक्टर को लेकर वापस चला जाता है और शौर्य आसमान में जा रहे हेलीकाप्टर को देख कर महसूस करने लगा जैसे कोई उड़ता हुआ हैवान जा रहा है।


दो दिन बाद,शौर्य ने दिल्ली में कदम रखा और फोन मिलाया मुरली को और उसे किसी एकांत जगह का नाम बता कर अपनी गर्लफ्रैंड को लाने के लिए कहा और लैपटॉप ले जाने के लिए कहा,लेकिन मुरली ने शौर्य को दफ़्तर आने को कहा।

10 जून,शाम 5 बजे,I S A C O दफ्तर,नई दिल्ली।

शौर्य बिल्डिंग में घुसा तो सबकी निगाह उसी पर जम गयीं,मानो उसे नोच खाएंगे सब वो सबको नज़रअंदाज़ करता हुआ सीधे मुरली के केबिन में जा पहुँचा।

शौर्य : अहाना कहाँ है?

मुरली ने गार्ड्स से अहाना को लाने के लिए कहा,थोड़ी देर बाद 2 लोग उसे ले आये और शौर्य ने आँखों ही आँखों में अहाना को हिम्मत रखने का इशारा दिया डरी सी अहाना अब थोड़ी खुश थी,क्योंकि उसे पक्का विश्वास था शौर्य के ऊपर।

थोड़ी देर बाद डॉक्टर फैज़ान भी वहाँ आया और उसने सारे गार्ड्स को बाहर जाने के लिए कहा और सब गार्ड्स बाहर चले गये,फैज़ान ने शौर्ये से लैपटॉप लिया और उसमें वो फ़ाइल है या नहीं ये चेक करने के लिए लैपटॉप खोला,इस बीच मुरली शौर्य से कुछ कहने लगा-

मुरली : तुम इस ग़लत फहमी में तो नही की लैपटॉप मिलने
के बाद तुम दोनों को यहाँ से जाने दिया जाएगा।

इतना सुन कर अहाना थोड़ी घबराने लगी लेकिन शौर्य ने उसे शांत किया और वो सामान्य हई।

इधर फैज़ान लैपटॉप से फ़ाइल निकालने का प्रयास कर रहा था,उसने लैपटॉप का एक गुप्त बटन दबाया और लैपटॉप के किनारे से एक कांच की प्लेट बाहर आई,फिर फैज़ान ने एक पैनी सुईं नुमा चीज़ ली और अपने हाथ के अंगूठे पर झटके से मारी और अंगूठे से एक बूंद खून बाहर आया,फिर फैज़ान ने वो खून का कतरा लैपटॉप की कांच की उस प्लेट पर डाल दिया और लैपटॉप की स्क्रीन पर लिखा आया "DNA MATCH PASSWORD ACCEPTED" और वो फ़ाइल खुल गई लेकिन फैज़ान ने देखा कि फ़ाइल में कोई शेर लिखा है

"खत्म हुई ज़ुल्म की महफ़िल,मैखाने सूख गए खून के,हम आज़ाद पंछी हैं और ग़ुलाम अपने जुनून के" ।

नीचे नाम लिखा था "जेम्स वाड्रा"
दरअसल ये जेम्स वाड्रा का पसंदीदा शेर था।

ये देख मुरली और फैज़ान बोखला गए और शौर्य से पूछने लगे जो फ़ाइल में फॉर्मूला था वो कहाँ है और उसने ये फ़ाइल फैज़ान के खून के बिना कैसे खोली फिर शौर्य ने बोलना शुरू किया,

शौर्य : हाहाहा.....एक दिन क्यूबा में मैंने लैपटॉप ऑन किया
और फिर से फ़ाइल खोलने की कोशिश करने लगा
लेकिन हर बार नाकाम रहा गुस्से में मैंने अपना हाथ
लैपटॉप पर दे मारा और आचानक से लैपटॉप में से
कांच की प्लेट बाहर आई,मैंने उसे गौर से देखा पर
कुछ पता नहीं चला, मैंने माइक्रोस्कोप(सूक्ष्मदर्शी)
से उस प्लेट को देखा तो मुझे कुछ लाल रंग के धब्बे
दिखाई दिए मुझे खून के धब्बे लगे इसकी पुष्टि करने
ने के लिए मैंने अपना खून का कतरा उस प्लेट पर
डाला और लैपटॉप की स्क्रीन पर लिखा हुआ दिखा
"DNA DID NOT MATCH" मतलब खून मेल नही
खाया,तब मुझे पता लगा कि इस लैपटॉप को तुमने
इतना आधुनिक बनाया है कि इसे सिर्फ डॉक्टर
फैज़ान अपने खून से खोल सकता है और कोई नही

तभी मुरली ने गुस्से में आकर कहा "तो फार्मूला है कहाँ?"

फिर उसकी तरफ मुस्कुरा कर शौर्य ने बोलना शुरू किया-

शौर्य : वो फॉर्मूला मेरे दिमाग मे है,मैंने फ़ाइल से फॉर्मूला
डिलीट कर दिया और अपने दिमाग में रट लिया,
और फ़ाइल में लिख दिया जेम्स का शेर।


"लेकिन बिना मेरे खून के तुमने फ़ाइल कैसे खोली"बोखला कर डॉक्टर फैज़ान ने पूछा।

शौर्य ने कहा "किसने कहा मैंने तुम्हारे खून के बिना फ़ाइल खोली,जब मुझे ये बात पता लगी कि फ़ाइल तुम्हारे खून से खुलेगी,तो मैंने जानबूझ कर अहाना को फोन किया ताकि तुम मेरी लोकेशन का पता लगा लो और आसानी से मेरे पास पहुँच जाओ और यही हुआ तुम दोनों मेरे पास आये और डॉक्टर फैज़ान जब तुमनें अहाना के बारे में अपशब्द कहे मैंने इस बात का फायदा उठाया और चाकू से तुम्हारे बाज़ू पर वार किया और चाकू पर लगा तुम्हारा खून मेरे काम आया समझे और कोरोना की दवाई का फार्मूला मेरे दिमाग में है लो मारो अब मुझे"।

और इतना कहकर शौर्य ने एक लात मारी सामने पड़ी टेबल पर और मुरली के ऊपर टेबल गिर गई,मुरली टेबल के नीचे दब गया, ये देख डॉक्टर फैज़ान ने शौर्य के ऊपर हमला करना चाहा तभी शौर्य ने बंदूक निकल कर फैज़ान के सीने में 5-6 गोलियां दाग दी।

गोलियों की आवाज़ सुनकर गार्ड्स अंदर घुसते इससे पहले ही शौर्य ने दरवाज़े पर एक बड़ी सी टेबल फसा दी,गार्ड्स दरवाज़ा तोड़कर अंदर आयें इस से पहले उसने अहाना को एक मोटी केबल से बाँधा और खिड़की से बाहर उतार दिया
अहाना रो रही थी उसने गर्दन हिलाकर जाने के लिए मना किया पर शौर्य ने कहा "मैं जल्द ही लौट आऊँगा मेरी जान भरोसा रखो मेरे ऊपर"।
और उसने अहाना को वहाँ से भगाया ही था कि इतने में 10-12 गार्ड्स दरवाज़े को तोड़कर अंदर आ गए और उन्होंने उस पर बन्दूकें तान दीं।

शौर्य ने अपने हाथ ऊपर उठाए और सर के पीछे रख लिए और आत्मसमर्पण का इशारा दिया लेकिन उसने झट से ही अपने हाथ की घड़ी का बटन दबा दिया,दरवाज़े पर भड़ाम से धमाका हुआ और सारे गार्ड्स धराशायी हो गए।

शौर्य ने पहले ही दरवाज़े पर बम लगा दिया था जब उसने टेबल में लात मारी थी।

इतने में मुरली को होश आया और वो टेबल के नीचे से निकला और निकलते ही उसने शौर्य पर मुक्का दे मारा
और फिर मुरली ने मुक्कों की बरसात कर दी।

अचानक ही शौर्य ने अपनी लात से मुरली के घुटने पर वार किया फिर मुरली का संतुलन बिगड़ गया और इस बात का फायदा उठाकर शौर्य ने उसके मुँह पर मुक्के ही मुक्के जमाना शुरू कर दिया और मुरली को उठा कर टेबल पर दे मारा फिर टेबल से उठा कर एक शीशे की अलमारी में दे मारा मुरली लहु-लुहान हो गया रक्त ही रक्त बह रहा था उसका।


फिर उसने मुरली को अलमारी से निकालकर शीशे की बनी खिड़की में दे मारा फिर लकड़ी के सोफे पर फिर 2-3 मुक्के फिर उसे दोबारा उठाया और उससे बातें करने लगा।

"देख तेरी हालत दो कौड़ी के कीड़े हो तुम इस दुनिया को खोखला करने वाले कीड़े और कीड़े की मौत ही मरेगा तू ये जेम्स और उसकी टीम की तरफ से"।

इतना कह कर उसने एक टूटी हुई लोहे की छड़ी मुरली के सीने में धछ गाड़ दी और मुरली के मुँह से खून निकला और फिर वो मर गया।

इसके बाद शौर्य ने एक गार्ड के पास में पड़ी एक आधुनिक बंदूक उठाई और और बिल्डिंग के नीचे उतरने लगा उसका मकसद था पूरा I S A C O का दफ्तर खत्म करना क्योंकि उस दफ्तर में सब भ्रष्ट कर्मचारी और एजेंट्स थे।

नीचे उतरते ही उसके सामने बहुत सारे कर्मचारी और एजेंट्स थे,उसने सब पर अंधा धुन गोलियां बरसानी शुरू कर दीं और सब धड़-धड़ करके मर कर गिरने लगे और थोड़ी देर में वहाँ लाशों का ढेर लग गया और शौर्य बिल्डिंग से बाहर आ गया और वो उस बिल्डिंग को देखने लगा देखते ही देखते धमाका हुआ भड़ाम! और पूरी I S A C O बिल्डिंग ध्वस्त होकर जल गई।



15 जून,2020,सुबह 7 बजे,दिल्ली।

एक फ्लाईओवर के किनारे खड़ी अहाना शौर्य का इंतज़ार कर रही थी,थोड़ी देर में वो अपनी बुलेट बाइक ले कर फट फट फट फट करता हुआ अहाना के पास आ गया और फिर.....

शौर्य : ये लो अहाना! ये लो ये पेन ड्राइव इसमें कोरोना की
दवाई की विधि है इसे प्रधान मंत्री जी को पोस्ट कर
कर देना,लो इसके साथ ही ये चिट्ठी भी।

अहाना : और तुम ! तुम कहाँ जा रहे हो मुझे अकेला छोड़के

शौर्य : अभी ऐसे कई संगठन और लोग हैं अहाना जिनको
ढूंढना है,मैं वापस लौटूँगा तुम मेरा इंतेज़ार करना।

फिर वो अहाना से गले मिला और अपनी बुलेट स्टार्ट की और फट फट फट करता हुआ चला गया।


24 जून ,2020 ,दोपहर 3 बजे ,प्रधानमंत्री निवास ,दिल्ली।

प्रधानमंत्री जी को एक कूरियर मिलता है उसे वह खोल कर देखते हैं उसमें से एक पेन ड्राइव और एक कागज निकला जिसमें लिखा था-

"आदरणीय प्रधानमंत्री जी,मैं आपको नमन करता हूँ
आप सदैव देश के लिए अच्छा निर्णय लेते हैं मैं आपका आभारी हूँ कि कोरोना से बचने के लिए आपने देश के लिए
महत्वपूर्ण कार्य किये और देश वासियों की हिम्मत को मजबूत बनाये रखा।
इस पेन ड्राइव में कोविड 19 का इलाज मतलब कोरोना से बचने की दवाई बनाने का फार्मूला है,जिसे काफी लोगों के बलिदान से हासिल किया गया है देश और दुनिया को बचाने में और इस दवाई को जान पर खेल कर लाने में इन वीरों का योगदान है
कृपया इनके परिवार के भविष्य को आप उज्जवल बनाए
और इन वीरों का नाम अमर कर दीजिए।"

नीचे जेम्स वाड्रा,अहान खान और बाकी टीम के सभी साथियों के नाम थे।

इतना पढ़कर प्रधान मंत्री मुस्कुराये और उन्होंने अपना चश्मा उतारा और खिड़की से सूर्य की ओर देखने लगे।


1 वर्ष के अंदर समस्त संसार भारत की बनी हुई दवाई से कोरोना वायरस से मुक्त हो गया भारत ने उन देशों को भी बचाया जिन्होंने संसार को नष्ट करने का षड्यंत्र रचाया,क्योंकि भारत जानता है इसमें इंसानियत को बचाना है युद्ध नही करना है इसलिए

"हमारा भारत महान है"


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धन्यवाद पाठकों।

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