Adventure Of Karun Nayar - Mystery Of Bharatpur books and stories free download online pdf in Hindi

एडवेंचर ऑफ़ करुण नायर - रहस्य भरतपुर का - अध्याय 2 रहस्य का आगमन

सुबह का समय चारो तरफ चिड़ियो की चहचहाहट की आवाज गूंज रही है इंस्पेक्टर शिशौदिया कुर्सी पर बैठ कर किसी फ़ाइल पर आंख गड़ाए हुए है उनके सामने राजकुमार विक्रम भी बैठे है बाहर चाय वाले ओर बाजार का रोज़ाना शोर सुनाई दे रहा है पुलिस स्टेशन में चहलकदमी का माहौल बना हुआ है अचानक गोखले कमरे में प्रवेश करता है थोड़ी देर शांत खड़े होकर एकदम से बोलता है ।
सर जिसका डर था वही हुआ 
साफ साफ कहो गोखले ! इंस्पेक्टर शिशौदिया गोखले की तरफ देखते हुए कहते है ।
सर मेने ऐसा केस कभी नही देखा आप भी चोंक जाओगे जब यह मेडिकल रिपोर्ट के बारे में सुनोगे तब ।
ऐसा क्या निकला जांच में ? शिशौदिया उत्सकुतापूर्वक पूछता है
विक्रम भी गोखले को देखने लगता है ।
सर ! जांच में डॉक्टर का कहना है कि दोनों मेडिकल रिपोर्ट एक ही व्यक्ति की है यानी दोनो रिपोर्ट में ये सच है की मौत एक ही व्यक्ति की हुई है ।
क्या ! विक्रम ओर शिशौदिया एक साथ कहते है ।
यह कैसा रहस्य है ? शिशौदिया अपने आप से सवाल करता है 
यह कैसे हो सकता है ? विक्रम धीरे स्वर में बोलता है ।
एक व्यक्ति दो जगह पर अलग अलग समय मे कैसे मर सकता है ??? इंस्पेक्टर शिशौदिया बड़बड़ाता है।
सर महत्वपूर्ण ये नही है कि एक व्यक्ति दो जगह पर कैसे मार सकता है महत्वपूर्ण तो ये है कि एक व्यक्ति दो बार कैसे मार सकता है ।
सही कहा गोखले ये कैसी पेहली है ? शिशौदिया फिर बड़बड़ाता है ।
विक्रम भी इसी सोच में खो जाता है और चारो तरफ शांति का वातावरण हो जाता है ।
कंही कोई आत्मा या भूत वगैरह का तो चक्कर नही सर ? गोखले घबराते स्वर में बोलता है ।
चुप करो गोखले ! ऐसा कुछ भी नही होता है ।
सर होता है मुझे तो लगता है हमे इस बारे में हमे किसी तांत्रिक से बात करनी चाहिए ! गोखले कहता है
क्या बकबास कर रहे हो जाओ यंहा से ! इंस्पेक्टर शिशौदिया चिल्लाते हुए कहता है ।
गोखले चला जाता है और विक्रम सोच में खोया हुआ है।
देखिये विक्रम जी हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे इस पेहली को सुलझाने ओर कातिल को ढूंढने की लेकिन ! इतना कहकर इंस्पेक्टर शिशोदिया रुक जाता है।
क्या हुआ ? कोई दिक्कत है? 
नही में बस इतना कहना चाहता हु की इस पेहली को सुलझाने में काफी समय लग सकता है और सही कहु तो कभी कभी ऐसे केस बन्द ही कर दिए जाते है ! शिशोदिया उदास मन से कहता है।
विक्रम मानो टूट सा गया है उसकी आँखों से आँसू बाहर आने लगता है और वह अपने बचपन के विचारों में खो जाता है कैसे लगता है और वह अपने साथ खेलता था किस तरह वह उसे राजशाही के तरीके सिखाता था आज उसी भाई को इंसाफ नही दिला पा रहा है ।
धर्य रखे ! इंस्पेक्टर शिशोदिया कहता है हम अपनी पूरी कोशिश करेंगे ।
ठीक है अब में चलता हूं ! इतना कहकर विक्रम चलने लगता है रुकिये ! में तो नही लेकिन एक शख्स है जो आपकी इस पेहली को सुलझाने में मदद कर सकता है ।
जी कौन? विक्रम एक दम से पीछे मुड़कर देखता है ।
करुण नायर ! शिशौदिया ने कहा।
विक्रम ने प्रश्नवाचक चेहेरे से शिशोदिया की तरफ देखता है ।
जी हां ! डिटेक्टीव करुण नायर ! आपको उनसे मिलना चाहिए वो ही आपकी मदद कर सकते है।
कौन है ये डिटेक्टिव करुण नायर और कँहा रहते है ? 
पहले वह एक फौजी था 1963 में उसने फ़ौज़ में शामिल हुआ ओर 1965 के पाकिस्तान और भारत युद्ध मे उसने कमाल का प्रदशन किया जिसके लिए उसे 1966 में वीर चक्र से समानित भी किया गया लेकिन जल्द ही उससे फ़ौज़ से बुलाकर अन्वेषण ब्यूरो ( I B ) में शामिल उसे कर लिया गया  उसने भारत के लिए पन्द्रह मिशन पूरे किए । प्रशासन में करुण नायर की प्रसिद्धि बढ़ती गई लेकिन जब आर. एन काओ ने जो उस वक्त अन्वेषण ब्यूरो के उपनिदेशक थे उन्होंने एक नई संस्था का ढांचा पेश किया  तब R A W का गठन हुआ यानी अंतरष्ट्रीय गुप्तचर विभाग रिसचर्स और एनालिसिस विंग का गठन 1968 में हुआ इस संस्था का सबसे पहला गुप्तचर था करुण नायर ओर दो सालों में उसने 20 मिसन पूरे किए लेकिन 1971 में उसने R A W छोड़ दी यह कारण कोई नही जान पाया लेकिन कुछ लोग मानते है कि वह अभी भी उससे जुड़ा हुआ है लेकिन डिटेक्टिव बनते ही उसने ही उसने एक साल में 6 रहस्मय केसों को सुलझाया है जिनका सुलझना नामुमकिन ही था फिलहाल वह चांदनी चौक की हनुमान गली में रहता है और वंही अपना काम करता है ।
अद्धभुत आपकी बातों से लगता है की वह असाधारण व्यक्ति का स्वामी है ! विक्रम ने कहा
बेशक वह असाधारण व्यक्तित्व का ही स्वामी है 
फिर तो मुझे उससे मिलना चाहिए धन्यवाद कहते हुए विक्रम वँहा से चला जाता है और शिशोदिया अपनी फाईलो में व्यस्त हो जाता है। 

ठंड का समय चाँदनी चौक की गलियों में लोग आग जलाकर उसके आस पास बैठे हुए है औऱ करुण नायर अपने घर मे सॉल ओढे गर्म चाय पी रहा है वँहा बहुत खामोशी है उसकी बार बार नजर अखबार पर जाती है और वह फिर किसी विचार में खो जाता है दूसरी ओर सुजान चटर्जी जो उसका दोस्त और वकालत की पढ़ाई करने वाला पतला दुबला चमकदार चेहरा ओर फुर्तीला नवयुवक किताबो की अलमारी में किसी मंनोरंजक किताब की तलाश मे व्यस्त है । तभी दरवाजे को खटखटाने की आवाज सुनाई देती है ।
कौन हो सकता है ? सुजान ने पूछा
पता नही लेकिन रात के 10 बजे इतनी ठंड में कोई ऐसा ही आ सकता है जिससे हमारी जरूरत हो । करुण नायर कहता है
कोई क्लायंट ? सुजान पूछता है
हो सकता है ! करुण सुजान की तरफ देख कर बोलता है
में अभी देख कर आता हूं ! सुजान दरवाजे की तरफ बढ़ते हुए कहता है ।
सुजान जैसे ही दरवाजा खोलते है एक लंबे कद का गठीला शरीर राजशाही भेषभूषा में गोरा रंग का एक व्यक्ति दरवाजे में खड़ा हुआ होता है।
क्या में करुण नायर जी से मिल सकता हु ? विक्रम ने पूछा
जी आप कौन ? सुजान ने पूछा
सॉरी मैने बताया नही मेरा नाम विक्रम है में भरतपुर का राजकुमार हु क्या में करुण नायर जी से मिल सकता हु ! विक्रम कहता है।
जी ज़रूर ! अंदर आइये सुजान उसे अंदर आने को कहता है
जी कहिये क्यो मिलना चाहते थे आप मुझसे ? करुण ने पूछा
सिर्फ आप ही मेरी मदद कर सकते है नायर साहब में बड़ी रहस्यमय पहेली से झूझ रहा हु मेरी आखिरी उम्मीद सिर्फ आप है आप इस पहेली को सुलझा दे आप जो मांगेंगे में देने को तैयार हूं लेकिन मदद से ना मत बोलियेगा ! विक्रम दुखी स्वर में बोलता है 
आप मुझे अपनी समस्या बताइये मुझसे जो होगा में करूँगा ! करुण नायर उसको दिलासा देते हुए कहता है।
विक्रम अब तक जो हुआ 57उसका विस्तृत वर्णन करने लगता हर करुण नायर ओर सुजान दोनो खामोशी से उसकी बाते सुनते है।
हम्म मनना पड़ेगा तुम्हारी समस्या सही में रहस्यमय है करुण नायर कहता है फिर किसी सोच में डूब जाता है और अचानक से कहता है ऐसा भी तो हो सकता है कि तुम्हारा भाई कार एक्सीडेंट में मरा ही नही हो और वँहा से मेडिकल रिपोर्ट को गुमराह करके बच निकला हो और दिल्ली में आकर रहने लगा हो क्योंकि उससे पता चल गया था कि उसकी जान को खतरा है लेकिन खूनी को जब पता लगा हो कि वह जिंदा है और दिल्ली में है तो उसने मौका पाकर उसका यंहा खून कर दिया हो।
मुझे नही पता ! लेकिन में आपको कुछ दिखाना चाहता हु ! विक्रम ने कहा 
क्या?? करुण ने पूछा 
विक्रम उसके सामने एक चिट्ठी रखता है
क्या लिखा है इसमें ? करुण ने पूछा
विक्रम वह चिट्ठी पड़कर सुनता है जो किसी खून से लिखी गई है अब तुम्हारी मौत पक्की है अब वह खूनी मेरे भाई के बाद मुझे भी मारना चाहता है कृपया मेरी मदद कीजिए।
इस चिट्ठी का कागज़ काफी मोटा है ओर इस पर गर्म रेत भी लगी हुई है जिससे साफ पता चलता है कि ये चिट्ठी राजस्थान से आई है ओर जिस इंक का प्रयोग इसके लिखने में हुआ है वो ब्लू इंडिया कंपनी की है जो सिर्फ जयपुर में है मतलब ये चिठी जयपुर से आई है यह चिट्ठी तुमने कब और किसने दी ? करुण ने पूछा
यह मुझे आज सुबह प्राप्त हुई औऱ यह खत दुवारा आई विक्रम ने बताया 
हमे उस लड़की से पूछताछ करनी चाहिए जो तुम्हारे भाई के साथ यँहा रहती थी 
लेकिन क्यो ? विक्रम ने पूछा
क्योकि हो सकता है कि तुम्हारे भाई की हत्या के बारे में शायद उसे कुछ पता हो ! करुण नायर सोचते हुए बोला
ठीक है में आपको कल मिलता हु फिर हम उस लड़की के यंहा चलेंगे ! विक्रम ने कहा
क्या तुम्हें उसका पता मालूम है ? 
नही लेकिन हमें इंस्पेक्टर सुरेश शिशोदिया से उसका पता चल सकता है ।
ठीक है अब तुम जाओ लेकिन साथ मे सुजान को भी ले जाओ वह खूनी तुम्हे अकेला पाकर मारने की भी कोशिश कर सकता है सुजान तुम्हारी मदद करेगा ।
विक्रम ओर सुजान दोनो चले जाते है औऱ विक्रम किसी खास सोच विचार में डूब जाता है ।

अगले दिन....
सुबह का समय सुरेश शिशोदिया अपने थाने में अपना डण्डा ओर फाइल  ढूंढते हुए बेचैन है थाने में चारो तरफ अफरा तफरी का माहौल है विक्रम सुजान ओर करुण थाने में प्रवेश करते है 
माफी चाहता हु इंस्पेक्टर लेकिन मुझे आपकी मदद चाहिए थी ! विक्रम ने कहा
जी कहिये विक्रम जी ! 
करुण नायर ओर मुझे उस लड़की से मिलना है जो मेरे भाई के साथ रहती थी क्या नाम था उसका ?
रश्मि झांझर ! इंस्पेक्टर ने विक्रम को याद दिलाया
जी उनका क्या आप हमें पता बता सकते है ? 
इंस्पेक्टर ने करुण को हेलो का इशारा किया और करुण ने भी हाँथ मिलाकर उनका जबाब दिया सुजान थाने की अफरा तफरी को देखने मे व्यस्त था।
उस लड़की ने तो कल रात ही आत्महत्या कर ली है ! इंस्पेक्टर ने जानकारी देते हुए कहा
क्या , लेकिन कैसे ओर क्यो ? विक्रम ने आश्चर्य भाव से कहा 
वो तो वंही जाकर पता चलाएगा आप भी साथ मे चल सकते है इंस्पेक्टर ने कहा।

To be continued...

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