ख्वाबो के पैरहन - 4 Santosh Srivastav द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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ख्वाबो के पैरहन - 4

Santosh Srivastav मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी

धूप कमरे में आ चुकी थी निक़हत फूफी को झंझोड़ रही थी “उठिए फूफी जान.....देखिए कितना दिन चढ़ आया है ” फूफी घबराकर उठ बैठीं..... रात कब तक जागती रहीं, याद नहीं..... शाहजी को ताहिरा के कमरे ...और पढ़े


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