यह कहानी सआदत हसन मंटो के लेखन और उनके विचारों पर केंद्रित है, जो विभाजन और उसके बाद के सामाजिक-राजनीतिक परिवेश को दर्शाते हैं। मंटो की कहानियाँ विभाजन के पहले और बाद के वातावरण, दंगों और साम्प्रदायिकता को उजागर करती हैं। वे राजनीति को मानव-प्रेम और नैतिकता के संदर्भ में देखते हैं, और उनके लिए प्रत्येक राजनीतिक घटना केवल राजनीति नहीं होती, बल्कि मानव-अस्तित्व की सच्चाइयों से जुड़ी होती है। उन्होंने विभाजन को एक बुरी तरह झकझोरने वाले अनुभव के रूप में लिया और इसे 'तक़सीम' और 'बँटवारे' के रूप में संदर्भित किया। मंटो का पहला अफ़साना 'तमाशा' जलियाँवाले बाग के हत्याकांड से जुड़ा था, जिसे उन्होंने अपने नाम से नहीं छपवाया। उनके अंतिम वर्षों में उन्होंने बेतहाशा लिखा और सामूहिक पागलपन के अनुभव को साझा किया। मंटो की एक महत्वपूर्ण रचना 'कत्बा' है, जिसमें उनकी साहित्यिक पहचान और मानवता के प्रति उनकी दृष्टि व्यक्त होती है। अंत में, यह बताया गया है कि मंटो की मृत्यु के बाद उनकी आत्मा बहुत दूर चली गई थी, जबकि उनके विचार और रचनाएँ आज भी जीवित हैं। सियाह हाशिए - 2 BALRAM AGARWAL द्वारा हिंदी लघुकथा 1.3k 2.5k Downloads 6.1k Views Writen by BALRAM AGARWAL Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण एक लेखक के तौर पर मंटो की विशेषता यह है कि अहसास के शुरुआती छोर से लेकर उसके आखिरी छोर तक वह न तो मुसलमान है, न हिन्दू, न कश्मीरी और न पंजाबी इंसान है, सिर्फ़ इंसान।…‘सियाह हाशिए’ पर अपने समय के प्रगतिशील उर्दू लेखकों व आलोचकों के कड़वे रवैयों ने मंटो को अंतहीन दिमागी तकलीफ़ दी और उसमें बेहिसाब गुस्सा पैदा किया। उस तकलीफ़ और उस गुस्से को जाने बिना मंटो और उनके ‘सियाह हाशिए’ को समझना लगभग असम्भव है। अपनी बारहवीं किताब ‘यज़ीद’ की भूमिका ‘ज़ैबे-कफ़न’(क़फ़न का गला) में इस तकलीफ़ और गुस्से का उन्होंने काफी खुलासा किया है। वह लिखते हैं—‘मुल्क के बँटवारे से जो इंकिलाब बरपा हुआ, उससे मैं एक अरसे तक बाग़ी रहा और अब भी हूँ…मैंने उस खून के समन्दर में गोता लगाया और चंद मोती चुनकर लाया— अर्के-इन्फ़िआल(लज्जित होने पर छूटने वाले पसीने) के और मशक़्क़त(श्रम) के, जो उसने अपने भाई के खून का आखिरी क़तरा बहाने में सर्फ़(खर्च) की थी उन आँसुओं के, जो इस झुँझलाहट में कुछ इंसानों की आँखों से निकले थे कि वह अपनी इंसानियत क्यों खत्म नहीं कर सके! ये मोती मैंने अपनी किताब ‘सियाह हाशिये’ में पेश किए।…(इसी पुस्तक में शामिल लेख सियाह-कलम मंटो और ‘सियाह हाशिए’ से) Novels सियाह हाशिए ‘सियाह हाशिये’ पाकिस्तान में बस जाने के बाद मंटो की तीसरी किताब थी जो ‘मकतबा-ए-जदीद’ से प्रकाशित हुई। सन् 1951 तक यह उनकी सातवीं किताब थी। वीभत्सता, उ... More Likes This हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी