यह कहानी अदालत में हो रहे एक मुकदमे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें निहालचंद मोदी का मामला चल रहा है। लाला ब्रजकिशोर, जो मदनमोहन के पक्ष में हैं, ने निहालचंद को गवाह बना कर उससे सवाल पूछना शुरू किया। ब्रजकिशोर ने निहालचंद से लेन-देन के बारे में सवाल किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निहालचंद का लेन-देन पर्चों के बजाय नोकरों के माध्यम से हो रहा था। जब निहालचंद से पूछा गया कि उसे कैसे पता है कि सामान लाला मदनमोहन के लिए लाया जा रहा है, तो उसने कहा कि यह लाला साहब का आदेश था। ब्रजकिशोर ने निहालचंद से आदेश के बारे में विस्तार से पूछे, लेकिन निहालचंद सही से जवाब नहीं दे सका। इसके बाद, ब्रजकिशोर ने निहालचंद के बहीखातों में कुछ अनियमितताओं के बारे में सवाल उठाए, जिससे यह सिद्ध करने की कोशिश की कि निहालचंद ने लेन-देन में धोखाधड़ी की है। मुकदमे में चर्चा का केंद्र निहालचंद के बहीखातों की स्थिति थी, जिसमें यह देखने की कोशिश की गई कि क्या सही तरीके से हिसाब रखा गया है या नहीं। ब्रजकिशोर ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि निहालचंद ने वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी की है, जबकि निहालचंद ने अपनी बातों में उलझने की कोशिश की। कहानी में अदालत की कार्यवाही और गवाहों के बीच की बातचीत के माध्यम से लेन-देन के मामलों की जटिलता को दर्शाया गया है। परीक्षा-गुरु - प्रकरण-32 Lala Shrinivas Das द्वारा हिंदी लघुकथा 2.5k Downloads 8.7k Views Writen by Lala Shrinivas Das Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण अदालत में हाकिम कुर्सीपर बैठे इज्लास कर रहे हैं. सब अहलकार अपनी, अपनी जगह बैठे हैं निहालचंद मोदी का मुकद्दमा हो रहा है. उस्की तरफ़ सै लतीफ हुसैन वकील हैं. मदनमोहनकी तरफ़ सै लाला ब्रजकिशोर जवाबदिही करते हैं. ब्रजकिशोर नें बचपन मैं मदनमोहन के हां बैठकर हिंदी पढ़ी थी इस वास्तै वह सराफी कागज की रीति भांति अच्छी तरह जान्ता था और उस्नें मुकद्दमा छिड़नें सै पहले मामूली फीस देकर निहालचंद के बही खाते अच्छी तरह देख लिये थे. इस मुकद्दमें मैं क़ानूनी बहस कुछ न थी केवल लेन देनका मामला था. Novels परीक्षा-गुरु लाला मदनमोहन एक अंग्रेजी सौदागर की दुकानमैं नई, नई फाशन का अंग्रेजी अस्बाब देख रहे हैं. लाला ब्रजकिशोर, मुन्शी चुन्नीलाल और मास्टर शिंभूदयाल उन्के... More Likes This उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya शनिवार की शपथ द्वारा Dhaval Chauhan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी