इस भाग में, रायसाहब को खबर मिलती है कि इलाके में एक वारदात हुई है और होरी से पंचों ने जुरमाना वसूल किया है। वह नोखेराम को बुलाते हैं और सवाल करते हैं कि उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। नोखेराम अपनी दलील पेश करते हैं कि वह अकेले नहीं थे, लेकिन रायसाहब उन्हें डांटते हैं और बताते हैं कि पंचों को बिना उनकी अनुमति के जुरमाना वसूल करने का हक नहीं था। रायसाहब होरी का पक्ष लेते हैं और पंचों को चेतावनी देते हैं कि उन्हें जुरमाने की पूरी रकम शाम तक लानी होगी, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। नोखेराम बताते हैं कि होरी का लड़का गाँव छोड़कर भाग गया है, लेकिन रायसाहब इस पर विश्वास नहीं करते और इसे एक साजिश मानते हैं। पंचों को रायसाहब का फैसला सुनकर चिंता होती है, क्योंकि उनके पास अनाज तो है लेकिन रुपए नहीं हैं। होरी का मकान रेहन रखा गया है, लेकिन उसकी वास्तविक कीमत नहीं है। अंत में, होरी की स्थिति पर चिंता व्यक्त की जाती है और यह बताया जाता है कि पटेश्वरी लाल सबसे अधिक भयभीत हैं क्योंकि उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। गोदान भाग 16 Munshi Premchand द्वारा हिंदी लघुकथा 7.1k 3.1k Downloads 11.7k Views Writen by Munshi Premchand Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्कृति को सजीव और साकार पाते हैं, ऐसी संस्कृति जो अब समाप्त हो रही है या हो जाने को है, फिर भी जिसमें भारत की मिट्टी की सोंधी सुबास भरी है। प्रेमचंद ने इसे अमर बना दिया है। यह सड़क सामंतवाद के पतन की और पूंजीवाद की जीत की निशानी है । वह अपना जीवन मर्यादा केपरम्परागत मिथ को पाने के लिए झोंक देता है और अपनी मृत्यु के समय भी गाय के दान जैसे काम को न कर पाने के दुख से भरा हुआ है, ये तो विद्रोहिणी धनिया ही है जो मजदूरी के सिक्के को मृत होरी के हाथ में दबा घोषणा करती है कि यही होरी का गोदान है। Novels गोदान गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्... More Likes This मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी