गोदान के भाग 13 में गोबर अंधेरे में उठकर कोदई से विदा लेता है। उसके विवाह की खबर सभी को हो चुकी है, इसलिए इस विषय पर कोई चर्चा नहीं होती। गोबर का शील और स्वभाव सभी को प्रभावित करता है, खासकर कोदई की माता को। गोबर ने उसे सम्मान और प्रेम से उपदेश दिया, जिससे वह प्रसन्न हो गई। गाँव के लोग काम की तलाश में शहर जाते हैं, जहाँ गोबर को बड़ी संख्या में मजदूर दिखाई देते हैं। वह निराश होता है क्योंकि इतने मजदूरों में उसे काम मिलने की संभावना कम लगती है। जैसे-जैसे समय बीतता है, कुछ मजदूरों को काम मिल जाता है, लेकिन गोबर अभी भी काम के बिना है। अचानक मिर्जा खुर्शेद मजदूरों के बीच आता है और कहता है कि जो भी रोज छ: आने कमाना चाहता है, वह उसके साथ चले। सभी मजदूर उसकी बात सुनकर उसके पीछे चलते हैं। जब एक बूढ़ा मिर्जा से काम के बारे में पूछता है, तो मिर्जा बताता है कि उन्हें कबड्डी खेलना है, जिससे सभी हैरान होते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे लोग कठिनाइयों से गुजरते हैं और नए अवसरों की तलाश में रहते हैं। गोदान भाग 13 Munshi Premchand द्वारा हिंदी लघुकथा 8.4k 3.1k Downloads 12.8k Views Writen by Munshi Premchand Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्कृति को सजीव और साकार पाते हैं, ऐसी संस्कृति जो अब समाप्त हो रही है या हो जाने को है, फिर भी जिसमें भारत की मिट्टी की सोंधी सुबास भरी है। प्रेमचंद ने इसे अमर बना दिया है। इस उपन्यास में होरी ही एकमात्र ऐसा पात्र है जो युग के साथ बदलता नहीं है। यही न बदलना होरी की शख्सियत का अहम पक्ष है । सामंतवाद से पूंजीवाद की ओर बदलते युग में होरी का बेटा गोबर किसान से मजदूर बन जाता है । Novels गोदान गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्... More Likes This मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी