यह कहानी बालक दीनदयाल उपाध्याय की है, जो तीसरी कक्षा में पढ़ते थे और आठ वर्ष के थे। उनके शिक्षक नरेंद्र जी ने उन्हें एक गिलास दूध लाने के लिए भेजा, लेकिन रास्ते में दीनदयाल को ताऊजी मिले, जिन्होंने बताया कि घर में दूध नहीं है। दीनदयाल निराश होकर स्कूल लौट आए। जब उन्होंने गुरुजी को दूध नहीं लाने का कारण बताया, तो गुरुजी ने सोचा कि वह कैसे जल्दी आ गए। एक बच्चे ने कहा कि दीनदयाल तेज दौड़ता है, जिससे गुरुजी नाराज हो गए। उन्होंने बच्चों को एक कठिन गणित का प्रश्न दिया। दीनदयाल ने प्रश्न हल कर दिया, लेकिन बाकी बच्चे नहीं कर सके। दीनदयाल तो बच गए, लेकिन बाकी बच्चों को सजा देने के लिए मुर्गा बना दिया गया। panditji aur guruji ka dand Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 63.4k 2.5k Downloads 10.2k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण how pandit deen dayak ji saved his friends from the anger of his tracher More Likes This किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी