कहानी "आँधी" में जयशंकर प्रसाद ने एक व्यक्ति के जीवन की झलक पेश की है, जो चन्दा के तट पर छतनारे वृक्षों की छाया में समय बिताता है। वह मुचकुंद के नीचे बैठता है और वहाँ उसकी एक सहचरी, मुसहरिन, रहती है। मुसहरिन अपने जीवन में संतुष्ट है और मेहनत करके जीने में खुश रहती है। वह मुचकुंद के फूल इकट्ठा करती है और बिका करती है। कहानी में मुसहरिन की मृत्यु पर व्यक्ति के मन में उसके प्रति स्नेह और ममता की भावना जागृत होती है। इसके बाद, वह स्थान निर्जनता में बदल जाता है। एक दिन, वह व्यक्ति वहाँ पर एक अजीब जमावड़ा देखता है, जहां बिना घरवालों के लोग बसते हैं, जो सभ्य समाज से अलग हैं। ये लोग अपने चलते-फिरते घरों में जीते हैं और अपने नियम बनाकर जीते हैं। कहानी में ये लोग सभ्य समाज के विद्रोही माने जाते हैं, लेकिन उनके पास भी एक समाज है और वे अपने तरीके से जीवन यापन करते हैं। कहानी में प्रकृति, मानव संबंध और समाज की विभिन्नता को दर्शाया गया है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर करता है। अाँधी Jayshankar Prasad द्वारा हिंदी लघुकथा 3.4k 5k Downloads 26k Views Writen by Jayshankar Prasad Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण आँधी जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has exclusive digital publishing rights of this book. Any illegal copies in physical or digital format are strictly prohibited. Matrubharti can challenge such illegal distribution / copies / usage in court. आँधी चन्दा के तट पर बहुत-से छतनारे वृक्षों की छाया है, किन्तु मैं प्रायःमुचकुंद के नीचे ही जाकर टहलता, बैठता और कभी-कभी चाँदनी मेंऊँघने भी लगता। वहीं मेरा विश्राम था। वहाँ मेरी एक सहचरी भी थी,किन्तु वह कुछ बोलती न थी. वह टहट्ठों की बनी हुई Novels जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has... More Likes This प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी