इस कहानी में लाला मदनमोहन और लाला ब्रजकिशोर के बीच एक संवाद है, जिसमें वे मनुष्य के स्वभाव की पहचान के बारे में चर्चा कर रहे हैं। लाला मदनमोहन पूछते हैं कि किसी व्यक्ति के स्वभाव को जानने का क्या उपाय है, तो लाला ब्रजकिशोर बताते हैं कि समय के साथ सब कुछ स्पष्ट हो जाता है। वह मनुष्य के मन में ईश्वर द्वारा उत्पन्न विभिन्न वृत्तियों का उल्लेख करते हैं, जैसे परोपकार, भक्ति और न्याय, जिन्हें धर्मप्रवृत्ति माना जाता है। इसके अलावा, वे निचली वृत्तियों जैसे काम, संग्रह और आत्मसुख की भी चर्चा करते हैं। उनका कहना है कि यदि दो वृत्तियों में विरोध हो, तो धर्मप्रवृत्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पंडित पुरुषोत्तमदास इस चर्चा में हस्तक्षेप करते हैं और पूछते हैं कि परोपकार के शुभ कामों का परिणाम कैसे बुरा हो सकता है। लाला ब्रजकिशोर इसका उत्तर देते हैं कि जैसे अधिक भोजन से रोग उत्पन्न होता है, वैसे ही परोपकार की इच्छाओं में भी संतुलन आवश्यक है। कहानी में यह संदेश है कि मनुष्य के स्वभाव को पहचानने और आचरण में संतुलन बनाए रखने के लिए समय और विचारशीलता की आवश्यकता होती है। परीक्षा-गुरु - प्रकरण-6 Lala Shrinivas Das द्वारा हिंदी लघुकथा 2.7k Downloads 8.1k Views Writen by Lala Shrinivas Das Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण आप के कहनें मूजब किसी आदमी की बातों सै उस्का स्वभाव नहीं जाना जाता फ़िर उस्का स्वभाव पहचान्नें के लिये क्या उपाय करैं ? लाला मदनमोहननें तर्क की. उपाय करनें की कुछ जरुरत नहीं है, समय पाकर सब अपनें आप खुल जाता है लाला ब्रजकिशोर कहनें लगे मनुष्य के मन मैं ईश्वरनें अनेक प्रकार की वृत्ति उत्पन्न की हैं जिन्मैं परोपकारकी इच्छा, भक्ति और न्याय परता धर्म्मप्रवृत्ति मैं गिनी जाती हैं दृष्टांत और अनुमानादि के द्वारा उचित अनुचित कामों की विवेचना, पदार्थज्ञान, और बिचारशक्ति का नाम बुद्धिबृत्ति है. बिना बिचारे अनेकबार के देखनें, सुन्नें आदि सै जिस काम मैं मन की प्रबृत्ति हो, उसै आनुसंगिक प्रवृत्ति कहते हैं. Novels परीक्षा-गुरु लाला मदनमोहन एक अंग्रेजी सौदागर की दुकानमैं नई, नई फाशन का अंग्रेजी अस्बाब देख रहे हैं. लाला ब्रजकिशोर, मुन्शी चुन्नीलाल और मास्टर शिंभूदयाल उन्के... More Likes This उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya शनिवार की शपथ द्वारा Dhaval Chauhan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी