"खंड़हर की लिपि" जयशंकर प्रसाद की एक कहानी है, जिसमें एक युवक की मनोदशा और उसके अतीत की छवियां प्रस्तुत की गई हैं। कहानी की शुरुआत वसंत ऋतु के आगमन से होती है, जब युवक एक पुरानी स्थान पर, जहाँ एक जीर्ण मन्दिर है, पहुँचता है। वहाँ वह एक पत्थर पर लिखी हुई अज्ञात लिपि को देखता है, जो उसे अतीत की याद दिलाती है। युवक अपनी यादों में खो जाता है, और उसकी आँखों के सामने झील की सुंदरता और वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य की छवियां उभरती हैं। एक दासी उसके पास आती है और उसे एक उपहार देने की बात बताती है, जिसमें उसे एक गोष्ठी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाता है। युवक, हालाँकि, अपनी हालात को बताते हुए कहता है कि वह अभी आनंद के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि वह हाल ही में एक दुखद घटना से गुजरा है, जिसमें उसका पोत समुद्र में डूब गया है। युवक अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए दासी को यह संदेश भेजता है कि वह अविश्वासिनी स्त्रियों से दूर भागना चाहता है। यह कहानी युवक के अंदर की गहरी भावनाओं, उसकी निराशा और उसके अतीत की गूंज को दर्शाती है। Khandhar Ki Lipi Jayshankar Prasad द्वारा हिंदी लघुकथा 4.7k 2.8k Downloads 13.5k Views Writen by Jayshankar Prasad Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण खंड़हर की लिपि जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has exclusive digital publishing rights of this book. Any illegal copies in physical or digital format are strictly prohibited. Matrubharti can challenge such illegal distribution / copies / usage in court. खंड़हर की लिपि जब वसन्त की पहली लहर अपना पीला रंग सीमा के खेतों परचढ़ा लाई, काली कोयल ने उसे बरजना आरम्भ किया और भौंरेगुनगुनाकर काना-फूँसी करने लगे, उसी समय एक समाधि के पास लगे हुए गुलाब ने मुँह खोलने का उपक्रम किया, किन्तु Novels जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has... More Likes This हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी