विवरण
अध्याय:36उत्कृष्टताकीकोईसीमानहींऔरजेंडरकीदीवारें मानवसमाजमेंजबभीकोईव्यक्तिशिखरपरपहुँचताहै,तोउसकीसफलताकाजश्नमनायाजानाचाहिए।लेकिनअक्सरयहदेखागयाहैकिसफलताकेमापदंडपुरुषोंऔरमहिलाओंकेलिएअलग-अलगरखदिएजातेहैं।हालहीमेंअंतरिक्षसेसकुशलवापसलौटींभारतीयमूलकीगौरव,सुनीताविलियम्सकीउपलब्धिपूरेविश्वकेलिएप्रेरणाकाविषयहै।किंतु,उनकीइसऐतिहासिककामयाबीकेबीचभीसमाजकाएकहिस्साउनकेव्यक्तिगतजीवन,विवाहऔरसंतानजैसेप्रश्नोंमेंउलझारहताहै।यहइसबातकासंकेतहैकिहमआजभीकितनीगहरीरूढ़िवादीमानसिकतासेघिरेहुएहैं।सुनीताविलियम्सकीसफलतावर्षोंकेकड़ेपरिश्रम,अटूटसमर्पणऔरवैज्ञानिकदृष्टिकोणकापरिणामहै।अंतरिक्षकीअनंतगहराइयाँयहनहींदेखतींकिवहांपहुँचनेवालाव्यक्तिपुरुषहैयामहिला;वहांकेवलयोग्यताऔरसाहसकीपरीक्षाहोतीहै। "उत्कृष्टताकाकोईजेंडरनहींहोता"—यहएकऐसासत्यहैजिसेहमेंआत्मसातकरनेकीआवश्यकताहै।जबकोईपुरुषवैज्ञानिकयाअंतरिक्षयात्रीबड़ीउपलब्धिहासिलकरताहै,तोसमाजशायदहीकभीउसकीशादीयाबच्चोंकेबारेमेंचर्चाकोप्राथमिकतादेताहै।फिरमहिलाओंकेमामलेमेंयहअघोषितसवालहमेशाउनकेसाथक्योंचलताहै?समाजमेंयहधारणाव्याप्तहैकिमहिलाकाअंतिमउद्देश्यकेवलविवाहऔरसंतानोत्पत्तिहै।यदिवहअपनेकरियरमेंऊँचाइयोंकोछूतीहै,तोभीउसेअक्सरइनपारंपरिकपैमानोंपरतौलाजाताहै।हमेंयहसमझनेकीजरूरतहैकिएकमहिलाकाअस्तित्वइनरूढ़ियोंसेकहींऊपरहै।वहदेश,दुनियाऔरमानवताकीसेवाकेलिएअपनीकाबिलियतकेदमपरकिसीभीक्षेत्रमेंनेतृत्वकरसकतीहै।सुनीताविलियम्सजैसीविभूतियाँहमेंसिखातीहैंकिसपनोंकीउड़ानकामार्गकिसीसामाजिकबंधनकामोहताजनहींहोता।समयआगयाहैकिहमअपनीइससंकीर्णविचारधारासेबाहरनिकलें।हमेंमहिलाओंकोउनकीउपलब्धियोंकेलिएसम्मानितकरनाचाहिए, नकिउन्हेंघरेलूऔरसामाजिकदायित्वोंकेचश्मेसेहीदेखनाचाहिए।जबहमप्रतिभाकोकेवलप्रतिभाकेरूपमेंदेखनाशुरूकरेंगे,तभीएकन्यायपूर्णऔरप्रगतिशीलसमाजकानिर्माणसंभवहोगा।सीख/नैतिकसंदेशइसअध्यायसेहमेंयहमहानशिक्षामिलतीहैकिकिसीभीव्यक्तिकीसफलताकामूल्यांकनउसकेचरित्र,मेहनतऔरयोग्यताकेआधारपरहोनाचाहिए, नकिउसकेजेंडरयासामाजिकस्थितिकेआधारपर।महिलाओंकेप्रतिअपनीमानसिकताकोबदलनाऔरउन्हेंउनकीव्यक्तिगतपसंदकेअनुसारजीवनजीनेवदेशकीसेवाकरनेकेलिएप्रोत्साहितकरनाहीवास्तविकराष्ट्रवादऔरप्रगतिहै।उत्कृष्टताकामार्गसबकेलिएखुलाहै;हमेंबसउनदीवारोंकोगिरानेकीजरूरतहैजोहमनेअपनेदिमागमेंबनारखीहैं।अध्याय:37नवरात्रिकाआध्यात्मिकमहत्वऔरशक्तिकाप्राकट्य नवरात्रिकापर्वकेवलउपवासऔरउत्सवकानामनहींहै,बल्कियहबुराईपरअच्छाईकीविजयऔरआंतरिकशक्तिकेजागरणकाप्रतीकहै।हमारीसंस्कृतिमेंआदिशक्तिमाँदुर्गाकीउपासनाकायहनौदिवसीयअनुष्ठानअत्यंतप्राचीनऔरगौरवशालीहै।पुराणोंकेअनुसार,नवरात्रिकाव्रतऔरशक्तिकीउपासनाकरनेवालेसबसेपहलेव्यक्तिमर्यादापुरुषोत्तमभगवानश्रीरामचंद्रजीथे।उन्होंनेरावणजैसीआसुरीशक्तियोंपरविजयप्राप्तकरनेकेलिएनौदिनोंतकमाँदुर्गाकीकठिनआराधनाकीथी,जिसकेपश्चातहीउन्हेंसफलताप्राप्तहुई।माँदुर्गाकेप्राकट्यकीकथाहमेंएकताऔरसामूहिकशक्तिकासंदेशदेतीहै।जबमहिषासुरनामकदैत्यकाअत्याचारदेवताओंऔरमनुष्योंपरअत्यधिकबढ़गया,तबब्रह्मा,विष्णुऔरमहेशसहितसमस्तदेवताओंनेअपनीरक्षाकेलिएत्रिमूर्तिसेविनतीकी।उससमयसभीदेवताओंकेतेजऔरसंकल्पसेमाँदुर्गाकास्वरूपप्रकटहुआ।माँकेशैलपुत्रीसेलेकरसिद्धिदात्रीतककेनौरूपवास्तवमेंशक्तिकेअलग-अलगचरणोंकोदर्शातेहैं।माँदुर्गाको'अष्टभुजाधारी'कहाजाताहैक्योंकिउनकेहाथोंमेंसमस्तदेवताओंद्वाराप्रदानकिएगएविशेषशस्त्रथे,जोदुष्टोंकेविनाशकेलिएआवश्यकथे।लगातारनौदिनोंऔररात्रियोंतकमाँदुर्गाऔरमहिषासुरकेबीचभीषणयुद्धचला,औरअंततःदसवेंदिनमाँनेमहिषासुरकावधकरदिया।भारतमेंदीपावली,शिवरात्रिऔरनवरात्रिजैसेत्यौहारमुख्यरूपसेरात्रिकेसमयमनाएजातेहैं,क्योंकिहमारेऋषि-मुनियोंनेरात्रिकेसमयको'सिद्धि'औरआध्यात्मिकसाधनाकेलिएसर्वश्रेष्ठमानाहै। 'नवरात्रि'शब्दकाअर्थही'नौविशेषरात्रियाँ'है,जोहमारेजीवनकेअंधकारकोमिटाकरज्ञानऔरशक्तिकाप्रकाशलातीहैं।यहपर्वहमेंसिखाताहैकिजबभीधर्मकीहानिहोतीहैऔरअधर्मबढ़ताहै,तबसामूहिकसंकल्पसेएकऐसीशक्तिकाजन्महोताहैजोबुराईकाअंतकरदेतीहै।हमेंइननौदिनोंमेंकेवलबाहरीअनुष्ठानहीनहींकरनेचाहिए,बल्किअपनेभीतरकीशांति,सिद्धिऔरसामर्थ्यकोजगानेकाप्रयासभीकरनाचाहिए।सीख/नैतिकसंदेशइसअध्यायसेहमेंयहमहानशिक्षामिलतीहैकिशक्तिकाउपयोगहमेशाधर्मकीरक्षाऔरपीड़ितोंकीसहायताकेलिएहोनाचाहिए।माँदुर्गाकास्वरूपहमेंसिखाताहैकिएकहीशक्तिमेंसृजनऔरसंहारदोनोंकीक्षमताहोतीहै।हमेंअपनेजीवनकीबुराइयोंऔरनकारात्मकविचारोंरूपी'महिषासुर'काअंतकरनेकेलिएअपनेभीतरकीसंकल्पशक्तिकोजाग्रतकरनाहोगा।शांति,समृद्धिऔरखुशहालीतभीसंभवहैजबहमसत्यऔरन्यायकेमार्गपरअडिगरहें। अध्याय:38अटूटविश्वासऔरएकाग्रताकीपराकाष्ठा सफलताशारीरिकपूर्णताकीमोहताजनहींहोती,बल्कियहमनकीदृढ़ताऔरआत्माकेविश्वासकापरिणामहै। "मनकेहारेहारहै,मनकेजीतेजीत"—यहकहावतसदियोंसेहमेंप्रेरितकरतीआईहै,लेकिनइसेसाक्षातरूपमेंचरितार्थकियाहैजम्मू-कश्मीरकेरहनेवालेपवनकुमारने।पवनकुमारशत-प्रतिशतदृष्टिबाधितहैं,लेकिनउनकेभीतरकासंकल्पऔरलक्ष्यकेप्रतिसमर्पणकिसीभीसामान्यव्यक्तिसेकहींअधिकतीव्रहै।उनकीकहानीहमेंरामायणकालकेउस'शब्दभेदीबाण'कीयाददिलातीहै,जिसकाप्रयोगराजादशरथध्वनिऔरअनुभवकेआधारपरकरतेथे।पवनकुमारकीप्रतिभाकोउनकेकोच,कुलदीपवेदवानजीनेपहचाना।पिछलेचारवर्षोंसेवेजम्मू-कश्मीरकेकटरास्थितस्टेडियममेंनिरंतरअभ्यासकररहेहैं।दृष्टिबाधितहोनेकेबावजूदधनुषचलानाऔरसटीकनिशानालगानालगभगअसंभवसाप्रतीतहोताहै,लेकिनतकनीकऔरमानवीयसंकल्पकेमेलनेइसेसंभवबनादिया।उनकेकोचनेउनकेलिएएकविशेष'दिव्यदृष्टिमशीन'तैयारकीहै,जोनिशानेकीदिशाकोसेंस(महसूस)करनेमेंमददकरतीहै।पवनकुमारइसीमशीनऔरअपनीतीव्रसंवेदनशीलताकेसहारे३०मीटरकीदूरीसेसटीकनिशानालगातेहैं।हैरानीकीबातयहहैकिपवनकुमारलक्ष्यकोदेखनहींसकते,वेउसेकेवल'महसूस'करतेहैं।उनकीयहउपलब्धिभारतीयतीरंदाजीकेइतिहासमेंएकनयाअध्यायलिखनेजारहीहै।कोचकुलदीपजीकाविश्वासहैकिआगामीपैरालंपिकखेलोंमेंपवनकुमारभारतकाप्रतिनिधित्वकरेंगेऔरस्वर्णपदकजीतकरतिरंगालहराएंगे।आजतकभारतकीओरसेकिसीभीदृष्टिबाधिततीरंदाजनेइसस्तरपरप्रतिभागनहींकियाहै,जिससेपवनकुमारकीयात्राऔरभीमहत्वपूर्णहोजातीहै।पवनकुमारकीयहगाथाहमेंसिखातीहैकिबाधाएंकेवलहमारेदिमागमेंहोतीहैं।यदिहमारामनकिसीलक्ष्यकोप्राप्तकरनेकेलिएअडिगहोजाए,तोशरीरकीसीमाएंअपनेआपसमाप्तहोजातीहैं।हारऔरजीतकानिर्णयमैदानमेंहोनेसेपहलेहमारेमनकेभीतरहोताहै।यदिहममनसेजीतगए,तोदुनियाकीकोईभीताकतहमेंसफलहोनेसेनहींरोकसकती।सीख/नैतिकसंदेशइसअध्यायसेहमेंयहमहानशिक्षामिलतीहैकिहमेंअपनीकमियोंकोअपनीकमजोरीनहीं,बल्किअपनीशक्तिबनानाचाहिए।पवनकुमारकाउदाहरणसिद्धकरताहैकिएकाग्रताऔरनिरंतरअभ्याससे'असंभव'कोभी'संभव'बनायाजासकताहै।हमेंकभीभीअपनीपरिस्थितियोंकारोनानहींरोनाचाहिए,बल्किउपलब्धसंसाधनोंऔरअपनेआत्मबलकेसहारेआगेबढ़नाचाहिए।जबमनमेंजीतकासंकल्पहोताहै,तोपूरीकायनातरास्तादेनेकेलिएतैयारहोजातीहै। अध्याय:39देनेकासुखऔरआत्मीयताकादान अक्सरहम'दान'काअर्थकेवलधनयावस्तुओंकेवितरणसेलगातेहैं,लेकिनजीवनकासबसेबड़ाऔरमूल्यवानदान'समय'और'आत्मीयता'कादानहै।आजकेइसडिजिटलयुगमें,जहाँहरव्यक्तिअपनीस्क्रीनमेंखोयाहुआहै,अपनोंकेलिएसमयनिकालनाएकदुर्लभगुणबनगयाहै।बेंगलुरुकेएकबहुराष्ट्रीयकंपनी(MNC)मेंकार्यरतसॉफ्टवेयरइंजीनियरतारानाथगजेंद्रजीकीकहानीहमेंसिखातीहैकिकैसेएकव्यक्तिकाछोटासाविचारसमाजकेसूनेपनकोदूरकरसकताहै।तारानाथजीअपनेऑफिसजातेसमयप्रतिदिनरास्तेमेंएकअनाथालयऔरएकवृद्धाश्रमदेखतेथे।एकदिनउन्होंनेसंकल्पलियाकिवेकेवलवहांसेगुजरेंगेनहीं,बल्किउनलोगोंकेसाथकुछसमयव्यतीतकरेंगे।उन्होंनेमहसूसकियाकिअनाथालयकेबच्चोंऔरवृद्धाश्रमकेबुजुर्गोंकेजीवनमेंसबसेबड़ीकमीसंसाधनोंकीनहीं,बल्कि'अपनेपन'और'संवाद'कीहै।इससूनेपनकोभरनेकेलिएउन्होंने'सेवाफॉरस्माइल' (Seva for Smile)नामकएकसंस्थाकीनींवरखी।उन्होंनेएकटेम्पोट्रैक्टरखरीदा,एकसमर्पितऐपबनायाऔरअपनेसाथीसॉफ्टवेयरइंजीनियरोंकोइसमुहिमसेजोड़ा।आजबेंगलुरुऔरमैसूरजैसेशहरोंकेसैकड़ोंयुवाइंजीनियरशनिवारऔररविवारकोअपनासमयअनाथालयऔरवृद्धाश्रमोंमेंबितातेहैं।वेवहांजाकरबुजुर्गोंऔरबच्चोंकेलिएस्वयंखानाबनातेहैं,उनकेसाथखेलतेहैंऔरउनकीबातेंसुनतेहैं।यह'गुणवत्तापूर्णसमय' (Quality Time)उनलोगोंकेचेहरेपरजोमुस्कानलाताहै,वहीवास्तविकसेवाहै।आजकेसमयमेंहमारेबुजुर्गसमाजऔरपरिवारमेंभीअकेलेहोतेजारहेहैं।मोबाइलकीव्यस्ततानेहमेंअपनोंसेहीदूरकरदियाहै।तारानाथगजेंद्रजीकीयहपहलहमेंयाददिलातीहैकिसमाजकेप्रतिहमाराकर्तव्यकेवलकरचुकानानहीं,बल्किउनलोगोंकेजीवनमेंखुशियाँभरनाभीहैजिन्हेंहमारीसबसेज्यादाजरूरतहै।सीख/नैतिकसंदेशइसअध्यायसेहमेंयहमहानशिक्षामिलतीहैकिमानवताकीसच्चीसेवादूसरोंकेदुखऔरसूनेपनकोसाझाकरनेमेंहै।धनकादानकोईभीकरसकताहै,लेकिनअपनेव्यस्तजीवनसेकुछपलनिकालकरकिसीअकेलेव्यक्तिकेसाथबैठनाऔरउसेयहमहसूसकरानाकि"कोईउसकाअपनाहै",सबसेबड़ीइबादतहै।हमेंअपनेघरकेबुजुर्गों,माता-पिताऔरसमाजकेउपेक्षितवर्गोंकोसमयदेनाचाहिए।यादरखें,मुस्कानबांटनेसेहीजीवनमेंवास्तविकसुखऔरसंतुष्टिप्राप्तहोतीहै।