in all beings book and story is written by कमल चोपड़ा in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. in all beings is also popular in Moral Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. सर्वभूतेषु कमल चोपड़ा द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 204 555 Downloads 3.6k Views Writen by कमल चोपड़ा Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सर्वभूतेषु कमल चोपड़ा देवियाँ थीं कि प्रगट नहीं हो रही थीं। हलवा-पूड़ी-छोले सब-कुछ तो तैयार कर चुकी थी विमला। इन्तजार था तो बस कन्याओं का। मुहल्ले में से पूजन के लिए नौ कन्याएँ जुटाना मुश्किल हो रहा था, लेकिन...उसके पति गुप्ताजी कभी इसके घर, कभी उसके घर जा-जाकर कन्याओं को आमन्त्रित कर रहे थे। गिने-चुने घरों में कन्याएँ थीं, जो थीं वो भी छोटी-छोटी लाल-लाल चूड़ियाँ पहने कभी इसके घर, कभी उसके घर आ-जा रही थीं। नवरात्रों का अन्तिम दिन था आज।आसपास के सभी घरों से टेपरिकॉर्डरो More Likes This मांई के मांई द्वारा Anant Dhish Aman हंटर - 2 द्वारा Ram Make अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 द्वारा archana क्या सब ठीक है - 1 द्वारा Narayan Menariya अम्मा - 1 द्वारा Nandini Agarwal Apne Kalam Sein अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी