“कभी-कभी एक कागज़ का टुकड़ा वो कर देता है...जो सालों की खामोशी नहीं कर पाती।”---स्थान: ट्रेन — रेहाना की बर्थट्रेन की रफ्तार धीरे-धीरे तेज हो चुकी थी। खिड़की से बाहर अंधेरा था, लेकिन अंदर एक रौशनी थी — एक कागज़ की, जो उसके हाथों में था।वो पन्ना...जो आरव ने स्टेशन पर दिया था।उसके हाथ काँप रहे थे।शब्द अब आँखों में उतर रहे थे, और आँखों से दिल में।--- उसने पढ़ा…“तुम आई थीं…और लगा कि जैसे सब रुक गया।वो सात साल, सात सेकंड से ज़्यादा नहीं लगे…”“तुमने कुछ नहीं पूछा —">

बरसों बाद तुम - 4 Neetu Suthar द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Barsho Baad Tum द्वारा  Neetu Suthar in Hindi Novels
दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ थी।
हर कोई अपनी मंज़िल की तरफ भाग रहा था। गाड़ियों की आवाज़ें, चायवालों की पुकार, और बैग घसीटते हुए लोग — मानो हर चे...

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