तूम थे पर मेरे ना थे - 1 book and story is written by shikha in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. तूम थे पर मेरे ना थे - 1 is also popular in Love Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. तूम थे पर मेरे ना थे - 1 shikha द्वारा हिंदी प्रेम कथाएँ 1.3k 2.1k Downloads 7.4k Views Writen by shikha Category प्रेम कथाएँ पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण विवान सिंह राठौड़, एक ऐसा नाम जिससे दुनिया कांपती थी, आज अपने दादाजी के सामने खड़ा था। हमेशा शांत और मजबूत दिखने वाला वो शख्स आज थोड़ा बेचैन था।दादाजी ने गहरी आवाज़ में कहा —"विवान, अब तुझे शादी करनी ही होगी। अगर तूने शादी नहीं की तो मैं तुझे अपनी सारी प्रॉपर्टी से बेदखल कर दूंगा। और वो सब कुछ संजय के बेटे सुमित के नाम कर दूंगा। सोच ले क्या करना है... तेरे पास सिर्फ़ एक हफ्ते का वक्त है।"विवान बिना कुछ कहे, बस उन्हें देखता रहा। फिर वह धीमे कदमों से वहां से निकल गया — जैसे किसी More Likes This उसकी मुस्कान के नाम - 1 द्वारा kajal Thakur प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 1 द्वारा Anita Mafia King - 1 द्वारा Sah Ankita तुम और मैं - 1 द्वारा Priya Chaudhary Sirf Tumhara - 1 द्वारा InkImagination हुई मैं तेरी दीवानी - 1 द्वारा Pihu Patel मेरे हिस्से की ज़िंदगी - अध्याय 1 द्वारा sapna अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी