Gomati Tum Bahati Rahna - 5 book and story is written by Prafulla Kumar Tripathi in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Gomati Tum Bahati Rahna - 5 is also popular in Biography in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story.
गोमती, तुम बहती रहना - 5
Prafulla Kumar Tripathi
द्वारा
हिंदी जीवनी
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विवरण
गीतकार इंदीवर ने फिल्म “मैं चुप रहूँगी” के अपने एक लोकप्रिय गीत में लिखा है –“ सबके रहते लगता है जैसे कोई नहीं है मेरा , सूरज को छूने निकला था आया हाथ अंधेरा | जाने कहाँ ले चली है मुझको समय की धारा,रास्ता ही रास्ता है आगे न मंजिल है न किनारा | “ मैनें अपनी उम्र के लगभग हर मोड़ पर अपने जीवन को ऐसी ही समय की धारा में बहते हुए पाया है |मानो ज़िंदगी “आटो मोड” पर बही चली जा रही हो |
अपने जन्म वर्ष 1953 से अपने जीवन की युवावस्था और दाम्पत्य तथा नौकरी शुरुआत तक की अवधि का आत्मगंधी लेखा- जोखा मैंने अपनी आत्मकथा के पहले खंड “ आमी से ग...
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