में और मेरे अहसास - 52 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 52

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

जलन आफताब की सुहानी लगी lजलन माहताब की रूहानी लगी ll एक दूसरे पर जान न्यौछावर lप्यार की कहानी पुरानी लगी ll **************************** दिल की धड़कन मदहोश हो गईं हैं lनज़रे चार होते ही होश खो रहीं हैं ...और पढ़े


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