eklavya ekanki book and story is written by ramgopal bhavuk in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. eklavya ekanki is also popular in Drama in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. एकांकी - एकलव्य ramgopal bhavuk द्वारा हिंदी नाटक 2.8k 10.4k Downloads 27k Views Writen by ramgopal bhavuk Category नाटक पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण एकांकी नाटक एकलव्य रामगोपाल भावुक (गाँव के चौराहे पर नीम के पेड़ के नीचे एक तख्त डला है, उस पर पीठासन रखा है। उस पर भीलराज हिरण्यधनु बैठे हैं। उनके समाने दाये हाथ की ओर उनके मंत्री चंदन खड़े हैं। मंच के नीचे धनुषवाण लिये उनका एक सैनिक खड़ा हैं। सामने से भील परिधान में धनुषवाण लिये एकलव्य का प्रवेश।) एकलव्य- तात श्री प्रणाम। हिरण्यधनु- प्रभु तुम्हारी रक्षा करें। एकलव्य-तात श्री कुछ सोच रहे हैं? हिरण्यधनु-हाँ, वत्स सोच रहा था। अब धर्म- कर्म की कहीं कोई बात शेष नहीं है। कहते More Likes This प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 1 द्वारा Abantika अदृश्य पीया - 3 द्वारा Sonam Brijwasi सौदे का सिन्दूर - भाग 1 द्वारा Anil singh इस घर में प्यार मना है - 1 द्वारा Sonam Brijwasi गुमनाम - एपिसोड 1 द्वारा वंदना जैन बाबा भाग 1 द्वारा Raj Phulware सर्जा राजा - भाग 1 द्वारा Raj Phulware अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी